भयंकर दोहरा झटका: अमेरिका ने TRF को आतंकी संगठन घोषित किया, ट्रंप ने इस्लामाबाद दौरा रद्द किया
Meet Khushal Luniya – A Young Tech Enthusiast, AI Operations Expert, Graphic Designer, and Desk Editor at Luniya Times News. Known for his Brilliance and Creativity, Khushal Luniya has already mastered HTML and CSS. His deep passion for Coding, Artificial Intelligence, and Design is driving him to create impactful digital experiences. With a unique blend of technical skill and artistic vision, Khushal Luniya is truly a rising star in the tech and Media World.
19 साल बाद बुरी खबर: ट्रंप ने खारिज किया इस्लामाबाद दौरे की अफवाह
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकवादी हमले में 26 पर्यटकों की हत्या ने भारत–पाकिस्तान संबंधों में भारी तनाव पैदा किया था. ऐसी स्थिति में ही जुलाई 2025 की शुरुआत में पाकिस्तान को दो गंभीर झटके लगे। एक तरफ अमेरिका ने इस हमले की जिम्मेदारी लेकर सक्रिय हुए TRF (The Resistance Front) को विदेशी आतंकी संगठन घोषित कर दिया, तो दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह साफ कर दिया कि उनका इस्लामाबाद दौरा फिलहाल तय नहीं है. इन दो खबरों को मिलाकर देखा जाए तो पाकिस्तान के कूटनीतिक और सामरिक समीकरण बुरी तरह हिल गए हैं।
पहला झटका: पहलगाम हमला और टीआरएफ आतंकी घोषित
-
पहलागाम हमला – 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हथियारबंद आतंकियों ने पर्यटकों पर गोलियां चलाईं, जिससे 26 लोग मारे गए. इसमें अधिकांश शिकार भारतीय पर्यटक थे। इस पर तत्काल भारत की ओर से पाकिस्तानी आतंकवादियों को कटघरे में खड़ा करने की कार्रवाई तेज हुई। अमेरिका सहित कई देशों ने हमले की कड़ी निंदा की थी।
-
टीआरएफ का उद्भव – द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) एक अपेक्षाकृत नया संगठन है, जो 2019 में कश्मीर की अस्थिर स्थिति में बना था. अल-जज़ीरा के अनुसार यह समूह “लिटिल-नोन आर्म्ड ग्रुप” था, जिसे कश्मीर के भीतर ‘वर्चुअल फ्रंट’ के रूप में शुरु किया गया. हालांकि जिस दिन पहलगाम हमला हुआ, टीआरएफ ने उस पर तत्काल जिम्मेदारी ली. भारत की खुफिया एजेंसियों का मानना है कि टीआरएफ असल में पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का ही मुखौटा संगठन है. ट्रेन्ड नाम रखते हुए टीआरएफ ने कथित ‘मौलिक रूप से जायज़’ कश्मीर संघर्ष वाली छवि पेश की, लेकिन वास्तविकता में इसे लश्कर का ही दामन माना जाता है
-
अमेरिकी घोषणा – 18 जुलाई 2025 को अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने घोषणा की कि अमेरिकी विदेश विभाग ने टीआरएफ को ‘विदेशी आतंकी संगठन (FTO)’ एवं ‘स्पेशियली डिज़िग्नेटेड ग्लोबल टेररिस्ट (SDGT)’ के रूप में सूचीबद्ध किया है. बयान में बताया गया कि टीआरएफ ने 22 अप्रैल के पहलगाम हमले की जिम्मेदारी ली थी जिसमें 26 नागरिक मारे गए थे. रुबियो ने कहा कि ट्रंप प्रशासन आतंकवाद के खिलाफ अपने राष्ट्रीय सुरक्षा हितों की रक्षा और पहलगाम हमले के दोषियों के न्याय के प्रति प्रतिबद्धता दिखा रहा है. इस कदम से टीआरएफ की सभी अमेरिकी संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन पर रोक लगेगी तथा भारत और अमेरिका समेत अन्य वैश्विक साझेदारों की आतंकवाद निरोधी कोशिशों को मजबूती मिलेगी
-
