News

भायंदर में आचार्य श्री विजय शांति सुरीश्वरजी महाराज साहेब का वसंत पंचमी महोत्सव, 121वां दीक्षा दिवस व 136वां जन्म दिवस श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न

विक्रम बी राठौड़
रिपोर्टर

विक्रम बी राठौड़, रिपोर्टर - बाली / मुंबई 

emailcallwebsite

भायंदर में शांति गुरुदेव का वसंत पंचमी महोत्सव हर्षोल्लास के साथ संपन्न

विजय शांति सुरीश्वरजी महाराज साहेब का 121वां दीक्षा दिवस एवं 136वां जन्म दिवस श्रद्धापूर्वक मनाया गया

भायंदर पश्चिम स्थित ईदरा कॉम्प्लेक्स, 60 फुट रोड पर शुक्रवार 23 जनवरी 2026 को विश्व की महानतम विभूति, युग प्रधान आचार्य सम्राट
श्री श्री श्री 1008 श्री विजय शांति सुरीश्वरजी महाराज साहेब का वसंत पंचमी महोत्सव अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
यह आयोजन श्री शांति योगी जैन ट्रस्ट, भायंदर पश्चिम के तत्वावधान में सम्पन्न हुआ। सुबह से ही दर्शन एवं पूजा के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

प्रातःकालीन धार्मिक कार्यक्रम

सुबह 7:15 बजे गुरुदेव की पक्षाल पूजा, फूल पूजा एवं वासक्षेप पूजा श्रद्धापूर्वक सम्पन्न हुई।

  • पक्षाल पूजा के लाभार्थी: सुभाषभाई पोरवाल
  • प्रातः आरती: निशान भाई (बीकानेर)
  • मंगल दीपक: रितुबेन एवं नरेंद्रजी पुनमिया
  • बुंदी भाता वितरण श्रद्धालुओं में किया गया

दिन के प्रमुख कार्यक्रम

सुबह 10:15 बजे अष्टप्रकारी पूजा भणाई गई।
दोपहर 2:07 बजे शांति जाप का आयोजन हुआ।
दोपहर 2:30 बजे ऊँ शांति महिला मंडल द्वारा सामूहिक सामायिक करवाई गई।

WhatsApp Image 2026 01 23 at 2.36.44 PM WhatsApp Image 2026 01 23 at 2.36.44 PM 1

सायंकालीन विराट गुरुभक्ति

शाम 8:00 बजे विराट गुरुभक्ति का आयोजन किया गया, जिसमें आरती एवं मंगल दीपक उतारे गए।
वक्ताओं ने कहा कि गुरुदेव ने अजैन होते हुए भी विश्व में जैन धर्म का डंका बजाया और समाज को नई दिशा प्रदान की।

गुरुदेव का संक्षिप्त जीवन परिचय

गुरुदेव का जन्म 25 जनवरी 1890 को वसंत पंचमी के शुभ अवसर पर मणादर (सिरोही) में हुआ।
पिता का नाम भीम तोला एवं माता का नाम वसुदेवी था। जाति अहीर एवं बचपन का नाम सगतोजी था।

गुरुदेव ने 9 फरवरी 1905 को रामसीन (जालोर) में विजय मां साहेब से दीक्षा ग्रहण की।
दादा गुरुदेव धर्म विजय महाराज साहेब रहे। 20 नवंबर 1933 को आचार्य पदवी प्राप्त हुई।
23 सितंबर 1943 को अचलगढ़ (माउंट आबू) में निर्वाण हुआ।

गुरुदेव का अग्नि संस्कार 27 सितंबर 1943 को सम्पन्न हुआ तथा समाधि मंदिर की प्रतिष्ठा
माणडोली नगर में वसंत पंचमी के दिन की गई।

जानकारी स्रोत: पारसमल जैन (सांडेराव), राकेश शाह, नितिन जैन, प्रकाश जैन

विक्रम बी राठोड़ | मुंबई बाली

न्यूज़ डेस्क

🌟 "सच्ची ख़बरें, आपके अपने अंदाज़ में!" 🌟 "Luniya Times News" पर हर शब्द आपके समाज, आपकी संस्कृति और आपके सपनों से जुड़ा है। हम लाते हैं आपके लिए निष्पक्ष, निर्भीक और जनहित में बनी खबरें। यदि आपको हमारा प्रयास अच्छा लगे — 🙏 तो इसे साझा करें, समर्थन करें और हमारे मिशन का हिस्सा बनें। आपका सहयोग ही हमारी ताक़त है — तन, मन और धन से। 📢 "एक क्लिक से बदलें सोच, एक शेयर से फैलाएं सच!"

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button