“साध्वी प्रज्ञा को न्याय मिला – अब धर्म और राष्ट्र के प्रति समर्पित शक्ति को सलाम!”
प्रवासी राजस्थानी समाज ने पूर्व सांसद प्रज्ञा ठाकुर का किया स्वागत

मुंबई।
मालेगांव बम विस्फोट मामले में लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद पूर्णरूप से निर्दोष घोषित की गईं भाजपा की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर निर्दोष होने के बाद पहली बार शनिवार को मुंबई पहुंची।
उनके आगमन पर राजस्थानी प्रवासियो को पता चला तो मुंबई के प्रवासी राजस्थानी समाज के व्यापारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
यह स्वागत केवल एक राजनीतिक हस्ती का नहीं, बल्कि धर्म, राष्ट्र और गौरव की रक्षा के लिए संघर्षरत एक साध्वी के सम्मान में था, जिन्होंने 16 वर्षों तक अदालतों में अपमान, पीड़ा और अन्याय का सामना करते हुए भी अपनी विचारधारा से समझौता नहीं किया।
अब मेरा उद्देश्य स्पष्ट हैं – सनातन धर्म और भारत माता के लिए अंतिम सांस तक समर्पित रहना साध्वी प्रज्ञा

स्वागत समारोह में साध्वी प्रज्ञा ने भावुक होकर कहा –
मैं किसी से बदला लेने नहीं आई, मैं भारत को वैभवशाली बनाने आई हूं। मालेगांव जैसे मामलों में निर्दोष संतों-साध्वियों को वर्षों तक जेलों में सड़ाने का पाप करने वालों को इतिहास कभी माफ नहीं करेगा।”
उन्होंने आगे कहा –
जब मैंने जेल में पहली बार भगवान शिव का ध्यान लगाया, तब मुझे विश्वास हुआ कि यह कष्ट संयोग नहीं, तपस्या हैं—आज जब न्याय मिला हैं, तो यह मेरा नहीं, हर सनातनी का विजय हैं। मैं इस स्नेह और समर्थन के लिए मुंबईवासियों की आभारी हूं।
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मुंबई के प्रमुख व्यापारी मासमा उपाध्यक्ष व गौभक्त गणपत पुरोहित,उमेदसिंह राजपुरोहित पूनाडिया,ठाकुर विश्व प्रताप सिंह, दिनेश बालेरा,उकाराम चौधरी, अर्जुनसिंह राजपुरोहित, मफाराम प्रजापति, मनोज भेटाला, नितेश वाली, विमल पालड़ी, विक्रम खिरोड़ी, ओमप्रकाश रावल, अनिल देसाई, किशोर नोरवा, जगदीश मनोरा, तेजाराम चौधरी, मदनलाल माली,श्रवण पालीवाल, महावीर तांतडा व महिलाओ मे श्रीमती संतोष पुरोहित, श्रीमती शांति देवी थांवला,श्रीमती गीता देवी टेलर, श्रीमती लीला देवी पुरोहित समेत सैकड़ो लोग मौजूद थे।
मासमा उपाध्यक्ष गणपत पुरोहित ने कहा: “साध्वीजी का न्यायिक विजय केवल एक व्यक्ति की जीत नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति पर लांछन लगाने वालों के लिए एक चेतावनी हैं। हमने वर्षों से देखा हैं कि किस तरह राष्ट्रभक्तों को झूठे मामलों में फंसाया गया। यह एक राजनीतिक षड्यंत्र था, जो अंततः न्याय के सामने धराशायी हुआ।”
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इस अवसर पर कई सामाजिक प्रतिनिधियों ने कहा
प्रज्ञा ठाकुर केवल एक साध्वी नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, हमारी अस्मिता और हमारी आस्था की प्रतिनिधि हैं। उन्हें जब झूठे मुकदमों में फंसाया गया था, तब हमने उनकी आंखों में आंसू नहीं, बल्कि तेज देखा था। अब जब सत्य की विजय हुई हैं, तो यह हमारा दायित्व हैं कि हम उन्हें उनका सम्मान लौटा सके।
आगे क्या? साध्वी प्रज्ञा ने बताया कि वे धार्मिक जागरण, भारतीय गौरवशाली परंपराओं का प्रचार और युवाओं में राष्ट्रप्रेम जागृत करने के लिए भारत के प्रमुख नगरों में “धर्म रक्षा संवाद यात्रा” प्रारंभ करेगी, जिसकी शुरुआत जल्द ही काशी से होगी।
मुंबई में हुआ यह स्वागत केवल एक राजनीतिक प्रसंग नहीं, बल्कि एक साध्वी के पुनः समाज में सम्मानपूर्वक लौटने और राष्ट्रभक्ति को अपराध बताने वाली मानसिकता के खिलाफ जनजागरण का प्रतीक बन गया।
राजस्थान के प्रवासी समाज ने दिखा दिया कि वे केवल व्यापार नहीं करते, वे धर्म, न्याय और अस्मिता के प्रहरी भी हैं।