भारत एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया – भारत सरकार ने अमेरिकी फैसले को ‘कूटनीतिक सफलता’ बताया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि यह भारत-अमेरिका आतंकवाद विरोधी सहयोग की मजबूत पुष्टि है. भारतीय मीडिया और सरकार ने भी इसे पाकिस्तान-पक्षपात को विश्वस्तर पर बौना बनाए रखने की दिशा में बड़ा कदम माना है। दूसरी ओर पाकिस्तान की विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह आतंकवाद की निंदा करता है, लेकिन लश्कर-ए-तैयबा से टीआरएफ का कोई संबंध मानने को तैयार नहीं है. अमेरिकी विदेश विभाग ने साफ किया कि लश्कर-ए-तैयबा पाकिस्तान में ही मुख्यालय रखने वाला प्रतिबंधित संगठन है, इसलिए टीआरएफ को उनके मुख्य संगठन का फ्रंट बताया गया है
-
दुष्प्रभाव – विशेषज्ञों के अनुसार, इस घोषणा से भारत-अमेरिका संबंधों को ठोस समर्थन मिला है। वाशिंगटन स्थित दक्षिण एशिया विशेषज्ञ माइकल क्यूगलमैन ने बताया कि टीआरएफ को आतंकी घोषित करना “यूएस-भारत रिश्तों के लिए बड़ा सहारा साबित हो सकता है”. हालांकि इस कदम के बावजूद अमेरिका ने सीधे तौर पर पाकिस्तान को जिम्मेदार नहीं ठहराया। फिर भी, टीआरएफ का नामोनिशान अमेरिका की ग्लोबल आतंकवाद नीतियों में शामिल होने से पाकिस्तान पर कड़ा दबाव बढ़ गया है। इस प्रकार पहला झटका पाकिस्तानी आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाकर लगा।

दूसरा झटका: ट्रंप की पाकिस्तान यात्रा की अफवाह उड़ी और खारिज हुई
-
मीडिया रिपोर्ट और अफवाह – जुलाई 2025 में पाकिस्तानी समाचार चैनलों ने दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सितंबर 2025 में इस्लामाबाद का दौरा कर सकते हैं. इनमें Geo News और ARY जैसे प्रमुख चैनल शामिल थे. इस बात का आधार पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर का हालिया अमेरिकी दौरा और चर्चित मुलाकात थी. पाकिस्तानी मीडिया ने इस खबर को व्यापक स्तर पर फैलाया, यह बताते हुए कि 18 सितंबर को ट्रंप पाकिस्तान आएंगे और इसके बाद भारत भी जाएंगे. यदि ऐसा होता, तो यह 2006 के बाद पहली बार होता कि कोई अमेरिकी राष्ट्रपति पाकिस्तान दौरा कर रहा है.
-
व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया – तथ्यों की पड़ताल के बाद अमेरिका ने इन रिपोर्टों का खंडन किया. व्हाइट हाउस ने स्पष्ट कर दिया, “इस समय तक पाकिस्तान की यात्रा निर्धारित नहीं हुई है”. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ट्रंप की पाकिस्तान यात्रा की कोई योजना फिलहाल शेड्यूल में नहीं है. अमेरिका की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने भी बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप 25-29 जुलाई को स्कॉटलैंड और फिर सितंबर में यूनाइटेड किंगडम का दौरा करेंगे, जबकि पाकिस्तान की यात्रा इस सूची में नहीं है. इनमें से सितंबर 17-19 को यूके में विंडसर कैसल में शाही दौरा तय है. यह पुष्टि करते हुए व्हाइट हाउस ने साफ किया कि जो ख़बरें पाक मीडिया फैला रही थी, वे गलत निकलीं.
-
पाकिस्तान की पलटी – व्हाइट हाउस के खंडन के बाद पाकिस्तानी टी.वी. चैनलों ने अपनी खबरें वापस ले लीं. Geo News ने माफी मांगी कि उसने बिना सत्यापित सूचना के ये रिपोर्ट चलाईं। ARY ने भी अपनी कथन वापस ली जब पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने कहा कि उन्हें ऐसी किसी यात्रा की जानकारी नहीं है. पाकिस्तान के विदेश कार्यालय प्रवक्ता शफकत अली खान ने कहा, “हमारे पास इस मामले की कोई सूचना नहीं है।”. इन घटनाक्रम से पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर झटका लगा क्योंकि उसने अपने शीर्ष नेता के इनवॉल्वमेंट को हवा-हवाई बताया.
