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पाली में साईं भरूच वारा के आशीर्वाद से चालीहा साहिब व्रत महोत्सव का श्रद्धापूर्वक समापन

रिपोर्ट – घेवरचन्द आर्य पाली

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Ghevarchand Aarya
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पाली | धार्मिक समाचार

भगवान श्री झूलेलाल के 26वें वंशज, 1008 सूर्यवंशी परम पूज्य ठकुर साईं मनीषलाल साहिब (साईं भरूच वारा) के दिव्य आशीर्वाद से पाली शहर में नाहिरी माह के पावन चालीहा साहिब व्रत महोत्सव का श्रद्धा, भक्ति और आस्था के साथ भव्य समापन हुआ।

इस अवसर पर श्री झूलेलाल ठकुर आसनलाल मंदिर में प्रातः 9 बजे पूज्य बहिराणा साहिब का आयोजन किया गया। मंदिर के सेवादार हेमंत तनवानी ने बताया कि 40 दिन तक कठिन तपस्या करने वाले व्रतधारी श्रद्धालुओं ने 40 अखा की आहुति अर्पित कर चालीहा साहिब व्रत का विधिवत समापन किया।

बहिराणा साहिब के पश्चात मंदिर से भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जो शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई लखोटिया तालाब पहुंची। वहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर ज्योत साहिब का जल में विसर्जन किया गया। शोभायात्रा के दौरान मार्ग में विभिन्न सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं द्वारा श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया, जिससे पूरे वातावरण में भक्ति और उल्लास का संचार हुआ।

समापन अवसर पर पूज्य भंडारा साहिब का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन को सफल बनाने में श्री झूलेलाल ठकुर आसनलाल मंदिर के सेवादारों एवं पाली के सिंधी समाज ने तन-मन-धन से सेवा समर्पण किया।

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भरूच – सिंधी समाज का प्रमुख तीर्थ स्थल

हिन्दुस्तान में सिंधी समाज का प्रमुख एवं प्राचीन तीर्थ स्थल गुजरात के भरूच में स्थित श्री झूलेलाल (वरुणदेव) मंदिर माना जाता है। यहां उडेरोलाल मंदिर, सिंध से लाई गई पूज्य अखंड ज्योत साहिब स्थापित है।

यह मंदिर वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स एवं इंडियन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से सम्मानित है, जहां जल (वरुण) और ज्योत (अग्नि) की संयुक्त पूजा होती है। ऋषि-मुनियों की तपोभूमि मां नर्मदा के तट पर अवस्थित इस तीर्थ में भगवान झूलेलाल के 26वें वंशज परम पूज्य ठकुर साईं मनीषलाल साहिब का आध्यात्मिक सान्निध्य प्राप्त होता है।

जनश्रुति एवं साईं भरूच वारा के पावन वचनों के अनुसार, गंगा स्नान से तन-मन पवित्र होता है, जबकि भरूच में मां नर्मदा और श्री झूलेलाल मंदिर के दर्शन मात्र से तन-मन का पूर्ण शुद्धिकरण हो जाता है।

न्यूज़ डेस्क

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