79 वर्षों के संयम जीवन से जैनधर्म की दिग्दिगंत कीर्ति रचने वाले युगपुरुष – जैनाचार्य श्री रामचन्द्रसूरीश्वरजी

- उदयपुर
34वीं पुण्यतिथि पर उदयपुर में त्रिदिवसीय भक्ति महोत्सव सम्पन्न, अंतिम दीक्षा में दो लाख श्रद्धालु हुए थे शामिल, अंतिम यात्रा रही 24 किमी लंबी
जैनाचार्य श्री रत्नसेन सूरीश्वरजी म.सा. की पावन निश्रा में श्री श्वेताम्बर मूर्तिपूजक जैन संघ – मालदास स्ट्रीट, उदयपुर में जैनाचार्य श्री रामचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. की 34वीं स्वर्गारोहण पुण्यतिथि के पावन अवसर पर त्रिदिवसीय देव-गुरु भक्ति महोत्सव का आयोजन हुआ। महोत्सव के तीसरे दिन आयोजित गुणानुवाद सभा में श्रद्धा, भक्ति और स्मृति की भावधारा बहती रही।
सभा का शुभारंभ प्रसिद्ध संगीतकार नागेश्वर भाई द्वारा प्रस्तुत सुमधुर संगीतमय भक्ति से हुआ। मुंबई से पधारे चेतनभाई मेहता ने आचार्यश्री के पंचाचार पालन और जीवन के प्रेरक प्रसंगों को सारगर्भित रूप से प्रस्तुत किया। इस अवसर पर डाॅ. शैलेन्द्रजी हीरण, राजेशजी जावरिया, जसवंतसिंहजी सुराणा, हेमन्तभाई जैन, अभिषेकजी सहित कई श्रद्धालुओं ने पुष्पवृष्टि द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित की।

जैनाचार्य श्री रत्नसेन सूरीश्वरजी म.सा. ने अपने प्रभावशाली प्रवचन में कहा:
“जैनधर्म के सिद्धांतों की रक्षा हेतु जिन्होंने 79 वर्षों तक संयमित जीवन जीते हुए अनगिनत संघर्षों का सामना किया और जैनधर्म की कीर्ति को दिग्दिगंत तक फैलाया – वे थे जैनाचार्य श्री रामचन्द्रसूरीश्वरजी।”
उन्होंने आगे कहा कि 96 वर्ष की आयु में जब आचार्यश्री ने अंतिम दीक्षा प्रदान की, उस दीक्षा महोत्सव में दो लाख से अधिक श्रद्धालु उपस्थित थे। आज से 34 वर्ष पूर्व, उन्होंने चौविहार उपवास के साथ अत्यंत समाधिमरण करते हुए देह त्याग किया था। उनकी अंतिम यात्रा अहमदाबाद शहर में 24 किलोमीटर लंबी चली थी, जहाँ गुजरात के हर कोने में शोक व्यक्त किया गया। देश के कई प्रमुख राजनेता भी उनके अंतिम दर्शन हेतु पधारे थे।
जैनाचार्य रत्नसेन सूरीश्वरजी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा:
“यदि हम युक्ति और आस्था के साथ उनके बताए मार्ग पर चलें, तो यह पथ हमारे लिए मोक्ष के द्वार खोलने वाला बन सकता है।”
सभा में 500 से अधिक श्रद्धालु उपस्थित रहे। प्रारंभ में 50 रुपये की प्रभावना हुई तथा श्रद्धांजलि स्वरूप 350 से अधिक आयंबिल तप किए गए।
अंत में यह घोषणा की गई कि
👉 दि. 27 जुलाई को प्रातः 9:00 बजे संगीतमय पश्चात्ताप भावयात्रा का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेंगे।














