Religious

मातृकुंडिया तीर्थ विशेष: राजस्थान का “छोटा हरिद्वार”, मेवाड़ का पवित्र “हरिद्वार”

  • IMG 20250805 WA0014

Satyanarayan Sen
Reporter

Satynarayan sen is a Reporter from Bhilwara and Publish many types of other Categories.

CallEmail

चित्तौड़गढ़ जिले की सुरम्य वादियों में, बनास नदी के पवित्र तट पर बसा एक तीर्थ, जो इतिहास, आस्था और तपस्या का जीवंत प्रतीक है — मातृकुंडिया। इसे “छोटा हरिद्वार” या “मेवाड़ का हरिद्वार” भी कहा जाता है, और यह कोई अतिशयोक्ति नहीं है। यहां की भूमि न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि पौराणिक और सांस्कृतिक रूप से भी अत्यंत विशिष्ट है।


🧘‍♂️ परशुरामजी की तपोभूमि: मातृकुंडिया का पौराणिक महत्व

🔱 माता की हत्या के पाप से यहीं मिला था मुक्ति

हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुरामजी ने अपने पिता ऋषि जमदग्नि के आदेश पर अपनी माता रेणुका का वध किया था। यह कार्य उन्हें धर्म और आज्ञा के पालन हेतु करना पड़ा, परंतु यह पापबोध उन्हें भीतर से सालता रहा।

पौराणिक कथा के अनुसार, परशुरामजी ने मातृकुंडिया में तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया, और यहीं पर उन्हें मातृहत्या के पाप से मुक्ति मिली। इसी कारण इस स्थान का नाम “मातृकुंडिया” पड़ा – अर्थात जहां माता के कृत्य से मुक्ति मिली।


🌊 बनास नदी का पावन संगम: पुण्य स्नान का केंद्र

मातृकुंडिया में बनास नदी बहती है, जो इस स्थान को और अधिक आध्यात्मिक बनाती है। कहा जाता है कि यहां स्नान करने से पापों का नाश होता है और व्यक्ति को आत्मिक शांति प्राप्त होती है।

  • प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु यहां मकर संक्रांति, कार्तिक पूर्णिमा, और अक्षय तृतीया जैसे पावन अवसरों पर स्नान हेतु पहुंचते हैं

  • स्नान के बाद लोग शिव मंदिर और परशुराम मंदिर में दर्शन करते हैं और पिंडदान आदि कर्मकांड भी संपन्न करते हैं।


🛕 प्राचीन मंदिरों की श्रृंखला: आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र

🕉️ परशुराम मंदिर

इस तीर्थ में परशुरामजी का एक प्राचीन मंदिर स्थित है, जहां उनका तप और साधना स्मरण कर श्रद्धालु उनके पदचिन्हों पर चलने का संकल्प लेते हैं।

🔱 शिव मंदिर

यहां का शिव मंदिर भी अत्यंत प्राचीन और श्रद्धा का केंद्र है। मान्यता है कि भगवान शिव ने परशुराम को यहीं दर्शन दिए थे।

WhatsApp Image 2025 08 07 at 16.18.28

🌺 अन्य मंदिर

  • श्रीराम मंदिर

  • हनुमान मंदिर

  • गणेश मंदिर

  • नवग्रह मंदिर

यह सभी मंदिर श्रद्धालुओं को एक दिव्य वातावरण में आत्मिक अनुभूति कराते हैं।


🙏 मातृकुंडिया का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व

🧘‍♀️ श्राद्ध और पिंडदान का पवित्र स्थान

राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से लोग अपने पितरों की शांति के लिए यहां आते हैं। श्राद्ध पक्ष में यहां विशेष भीड़ होती है।

🪔 पवित्रता का दूसरा नाम: मातृकुंडिया

स्थानीय लोगों का मानना है कि यहां किए गए पुण्य कार्य, अन्य स्थानों की तुलना में सौ गुना अधिक फलदायक होते हैं।

🎉 मेलों का आयोजन

हर वर्ष यहां विशाल मेला लगता है, जिसमें ग्रामीण अंचलों से भारी संख्या में श्रद्धालु, संत, साधु और नागा बाबा शामिल होते हैं।


📍 भौगोलिक स्थिति और प्राकृतिक सौंदर्य

🏞️ सुरम्य घाटियां और पहाड़ियों से घिरा तीर्थ

मातृकुंडिया प्राकृतिक रूप से भी एक बेहद सुंदर स्थान है। बनास नदी के किनारे स्थित यह क्षेत्र हरे-भरे पेड़ों, शांति और प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है।

🛣️ सुविधाजनक पहुंच

  • स्थान: गुरलां ग्राम पंचायत, चित्तौड़गढ़ जिला

  • निकटतम रेलवे स्टेशन: चित्तौड़गढ़

  • सड़क मार्ग: मातृकुंडिया तक सीधा सड़क मार्ग उपलब्ध है, निजी वाहन और टैक्सी आसानी से पहुंचती हैं।


🧭 मातृकुंडिया से जुड़े अन्य विशेष तथ्य

  • यह स्थान ऋषि-मुनियों की तपोभूमि रहा है।

  • यहां आज भी साधु-संत वर्षों तक ध्यान साधना करते हैं।

  • स्थानीय प्रशासन द्वारा अब आधुनिक सुविधाएं और घाटों का निर्माण कराया जा रहा है।

  • पर्यटन विभाग द्वारा इसे धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना चल रही है।


🌟 मातृकुंडिया का महत्व आज की पीढ़ी के लिए

आज जब लोग अध्यात्म से दूर होते जा रहे हैं, ऐसे में मातृकुंडिया जैसे तीर्थस्थल हमें अपनी संस्कृति, मूल्यों और आध्यात्मिक परंपराओं की याद दिलाते हैं
यह न केवल एक पूजा स्थल है, बल्कि धर्म, इतिहास, प्रकृति और परंपरा का संगम है।


मेवाड़ का दिव्य उपहार — मातृकुंडिया

मातृकुंडिया तीर्थ न केवल मेवाड़ की, बल्कि पूरे राजस्थान की आस्था का केंद्र है। इसकी महत्ता केवल पौराणिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक भी है।
यह स्थान हमें धार्मिक चेतना, आत्मिक शांति और जीवन के उद्देश्य की दिशा में प्रेरित करता है।

यदि आपने मातृकुंडिया नहीं देखा, तो आपने मेवाड़ की आध्यात्मिक आत्मा को नहीं जाना।

न्यूज़ डेस्क

🌟 "सच्ची ख़बरें, आपके अपने अंदाज़ में!" 🌟 "Luniya Times News" पर हर शब्द आपके समाज, आपकी संस्कृति और आपके सपनों से जुड़ा है। हम लाते हैं आपके लिए निष्पक्ष, निर्भीक और जनहित में बनी खबरें। यदि आपको हमारा प्रयास अच्छा लगे — 🙏 तो इसे साझा करें, समर्थन करें और हमारे मिशन का हिस्सा बनें। आपका सहयोग ही हमारी ताक़त है — तन, मन और धन से। 📢 "एक क्लिक से बदलें सोच, एक शेयर से फैलाएं सच!"

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button