अरावली संरक्षण के लिए सड़क पर उतरी कला: भावना फाउंडेशन का भव्य नुक्कड़ नाटक

कहानी कहने की कला जब समाज के ज्वलंत मुद्दों से जुड़ती है, तो वह केवल प्रस्तुति नहीं रहती, बल्कि जनचेतना का माध्यम बन जाती है। इसी सोच को साकार करते हुए भावना फाउंडेशन ने नए साल के पहले दिन अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर एक प्रभावशाली और ऐतिहासिक पहल की।
अरावली के अस्तित्व पर मंडराते खतरों और इसकी परिभाषा को लेकर चल रहे विवादों के प्रति आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से गोडवाड़ क्षेत्र में भव्य नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया।

कला के जरिए सूचना के अभाव पर सीधा प्रहार
समाज में अक्सर सूचना के अभाव (Information Asymmetry) का लाभ उठाकर प्राकृतिक संसाधनों का शोषण किया जाता है। इसी गंभीर सच्चाई को उजागर करने के लिए जयपुर से आए अनुभवी थिएटर कलाकारों ने प्रभावशाली नाट्य प्रस्तुति दी।
विशेषज्ञ कलाकारों की सशक्त प्रस्तुति
थिएटर कलाकार सोनू परिहार के नेतृत्व में मंचित नाटक के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया कि अरावली की परिभाषा में बदलाव केवल कागजी प्रक्रिया नहीं, बल्कि जल, जंगल और जमीन के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है।
सरल संवाद, जीवंत अभिनय और व्यावहारिक उदाहरणों के जरिए दर्शकों को बताया गया कि अरावली कमजोर होने का सीधा असर आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा।
भावना फाउंडेशन की कुशल रणनीति और जन-भागीदारी
इस पूरे जनजागरूकता अभियान का सफल संचालन भावना फाउंडेशन के अरावली समन्वयक यश मालवीय द्वारा किया गया। उनके मार्गदर्शन में गोडवाड़ क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर नुक्कड़ नाटक के शो आयोजित किए गए।
हर आयोजन स्थल पर उमड़ा जनसमर्थन
प्रत्येक स्थान पर 100 से 200 ग्रामीण, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे। लोगों ने नाटक को न केवल देखा, बल्कि अरावली संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर इस आंदोलन में अपनी सक्रिय भागीदारी भी दर्ज कराई।
नए साल पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश
नए साल के पहले दिन को यादगार बनाने के लिए भावना फाउंडेशन द्वारा एक अनूठी पहल भी की गई।
400 से अधिक पौधों का वितरण
नुक्कड़ नाटक देखने आए दर्शकों के बीच 400 से अधिक पौधों का वितरण किया गया। संस्था का उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना नहीं, बल्कि आमजन को पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी सौंपना भी था।
अरावली बचाने के लिए जनता तैयार: टीम भावना फाउंडेशन
कार्यक्रम के दौरान भावना फाउंडेशन की टीम ने कहा—
“जब कलाकार अपनी कला के माध्यम से ज्वलंत मुद्दों को उठाते हैं, तो आम आदमी उससे सीधे जुड़ता है। गोडवाड़ की जनता ने यह साबित कर दिया है कि वे अरावली और अपनी प्राकृतिक विरासत की रक्षा के लिए पूरी तरह सजग हैं।”
इस अवसर पर यश मालवीय, कार्तिक मालवीय, चिराग मालवीय, राजेश कुमार और अक्षय मारू उपस्थित रहे और आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।














