मातृकुंडिया बांध: बनास नदी पर बना राजस्थान का विशिष्ट बांध

मातृकुंडिया तीर्थ के निकट स्थित मातृकुंडिया बांध न केवल जल प्रबंधन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसकी वास्तुशिल्पीय विशेषताएं भी इसे राजस्थान के अन्य बांधों से अलग बनाती हैं।
🏗️ राजस्थान का सबसे अधिक गेट वाला बांध
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इस बांध में कुल 52 गेट हैं, जो राजस्थान के किसी भी अन्य बांध की तुलना में सबसे अधिक हैं।
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यह आंकड़ा इसे तकनीकी रूप से एक अनूठा और सामर्थ्यवान बांध बनाता है, जो बड़े जल प्रबंधन की क्षमता रखता है।
🌊 भराव क्षमता और नियंत्रण
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मातृकुंडिया बांध की कुल भराव क्षमता 27.5 फीट है।
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लेकिन सुरक्षा और स्थिरता की दृष्टि से इसे अधिकतम 22.5 फीट तक ही भरा जाता है, ताकि संभावित आपदाओं से बचाव किया जा सके।
⏳ निर्माण और इतिहास
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इस बांध का निर्माण कार्य वर्ष 1972 में प्रारंभ हुआ था।
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निर्माण प्रक्रिया लगभग एक दशक तक चली और अंततः वर्ष 1981 में यह बांध पूर्ण रूप से तैयार हो गया।

🚰 बनास नदी से जल आपूर्ति
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बांध में जल की प्रमुख आवक बनास नदी से होती है, जो इस क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाती है।
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यह बांध न केवल आसपास के गांवों की सिंचाई आवश्यकताओं को पूरा करता है, बल्कि वर्षा के मौसम में बाढ़ नियंत्रण और जल संग्रहण के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।














