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मायरा प्रेम, समर्पण और रिश्तों की पवित्रता का प्रतीक — आचार्य रामदयाल महाराज

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मायरा प्रेम, समर्पण और रिश्तों की पवित्रता का प्रतीक — आचार्य रामदयाल महाराज

लुनिया टाइम्स न्यूज़ | बनेड़ा | परमेश्वर दमामी

परमेश्वर कुमार दमामी
रिपोर्टर

परमेश्वर कुमार दमामी, संवाददाता - बनेड़ा

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   बनेड़ा। उपखंड क्षेत्र के ग्राम पंचायत राक्षी में समस्त ग्रामवासियों के सहयोग से नवनिर्मित रामद्वारा का उद्घाटन गुरुवार को     अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय शाहपुरा पीठाधीश्वर जगद्गुरु आचार्य श्री 1008 श्री रामदयाल जी महाराज के कर कमलों द्वारा संपन्न   हुआ।

  इस अवसर पर सरपंच मंजु गोपाल गुर्जर के नेतृत्व में तीन दिवसीय नानी बाई का मायरा एवं रामकथा का आयोजन 19 फरवरी से     21 फरवरी तक किया जा रहा है। कार्यक्रम के दूसरे दिन आचार्य श्री रामदयाल जी महाराज का भव्य प्रवचन आयोजित हुआ।

अमृतमय संदेश से गूंजा पांडाल

विशाल श्रद्धालु जनसमुदाय को संबोधित करते हुए पूज्य आचार्य रामदयाल जी महाराज ने भक्ति, सेवा और मर्यादा का प्रेरक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि “मायरा केवल एक सामाजिक परंपरा नहीं, बल्कि प्रेम, समर्पण और रिश्तों की पवित्रता का प्रतीक है।”

महाराज श्री ने बताया कि जैसे नानी बाई की कथा में भगवान ने भक्त की लाज रखी, वैसे ही सच्ची श्रद्धा रखने वाले की प्रभु सदैव रक्षा   करते हैं।

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जीवन के लिए दिए ये संदेश

  • जीवन में राम नाम को आधार बनाएं
  • परिवार में प्रेम, सम्मान और संस्कार बनाए रखें
  • सेवा, त्याग और विनम्रता को जीवन का आभूषण बनाएं

उन्होंने कहा कि भक्ति केवल मंदिरों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि हमारे आचरण, व्यवहार और परोपकार में भी झलकनी   चाहिए। उनकी ओजस्वी वाणी और मधुर भजनों से पूरा पंडाल भक्तिरस में सराबोर हो उठा और “राम नाम” के जयघोष से वातावरण   गूंज उठा।

नानी बाई रो मायरो की महिमा

कार्यक्रम की शुरुआत में संत रामनारायण जी महाराज (देवास) ने बताया कि नानी बाई रो मायरो राजस्थान की लोकभक्ति परंपरा का अत्यंत भावपूर्ण प्रसंग है, जो भक्त और भगवान के अटूट विश्वास का प्रतीक माना जाता है।

कथा में वर्णन है कि मायरे के समय परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। श्रद्धा और विश्वास के साथ प्रभु को स्मरण किया गया, तब   स्वयं भगवान सेठ का रूप धारण कर भव्य मायरा भर गए और भक्त की लाज रखी।

✨ आध्यात्मिक संदेश

  • अटूट विश्वास रखने वाले की प्रभु रक्षा करते हैं
  • सच्ची भक्ति में दिखावा नहीं, समर्पण होता है
  • संकट में धैर्य और श्रद्धा सबसे बड़ा सहारा है
  • मायरा रिश्तों और प्रेम का उत्सव है

इस दौरान संत सम्ताराम जी महाराज (सूरत), संत अंकुशराम जी महाराज (शिवों) एवं संत मनोरत राम जी महाराज (आलोट) सहित   सैकड़ों ग्रामीणजन पंडाल में उपस्थित रहे और संगीतमय वातावरण में नानी बाई रो मायरो का श्रवण कर भक्तिरस का आनंद लिया।

न्यूज़ डेस्क

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