लछुरायडीह में हनुमत महायज्ञ बना हिन्दू–मुस्लिम एकता की मिसाल, पूरे गांव में उमड़ा भावनाओं का सैलाब

लूनिया टाइम्स न्यूज | दीपक पाण्डेय, टुण्डी
टुण्डी प्रखंड क्षेत्र के लछुरायडीह गांव में आयोजित पांच दिवसीय हनुमत महायज्ञ ने न सिर्फ धार्मिक आस्था को मजबूती दी, बल्कि हिन्दू–मुस्लिम एकता की एक अनूठी मिसाल भी पेश की। यह गांव पहले से ही आपसी भाईचारे और सौहार्द के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन इस महायज्ञ के दौरान जो दृश्य देखने को मिला, उसने पूरे क्षेत्र का दिल जीत लिया।
यज्ञ के आयोजन में हिन्दू समुदाय के साथ-साथ मुस्लिम समाज के प्रतिष्ठित लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। जैसे ही आयोजन समिति ने मुस्लिम समाज से सहयोग की अपील की, वैसे ही सभी वरिष्ठ नागरिकों ने बिना किसी विलंब के तन, मन और धन से सहयोग देने की सहमति दे दी। उन्होंने यज्ञ के शुभारंभ से लेकर समापन तक की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई, जिससे आयोजन में चार चांद लग गए।
इस अवसर पर यज्ञ समिति द्वारा सर्वोच्च मानवाधिकार संरक्षण के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद जाहिद हुसैन को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। वहीं, लछुरायडीह ग्राम पंचायत के भावी मुखिया अब्दुल क्यूम अंसारी को भी अंगवस्त्र पहनाकर सम्मानित किया गया।
मोहम्मद जाहिद हुसैन ने घोषणा करते हुए बताया कि 25 मार्च 2026 को यज्ञ के समापन अवसर पर उनके निजी सहयोग से भव्य भंडारे का आयोजन किया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि प्रतिदिन हवन कुंड में उपयोग होने वाली सामग्री की व्यवस्था भी उनके सानिध्य में की जाएगी।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि यज्ञ एक पुण्य कार्य है, जिसके हवन से निकलने वाला धुआं पूरे वातावरण को पवित्र करता है और कथा श्रवण से आध्यात्मिक शांति एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है। उन्होंने इस तरह की एकता और भाईचारे की पहल के लिए गांव के युवाओं की सराहना की और इसे समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।
कार्यक्रम में मोहम्मद नईम अंसारी, मोहम्मद फ़ैज़, मोहम्मद अहमद, मोहम्मद मुर्तजा, मोहम्मद कलीम, अर्जुन महतो, कार्तिक महतो, डोमन महतो, सुरेश महतो, कृष्णा महतो, रूपलाल महतो, विवेक तुरी, हीरू दास, मोहम्मद मुकशद, मोहम्मद सनाउल, मोहम्मद रिंकू, मोहम्मद शाहिद, मोहम्मद मोबिन और मोहम्मद मुस्लिम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं यज्ञ समिति के सदस्य उपस्थित रहे।
इस आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जब समाज एकजुट होता है, तो धर्म और जाति की सीमाएं पीछे छूट जाती हैं और इंसानियत सबसे ऊपर आ जाती है।













