News

सर्व धर्म समन्वय की प्रतीक बन गई साध्वी डॉक्टर दर्शनप्रभा की गुणानुवाद सभा

एकाएक अस्त हो गया जिन शासन का चमकता सितारा- संचेती

मूलचंद पेसवानी
जिला संवाददाता

मूलचंद पेसवानी वरिष्ठ पत्रकार, जिला संवाददाता - शाहपुरा / भीलवाड़ा 

callwebsite

बीगोद। स्थानीय श्वेतांबर जैन मंदिर में 21 अगस्त गुरुवार को श्रमण संघ की राष्ट्रीय स्तर पर विख्यात महासति दक्षिण सिंहणी डॉक्टर दर्शनप्रभा जी महाराज के 18 अगस्त को बेंगलुरु (कर्नाटक) में देवलोक गमन पर क्षेत्र के सुप्रतिष्ठित संचेती परिवार द्वारा गुणानुवाद सभा का आयोजन किया गया जिसमें सकल जैन समाज, माहेश्वरी समाज, अग्रवाल समाज सहित सनातन दर्शन की विभिन्न धर्म संस्कृतियों के महानुभावों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।

इसी अवसर पर लोकमान्य संत गुरुदेव रूपचंद जी महाराज की सातवीं पुण्यतिथि एवं संचेती परिवार की शिक्षाविद बहन कमला जैन की तीसरी पुण्यतिथि पर उनके भी गुणगान किए गए। गुणानुवाद सभा को संबोधित करते हुए जैन समाज के मूर्धन्य समाजसेवी समाज रत्न दिनेश संचेती दिनकर ने कहा कि डॉक्टर दर्शन प्रभा जी महाराज राष्ट्रीय श्रमण संघ के अंतर्गत विश्व संत पुष्कर मुनि गुरु परंपरा में 20 वर्ष की भरी जवानी में दीक्षित हुए एवं अपने व्यक्तित्व कृतित्व से जिनशासन की अभूतपूर्व प्रभावना करते हुए इस तरह से चमत्कृत किया कि जिन शासन की मिसाल बन गया। अपने गजब के संयम व तपोबल से उनकी महिमा हिमशिखरवत ऊंचाई छूती गई तथापि उनकी सरलता, सादगी, स्पष्टता, निर्भीकता देखते बनती थी। एक बार जो भी उनके संपर्क में गया उनका होकर रह गया।

IMG 20250821 WA0057 IMG 20250821 WA0056

श्री संचेती ने कहा कि उन्होंने अनेकों उत्कृष्ट संत-साध्वियों का निर्माण कर श्रमण संघ को उपकृत किया। उनके अनुज को उन्होंने संत बनाया जो, आज राष्ट्रसंत दक्षिण सम्राट नरेश मुनि जी महाराज के नाम से राष्ट्रीय स्तर पर विख्यात हैं नरेश मुनि के शिष्य सालीभद्र मुनि को उन्होंने पुत्रवत प्यार देखकर दृढ़ संयमी बनाया। साध्वी मेघा श्री जी, महिमा श्री जी, समृद्धि श्री जी नामक शिष्याओं को तरास कर महावीर शासन की प्रभावना में समर्पित किया । उन्होंने शिष्य शिष्याओं को मां की तरह प्यार लुटाया तथा स्वयं अनुशासन में रहकर सबको अनुशासन में रहना सिखाया। 51 वर्ष के संयम जीवन को उन्होंने जिस उत्कृष्ट व बेदाग ढंग से जीया तथा साधना को जिस तरह ऊंचाई दी, उसकी अमर गाथा युगों युगों तक गाई जाती रहेगी। उन्हें मृत्यु का पूर्वाभास हो गया एवं मृत्यु के ढाई घंटे पहले संथारे के प्रत्याख्यान ले लिए, यह उनके निष्कपट व उज्ज्वल चरित्र का स्पष्ट प्रमाण रहा।

