सरकार ने जारी किया नोटिफिकेशन, सरपंचों-उपसरपंचों और वार्ड पंचों के पद बढ़े, घर के पास ही होगा पंचायत मुख्यालय

भीलवाड़ा जिले में 132 नई ग्राम पंचायतें बनी, 267 का पुनर्गठन
गुरला/ भीलवाड़ा/ जयपुर। राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी 41 जिलों में पंचायत पुनर्गठन और नई पंचायतें बनाने की अधिसूचना आज जारी कर दी। अब पंचायतीराज का नक्शा बदल गया है। भीलवाड़ा जिले में 14 पंचायत समिति की कुल 267 ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन कर 132 ग्राम पंचायतें नई बनाई गई है।
इनमें आसींद पंचायत समिति में 13, बदनौर में 1, हुरड़ा में 6, बनेड़ा में 4, बिजौलियां में 5, जहाजपुर में 21, करेड़ा में 14, कोटड़ी में 13, मांडल में 11, मांडलगढ़ में 8, रायपुर में 7, सहाड़ा में 2, शाहपुरा में 12 तथा सुवाणा पंचायत समिति में 15 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। पंचायत समितियों के पुनर्गठन की अधिसूचना अभी जारी नहीं हुई है। लगभग हर पंचायत की सीमाओं में बदलाव हुआ है। इसका स्थानीय राजनीति पर भी असर होगा। नई पंचायतें बनाने के बाद अब सरपंचों, उपसरपंचों और वार्ड पंचों के पद भी बढ़ जाएंगे। नए चुनाव इन्हीं पंचायतों के हिसाब से होंगे।
गौरतलब है कि भजनलाल सरकार ने साल भर पहले से पंचायतों के पुनर्गठन का काम शुरू किया था। नई पंचायत बनाने और पंचायतों के पुनर्गठन के लिए जिलों से प्रस्ताव मंगवाकर पंचायतीराज और ग्रामीण विकास विभाग को भेजे गए थे राजनीतिक तौर पर भी बीजेपी ने इसके लिए कमेटी बनाई थी।

कहां-कौनसी नई पंचायतें बनी
- आसींद पंचायत समितिः सुलवाड़ा, बामणी, रायरा, पांडरू, दूल्हेपुरा, जीवलिया, झालरा, बागमाली, राजपुरा, रूपपुरा, जोधड़ास, रामपुरिया, धोली जेतपुरा
- बदनौर पंचायत समितिः जयनगर
- हुरड़ा पंचायत समितिः भगवानपुरा, आपलियास, बारणी, बागा का खेड़ा, परड़ोदास, सनोदिया
- बनेड़ा पंचायत समितिः सुल्तानगढ़, रामपुरिया उर्फ पायरा, झांतल, लोटियास बिजौलियां पंचायत समितिः उंदरों का खेड़ा, रसदपुरा, केरखेड़ा, बणियों का तालाब, इंद्रपुरा
- जहाजपुर पंचायत समितिः धांधोला, रूणिया बरड़ा, गुढ़ा बिजेठा, लुहारी खुर्द, धुधेश्वर महादेव, हनुमान नगर, जालमपुरा, जीरा, टिठोड़ा माफी, बेरी, ढगारिया कंजर कॉलोनी, मानपुरा झींकरी, दधिमाता, सरसिया चारणान, काबरी, हंसेड़ा हरसलों का खेड़ा, खेरूणा, श्रृंगार चंवरी, फतेहपुर गढ़बोदिया, लाल का खेड़ा, नाथूण
- करेड़ा पंचायत समितिः धापड़ा, गाजुणा, चानसेन, सुलिया, दंतेड़ी, उदयरामजी का गुढ़ा, डोड खेड़ा, अलगवास, बढ्ढू, जालमपुरा, भैरूखेड़ा उर्फ तख्तपुरा, डेलास, गोपालपुरा, गोविंदपुरा
- कोटड़ी पंचायत समितिः धनवाड़ा, ढोकलिया, सोपुरा, बलियाखेड़ा, पपलाज, गोविंदपुरा, गंधेरी, अखेपुर, इटावा, दोवनी, उदलियास माफी, रेणवास, सोपुरा
- मांडल पंचायत समितिः कोलीखेड़ा, दांताकला, कोचरिया,करणीपुरा, भीलड़ी, छाजवों का खेड़ा, दांता लुहारिया, बेरां, चांदरास, कबराड़िया, गुढ़ा
- मांडलगढ़ पंचायत समितिः रानीखेड़ा, जगपुरा, गणेशपुरा, सांड, नीम का खेड़ा, देबीपुरा, चैनपुरिया, भारेंडा
- रायपुर पंचायत समितिः कलालखेड़ी, चारोट, गल्यावड़ी, पनोतिया, सुरास, बकाण, मासिंगपुरा सहाड़ा पंचायत समितिः मेघरास, गुढ़ा
- शाहपुरा पंचायत समितिः समेलिया, आरणी, चलानिया, सांखलिया, रूपपुरा, करमड़ास, बावड़ी, पनोतिया, खेड़ा होतम, रलायता, बड़ला तस्वारिया का, देवपुरी
- सुवाणा पंचायत समितिः धूमड़ास, जित्याखेड़ी, मंडपिया, फागणों का खेड़ा, कल्याणपुरा, बोरड़ा, एकलिंगपुरा, ओझाघर, कोटड़ी, मोमी, सोपुरा, आमली पुरावतान, नाथड़ियास, कान्याखेड़ी, खायड़ा।
नई पंचायत से ये होगा फायदा
1. रोजगार के नए अवसर नई पंचायतें बनने से ग्राम सचिव, पटवारी, पंचायत सहायकों के पद बढ़ेंगे।
जितनी नई पंचायतें बनी हैं, उतने ही ग्राम सचिव, ग्राम सहायक और सहायक कर्मचारी लगेंगे। इससे शिक्षित बेरोजगारों के लिए भी रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। आगे निकलनेभर्तियों में भी इन पंचायतों के हिसाब से नियुक्तियां करने के लिए पद बढ़ाए जाएंगे।
2 .पंचायत जाने के लिए कम दूरी तय करनी होगी
नई पंचायतें बनने से जनता को सुविधा होगी। लोगों को पंचायत मुख्यालय जाने के लिए कई किलोमीटर की दूरी तय करनी होती थी। लोगों को राशन लेने, सरकारी दस्तावेज बनवाने और सरपंच, ग्राम सचिव से जुड़े काम करवाने के लिए पंचायत मुख्यालय आना होता है। एक पंचायत में तीन से चार गांव होने के कारण मुख्यालय आने के लिए कई किलोमीटर का सफर तय करना होता था। इसमें समय ज्यादा लगता था। अब नई पंचायतें बनाने के कारण इलाका कम होने से लोगों को सुविधा होगी
3.विकास के नए आयाम स्थापित होंगे
ग्राम पंचायत का भीलवाड़ा ज़िले की निम्नलिखित पुनर्गठित/पुनर्सीमांकित/नवसृजित ग्राम पंचायतें उस नाम से जानी जायेंगी जो विकास, कनेक्टिविटी, शिक्षा, चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होने से लाभ मिलेगा












