सरस्वती विद्या मंदिर सादड़ी में कक्षा 10वीं एवं 12वीं के विद्यार्थियों का विदाई समारोह आयोजित

जिला सचिव सुरेश जी मालवीय का प्रवास, दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को मिला सम्मान व प्रेरणा
शैक्षणिक वातावरण में संस्कार, सम्मान और प्रेरणा का संगम
सादड़ी। आज विद्यालय परिसर में उस समय विशेष गरिमा और उत्साह का वातावरण देखने को मिला,जब जिला सचिव सुरेश जी मालवीय का प्रवास रहा। साथ ही स्थानीय समिति के व्यवस्थापक नारायण जी द्वारा आभार व्यक्त किया गया। इस अवसर पर दिनेश जी त्रिवेदी जिला समिति के सदस्य और विद्यालय के संरक्षक का भी आशीर्वाद मिला। उनके आगमन से शैक्षणिक गतिविधियों को नई ऊर्जा और प्रेरणा प्राप्त हुई।
विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री मनोहर लाल सोलंकी ने अतिथियों का परिचय करवाया। कक्षा 10वीं के कक्षाचार्य श्री प्रवीण कुमार राठौर द्वारा वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर अतिथियों ने पुष्पहार एवं स्मृति-चिह्न प्रदान कर कक्षा 10वीं व 12वीं के भैया-बहनों का सम्मान किया।
कक्षा 10वीं एवं 12वीं का दीक्षांत समारोह आयोजित
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दोपहर के समय कक्षा 10वीं एवं 12वीं के विद्यार्थियों का दीक्षांत समारोह अत्यंत गरिमामय एवं अनुशासित वातावरण में आयोजित किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों का विधिवत दीक्षांत संस्कार संपन्न हुआ, जिसने समारोह को भावनात्मक और स्मरणीय बना दिया।
विद्यार्थियों का भावपूर्ण उद्बोधन
दीक्षांत संस्कार के पश्चात कक्षा 10वीं एवं 12वीं के भैया-बहनों ने मंच से अपना उद्बोधन प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों ने अपने शैक्षणिक अनुभव, शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता और भविष्य के लक्ष्यों को शब्दों में व्यक्त किया, जिसे उपस्थितजनों ने सराहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती, ओम् एवं भारत माता के समक्ष जिला सचिव श्री सुरेश कुमार मालवीय, विद्यालय व्यवस्थापक श्री नारायण लाल लोहार तथा जिला प्रतिनिधि श्री दिनेश त्रिवेदी द्वारा दीप प्रज्वलन एवं वंदना के साथ किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता जिला सचिव श्री सुरेश कुमार मालवीय ने भारतीय शिक्षा पद्धति पर प्रकाश डालते हुए गुरुकुल शिक्षा प्रणाली, प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय तथा गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा पूर्ण होने के बाद विद्यार्थियों के जीवन में एक नया मोड़ आता है, ऐसे में सही दिशा का चयन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि सही दिशा जीवन की दशा को भी श्रेष्ठ बनाती है।

माल्यार्पण कर किया गया सम्मान
समारोह के दौरान सभी विद्यार्थियों का माल्यार्पण कर सम्मान किया गया। साथ ही उन्हें स्मृति-चिह्न एवं उपहार भेंट किए गए, जिससे विद्यार्थियों के चेहरे पर आत्मविश्वास और प्रसन्नता झलकती दिखाई दी।
प्रेरक संबोधन से विद्यार्थियों में जागा उत्साह
इस अवसर पर जिला सचिव सुरेश जी मालवीय ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा के साथ-साथ संस्कार, अनुशासन और निरंतर परिश्रम ही जीवन में सफलता की कुंजी हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने और समाज व राष्ट्र के लिए सकारात्मक योगदान देने का संदेश दिया।
वहीं विद्यालय के प्रधानाचार्य मनोहर लाल जी सोलंकी ने भी विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि दीक्षांत केवल एक पड़ाव है, असली परीक्षा जीवन में आगे आने वाली जिम्मेदारियों को निभाने की होती है।
कक्षा 12वीं की कक्षाचार्या श्रीमती अरुणा जी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की एवं जीवन में अनुशासन, संस्कार और लक्ष्य निर्धारण पर बल दिया।
समारोह में कनिष्ठ कक्षाओं के विद्यार्थियों द्वारा स्वागत गीत, सांस्कृतिक नृत्य एवं प्रेरणादायी प्रस्तुतियाँ दी गईं। कक्षा 10वीं एवं 12वीं के विद्यार्थियों ने अपने विद्यार्थी जीवन के अनुभव साझा करते हुए विद्यालय एवं गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की, जिससे कार्यक्रम का वातावरण भावनात्मक हो गया।
अंत में प्रधानाचार्य श्री मनोहर लाल सोलंकी ने आशीर्वचन और विद्यालय व्यवस्थापक श्री नारायण लाल लोहार ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ देते हुए अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का समापन शांति मंत्र के साथ हुआ। समारोह में विद्यालय के समस्त आचार्य-बंधु एवं भगिनियाँ उपस्थित रहीं।
कुल मिलाकर यह दीक्षांत समारोह सम्मान, प्रेरणा और संस्कारों से परिपूर्ण रहा, जो विद्यार्थियों के जीवन में एक अविस्मरणीय स्मृति के रूप में सदैव अंकित रहेगा।











