
“खेलने नहीं, अब चोट खाने उतरते हैं मैदान में!” — युवाओं का फूटा गुस्सा
कभी जहां अभ्यास और प्रतियोगिताएं होती थीं, अब वहां बजरी, अधूरा कंक्रीट और गहरे गड्ढे फैले हुए हैं। नतीजतन, खिलाड़ी घायल हो रहे हैं और मैदान का उपयोग अब खेल के लिए नहीं, चोटों के लिए हो रहा है।
स्थानीय युवाओं का फूटा गुस्सा
स्थानीय युवाओं ने बताया कि ठेकेदार से कई बार निर्माण कार्य शुरू करने की अपील की गई, लेकिन हर बार सिर्फ “जल्द शुरू करेंगे” जैसे आश्वासन ही मिले। ठेकेदार की बात अब छलावा लगने लगी है।

प्रशासन की ओर से भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे गांव के लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है।
खिलाड़ियों की समस्याएं
- मैदान की खराब स्थिति के कारण कई मुकाबले रद्द हो चुके हैं।
- अभ्यास रुक गया है, जिससे भविष्य के खिलाड़ियों का विकास रुक गया है।
- गांव में एकमात्र मैदान होने के कारण बच्चों के पास कोई अन्य विकल्प नहीं है।
युवाओं की मांगें
“खेलने का हक हमारा है, ये लापरवाही नहीं सहेंगे!” — एक स्थानीय युवा
ग्रामीणों और खिलाड़ियों ने प्रशासन से स्पष्ट रूप से निम्नलिखित मांगे की हैं:
- एक सप्ताह के भीतर मैदान निर्माण कार्य को शुरू किया जाए।
- ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
- खेल के लिए सुरक्षित और समतल मैदान सुनिश्चित किया जाए।
आंदोलन की चेतावनी
यदि जल्द ही मैदान कार्य शुरू नहीं किया गया, तो युवाओं ने चेताया है कि वे विद्यालय गेट के सामने धरना प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
गांव के एकमात्र खेल मैदान की यह स्थिति प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करती है, जो ग्रामीण प्रतिभाओं के भविष्य पर प्रश्नचिन्ह लगा रही है।















