गोड़वाड़ के पर्यावरण संत: स्व. किशोरमलजी खीमावत को समर्पित श्रद्धांजलि

गोड़वाड़ सपूत, महामना, पर्यावरण प्रेमी, रानी को महारानी बनाने वाले, देदीप्यमान नक्षत्र, धरती का दीया — स्व. किशोरजी खीमावत
जिन्होंने वृक्ष लगाए नहीं... संतानें बोईं हैं। धरती को ओढ़ा, गगन को छू लिया, सूखे में हरियाली का स्वप्न बुना, वो चले गए, पर हर शाख कहती है: “जिसने जिया वृक्षों में, वो कभी मरता नहीं।।”
यदि आज गोड़वाड़ की मिट्टी मुस्कुरा रही है, तो यह केवल मौसम का करिश्मा नहीं… यह एक पर्यावरण संत की तपस्या का परिणाम है – “श्री किशोरजी वी. खीमावत (खिमेल)”।
25 लाख वृक्ष – नारे से नहीं, निष्ठा से
हर पौधा उनका स्वप्न था, हर जड़ में उनकी संवेदना थी। उन्होंने हर एक पेड़ को बच्चों की तरह पाला, खुद अपने टैंकर से पानी दिया, लोहे की झालियों से सुरक्षा की। सूखी धरती पर हरियाली की चादर बिछा दी। कोई वृक्ष लगाता है दिखावे के लिए, उन्होंने लगाए जीवन बचाने के लिए। टहनी-टहनी में ममता रच दी, ऐसे लोग दोबारा नहीं मिलते इस जमाने में।
सिर्फ मनुष्यों के लिए नहीं… वन्यजीवों के लिए भी
उन्होंने जंगल के जंगली पशुओं के लिए सीमों (पक्के जलाशयों) का निर्माण करवाया।
दूर अरठ से पानी की पाइप लाइन डलवाई ताकि पशु भी प्यासे न रहें।
वे सिर्फ वृक्षारोपणकर्ता नहीं, प्रकृति के तपस्वी थे।
🌿 एक युगद्रष्टा, एक जनसेवक 🌿
पाली, जालोर, सिरोही, जोधपुर — हर जिले की हवाओं में उनके पसीने की महक है।
मिट्टी में उनके संघर्ष की जड़ें हैं।

एनीकट बनवाना, सड़कें सुधारना, जल संरक्षण, भूमि सुधार — उनके लिए पूजा-पाठ से कम नहीं था।
पेड़-पेड़ में छांव नहीं, संस्कार बो दिए, धरती की सांसों में गीत भर दिए, जो सूखा था, अब लहलहा रहा है। वे खीमावत नहीं, प्रकृति के महायोगी थे।
🙏 परंपरा जारी है… समर्पण के साथ 🙏
आज वे हमारे बीच नहीं हैं…
लेकिन गोड़वाड़ की हर डाल, हर बूँद, हर साँस में उनकी उपस्थिति जीवित है।
उनकी परंपरा आज भी उनकी धर्मपत्नी वांसती देवी खीमावत और यशस्वी सुपुत्र द्वारा उसी समर्पण भाव से आगे बढ़ाई जा रही है।
श्रद्धांजलि और संकल्प
माटी की आँखों में जो नमी है, वो उनके श्रम की कहानी है, खीमावत जी अब भले मौन हैं, पर हरियाली उनकी जुबानी है।
गोड़वाड़ रत्न, गोड़वाड़ गौरव, पर्यावरण के तपस्वी
स्व. किशोरमलजी खीमावत को
श्रद्धा-सुमन, कोटिशः नमन, वंदन।
“हर वृक्ष में उन्हें जीवित रखेंगे,
हर हरियाली में उन्हें प्रणाम करेंगे।”


















