जीवदया का श्रेष्ठतम उपयोग: कबूतरों के जीवन की रक्षा ही आज का सबसे बड़ा धर्म है

“दादर कबूतरखाना शांतिनाथ जैन मंदिर प्रांगण में — एकजुट होना ही सबसे बड़ा धर्म है!”
मुंबई के दादर पश्चिम स्थित प्राचीन श्री शांतिनाथजी जैन मंदिर (कबूतरखाना) के समीप, तीन लाख से अधिक मासूम कबूतर आज जीवन-मरण के संकट से जूझ रहे हैं।
यह संकट केवल कबूतरों का नहीं, यह हमारी संवेदना, संस्कृति और जीवदया धर्म की परीक्षा है।
🌿 श्रेष्ठतम उपयोग का अर्थ क्या है?
- पैसा कमाना श्रेष्ठ है, पर उसका उपयोग दान और सेवा में हो — यही उसका श्रेष्ठतम उपयोग है।
- ज्ञान प्राप्त करना अच्छा है, पर जब वह दूसरों के हित में लगे — तभी वह सार्थक है।
- समाज में प्रतिष्ठा पाना उत्तम है, पर वह तब ही मूल्यवान है जब वह निर्बलों के काम आए।
- जीवन जीना सबको आता है, पर जीवन को दूसरों के लिए जीना — यही है “Highest Use of Life”।
🐦 कबूतरों के लिए यह जीवन-मरण का प्रश्न है, हमारे लिए यह मनुष्यता की परीक्षा है
ये पक्षी न तो बोल सकते हैं, न विरोध कर सकते हैं, न समाचार छपवा सकते हैं। ये सिर्फ आकाश की ओर देखकर, अपनी निरीह आँखों से हमसे एक ही सवाल पूछते हैं —
“क्या तुम सच में इंसान हो?”
इन्हें बचाना कोई धर्म विशेष का कार्य नहीं, यह सम्पूर्ण मानवता का उत्तरदायित्व है।
🔥 अब मौन नहीं, आंदोलन चाहिए — अब चर्चा नहीं, संकल्प चाहिए
- अब केवल बातें नहीं, एक संगठित जागृति चाहिए।
- अब केवल संवेदना नहीं, संवेदनशील कर्म चाहिए।
- अब केवल बयानों की नहीं, वास्तविक उपस्थिति की ज़रूरत है।
📅 आयोजन की जानकारी
- तारीख: बुधवार, 6 अगस्त 2025
- समय: प्रातः 9:45 बजे
- स्थान: शांतिनाथजी जैन मंदिर, दादर पश्चिम (कबूतरखाना के पास)

आप सभी से निवेदन है कि परिवार सहित अवश्य पधारें।
💧 धर्म, श्रद्धा और दया का सच्चा संगम
क्योंकि जल देना ही यज्ञ है,
दाना डालना ही भोग है,
जीव बचाना ही आरती है,
और मूक प्राणियों के प्रति दया ही — सच्चा धर्म है।
“कबूतरों को बचाना कोई पक्षियों की चिंता नहीं, यह हमारी आत्मा की आवाज़ है, यह हमारी पीढ़ियों के संस्कार की कसौटी है।”
आइए — “श्रेष्ठतम उपयोग” की शुरुआत यहीं से करें।
- जहाँ हम अपने समय का उपयोग मूक प्राणियों की रक्षा में करें।
- जहाँ हम अपने धर्म का उपयोग संवेदना फैलाने में करें।
- जहाँ हम अपने जीवन का उपयोग किसी और के जीवन को बचाने में करें।

