श्री संचेती ने कहा कि हमने उनको धर्म निर्देशिका बहन के रूप में माना तथा उनके अटूट धर्म स्नेह से सिंचित हो अपने आपको गोरवान्वित महसूस किया । उनका विछोह जीवन भर खलता रहेगा। रुपमुनि जी महाराज एक लोकमान्य संत होकर महिमावन्त संतरत्न हुए ,उनके देवलोक गमन को भी 7 वर्ष बीत गए। इसी तरह संचेती परिवार की दीदी शिक्षाविद कमला जैन भी 3 वर्ष पहले अलविदा कह गए। संचेती परिवार के लिए यह घटनाक्रम असहनीय रहे। गुणानुवाद सभा का आयोजन क्षेत्र के सुप्रसिद्ध समाजरत्न दिनेशकुमार चंद्रप्रकाश सूर्यप्रकाश संचेती परिवार ने किया । जैन संघ सिंगोली (मध्य प्रदेश )के अध्यक्ष प्रकाशचंद नागोरी ने अध्यक्षता की। स्वाध्यायी कमलेश जैन जयपुर, भेरूलाल जैन अलीगढ़, रचनात्मक समाजसेवी भोपाल सिंह बाफना बीगोद, जैनसंघ खटवाड़ा के समाजसेवी विजय सिंह बापना का मुख्य अतिथि रहे। दिगंबर जैन संघ के अध्यक्ष विमल कुमार जैन, माहेश्वरी समाज के संरक्षक हरकचन्द आगाल, जैन समाज के सुप्रतष्ठित पारस कुमार मेहता, उपाध्यक्ष नरेश कुमार बापना, मंत्री महावीर बापना, उपाध्यक्ष शिवकुमार बापना, शिक्षाविद नवीन कुमार पगारिया ,दिगंबर जैन संघ के मंत्री दीपक पदम जैन, माहेश्वरी समाज के श्यामलाल जगदीश चंद्र मूंदड़ा, महावीर जन कल्याण संस्थान के अध्यक्ष महेंद्र बाबेल, अग्रवाल समाज के प्रमुख बसंतीलाल नागोरी, पूर्व सरपंच तुलसी काला बतौर अतिथि के रूप में उपस्थित हुए।

अनेकों वक्ताओं ने महासाध्वी डॉक्टर दर्शनप्रभा जी महाराज के व्यक्तित्व कृतित्व पर विचार रखे एवं उनके देवलोकगमन को जिन शासन की अपूरणीय क्षति बताया।

अखिल भारतवर्षीय दिवाकर जैन विचार मंच रजिस्टर्ड नई दिल्ली की राष्ट्रीय मंत्री मधु संचेती ने दर्शनप्रभा महाराज की स्मृतियों को उकेरते हुए कहा कि उनकी गुण गरिमा उन्हें कभी मरने नहीं देगी, वे मरकर भी भक्त ह्रदयों में अमर रहेंगे ।

सभा में गुलाब सिंह बापना, शिव कुमार पगारिया, भिछोर के धर्मचंद मेहता, भोपाल सिंह लोढ़ा, दिगंबर संघ के कोषाध्यक्ष चंद्र प्रकाश जैन, अमरसिंह बाबेल, ओमप्रकाश व्यास, भोपाल सिंह पगारिया जोजवा सहित बड़ी संख्या में स्थानीय क्षेत्रीय व्यक्ति उपस्थित थे। गुणानुवाद सभा में नवकार महामंत्र जाप, राम ध्वनि सहित, सर्वधर्म की प्रार्थनाओं का गुंजायमान हुआ। डॉ. दर्शनप्रभा अमर रहे के जनादेश होते रहे।

इस अवसर पर पूजारी दयाशंकर वैष्णव के नेतृत्व में संचेती परिवार ने पर्युषण पर्व संबंधी जैन मंदिर में पूजा अर्चना की रस्म अदा की जिसमें भी सभी ने भाग लिया।

पारस कुमार मेहता ने सभा के समापन की घोषणा की। संचेती परिवार ने आभार व्यक्त कर प्रसाद व प्रभावना के कवर वितरित किए।

मूलचन्द पेसवानी शाहपुरा

जिला संवाददाता, शाहपुरा/भीलवाड़ा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button