45 वर्ष बाद सुरेंद्रनगर में गुरुकृपा का विराट प्रवाह, महामांगलिक में उमड़ा अभूतपूर्व जनसमूह



45 वर्ष बाद सुरेंद्रनगर में गुरुकृपा का विराट प्रवाह
महामांगलिक में उमड़ा अभूतपूर्व जनसमूह
जहाँ के कण-कण को प्रभु महावीर ने अपने चरणों से पवित्र किया, ऐसी गुजरात राज्य की धर्मनगरी सुरेंद्रनगर ने एक बार फिर आध्यात्मिक इतिहास रच दिया। आधि-व्याधि-उपाधि निवारक महाप्रभावशाली महामांगलिक के आयोजन में हजारों भाविकगण एकत्रित हुए और पूरा नगर भक्ति व श्रद्धा के महासागर में डूब गया।
45 वर्ष बाद हुआ मंगलमय पदार्पण
45 वर्ष के अंतराल के पश्चात गुरुनवरत्न कृपा प्राप्त, युवा हृदय सम्राट, जिनशासन हितचिंतक परम पूज्य आचार्य देव श्री विश्वरत्नसागर सुरीश्वर जी म.सा. का सुरेंद्रनगर में मंगलमय पदार्पण हुआ।
गुरुदेव के आगमन के साथ ही नगर में ऐसा वातावरण बना मानो चातुर्मास का पावन काल चल रहा हो। नगर के मार्गों से लेकर आयोजन स्थल तक श्रद्धा की अनूठी छटा दिखाई दी।
प्रवचनों ने झकझोरा जनमानस
दो समय के प्रवचनों में गुरुदेव के मुखारविंद से निकली वाणी ने जन-जन को गहराई से प्रभावित किया। वैराग्य, संयम और आत्मजागरण के संदेशों ने श्रोताओं को आंतरिक रूप से झकझोर दिया।
हजारों श्रद्धालुओं ने लिया लाभ
महामांगलिक के पावन क्षणों में हजारों की जनमैदानी ने लाभ लिया और गुरुभक्ति की ऐसी रमझट जमी कि पूरा सुरेंद्रनगर भक्ति भाव से झूम उठा।
यह ऐतिहासिक आयोजन सुरेंद्रनगर की आध्यात्मिक चेतना को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला सिद्ध हुआ।














