“खुडाला से फालना बनने की संघर्षभरी गाथा” “कभी वो जमाना था जब ट्रेन रुकती नहीं थी, आज वही फालना रेलवे स्टेशन पूरे डिवीजन का अभिमान है…”
फालना: जहां कभी ट्रेन नहीं रुकती थी, आज वही स्टेशन बना राजस्व का सिरमौर

आज जब फालना रेलवे स्टेशन से गुजरती तेज़ रफ्तार ट्रेनों और भीड़भाड़ वाले प्लेटफार्म को देखते हैं, तो शायद ही कोई सोच सके कि यह वही जगह है जहां पहले ट्रेन का ठहराव तक नहीं था।
खुडाला से शुरुआत – जब नाम था कुछ और, और पहचान भी अधूरी थी
सन् 1881 के आसपास, जब ब्रिटिश हुकूमत के राज में राजपुताना स्टेट रेलवे ने मीटर गेज रेलवे लाइन बिछाई, तब यहां एक छोटा-सा स्टेशन बना – “खुडाला स्टेशन”।
लेकिन उस समय…
- अधिकांश ट्रेनें यहां रुकती ही नहीं थीं
- यात्रियों को ट्रेन पकड़ने के लिए शिवगंज या फिर एरिनपुरा रोड (अब जवाई बांध) जाना पड़ता था
- एरिनपुरा में सैनिक छावनी होने के कारण वहीं हॉल्ट मिलता था
एक जागीरदार की पहल, और इतिहास बदल गया
उस समय फालना गांव के तत्कालीन जागीरदार ठाकुर प्रताप सिंह को यह बात खलती थी कि आस-पास के गांवों के लोगों को इतनी परेशानी झेलनी पड़ती है।
उन्होंने ब्रिटिश सरकार से आग्रह किया कि खुडाला स्टेशन पर भी ट्रेन का हॉल्ट शुरू किया जाए।
ब्रिटिश हुकूमत ने इस प्रस्ताव को स्वीकार किया और…
ठाकुर साहब के सम्मान में स्टेशन का नाम बदलकर उनकी जागीर “फालना” के नाम पर “फालना स्टेशन” कर दिया गया।
मीटर गेज से ब्रॉडगेज तक – संघर्ष और सफलता की कहानी
करीब 125 साल तक यह स्टेशन मीटर गेज का हिस्सा रहा। लेकिन जब बदलते समय में विकास की जरूरत महसूस हुई, तब 1979 में राजस्थान मीटर गेज प्रवासी संघ ने फालना को ब्रॉडगेज से जोड़ने का अभियान शुरू किया।
क्या हुआ इस संघर्ष में?
- धरने दिए गए
- आंदोलन हुए
- लाठियां और गोलियां भी झेली गईं
लेकिन हार नहीं मानी, और आखिरकार
सन् 1997 में फालना को ब्रॉडगेज लाइन का गौरव मिला।
आज का फालना: डिविजन का गौरव, जिले का अभिमान
फालना राजठिकाने के ठाकुर अभिमन्यु सिंह गर्व से बताते हैं –
“यह सभी के लिए गर्व की बात है कि जहां कभी ट्रेन रुकती नहीं थी, आज वही फालना स्टेशन अजमेर डिविजन में सबसे अधिक राजस्व देने वाले स्टेशनों में से एक है।”
- यहाँ से देश के प्रमुख शहरों के लिए ट्रेनों का संचालन होता है
- आसपास के कस्बों और गांवों के लोग यहीं से रेल यात्रा की शुरुआत करते हैं
- फालना अब सिरोही-पाली-मारवाड़ क्षेत्र का प्रमुख रेलवे केंद्र बन चुका है
इतिहास से सबक और भविष्य की उम्मीद
फालना स्टेशन की यह यात्रा हमें सिखाती है कि…
“जहाँ इच्छाशक्ति हो, वहाँ बदलाव की रेल जरूर गुजरती है – चाहे ट्रैक मीटर गेज का हो या जीवन का…”