-
ऐतिहासिक संदर्भ और महत्व – पिछले 19 साल से कोई अमेरिकी राष्ट्रपति पाकिस्तान नहीं गया है. जॉर्ज डब्ल्यू. बुश आखिरी बार 2006 में पाकिस्तान गए थे. इसलिए यह अफवाह सच हो जाती कि अमेरिका और पाकिस्तान के बीच रिश्तों में किसी न किसी स्तर पर संबंध बनने का दौर है. लेकिन व्हाइट हाउस ने इन उम्मीदों को ठंडा पानी दे दिया. इससे पाक मीडिया की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठे हैं और यह साबित हुआ कि दबाव में दबा अमेरिकी कथन भी सामने आ सकता है.
पाकिस्तान के लिए द्विपक्षीय प्रभाव और कुल हालात
-
पाकिस्तान की कूटनीतिक छवि – इन दोनों घटनाओं से पाकिस्तान की अंतर्राष्ट्रीय छवि पर असर पड़ा है. एक ओर अमेरिकी घोषणा ने यह संदेश दिया कि वैश्विक स्तर पर भी पाकिस्तान की आतंकवादी गतिविधियों का सहारा लेने वाली ताकतों को एकीकृत नजरिए से देखा जा रहा है.दूसरी ओर ट्रंप की पाकिस्तान यात्रा की अफवाह की गलत साबित होना इस बात का संकेत है कि पाकिस्तान अपनी मीडिया और कूटनीति से आत्मनिर्भर निर्णायक समर्थन प्राप्त नहीं कर पा रहा है. विशेषज्ञ मानते हैं कि ये दोनों खबरें पाकिस्तान को ‘दोहरा झटका’ दे रही हैं – एक तो आतंकी संगठन घोषित होने से नीति की विफलता का, और दूसरा कलंकित मीडिया प्रचार का.
-
भारत-अमेरिका सहयोग – दूसरी ओर, भारत को इन घटनाक्रमों से राजनीतिक लाभ मिल रहा है. अमेरिका के कदम से भारत को आतंकवाद विरोधी लड़ाई में अंतरराष्ट्रीय साझेदारी मिली है. जैसा कि टाइम्स ऑफ इंडिया ने उल्लेख किया, यह भारत के लिए भी एक बड़ी कूटनीतिक जीत है. अमेरिका ने इस समस्या में भारत के दृष्टिकोण का समर्थन किया है, जैसा जयशंकर ने कहा, “आतंकवाद के खिलाफ पूरी तरह सचेत” रहना दोनों देशों का साझा सिद्धांत है. इससे भारत-अमेरिका संबंध और भी मजबूत होंगे, जो दक्षिण एशिया में सुरक्षा समीकरण पर असर डाल सकता है.
-
संघर्ष में संतुलन – पहलगाम हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर था. 7 मई 2025 को भारत ने नियंत्रण रेखा पार आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की थी, जिसके बाद दोनों देशों के बीच सीमा पर युद्ध की स्थिति बनी थी। उसके बाद तत्कालीन अमेरिकी मध्यस्थता से 10 मई को युद्धविराम हुआ था. अब दूसरी ओर अमेरिका का यह कदम, साथ ही ट्रंप का साफ इनकार, पाकिस्तान के लिए एक और नकारात्मक संकेत है. इससे यह दिखता है कि अमेरिका स्थिति स्थिर करने के लिए भारत के साथ खड़ा है और पाकिस्तान की गुमराह करने वाली रणनीतियों की खुली पोल हो रही है
-
मौजूदा अंतरराष्ट्रीय माहौल – भारत समेत कई वैश्विक नेता इस हमले के बाद भारत के साथ एकजुटता जता चुके हैं. उदाहरण के लिए, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने हमले के तुरंत बाद प्रधानमंत्री मोदी को फोन कर संवेदना व्यक्त की थी. इसी प्रकार अब टीआरएफ की वैश्विक आतंकी सूची में शामिल होने से अमेरिका विश्व भर के आतंकवाद विरोधी प्रयासों को गति देने का इरादा दिखा रहा है. इसके विपरीत पाकिस्तान ने पुलित संकेत दिए कि वह आतंकवाद की निंदा करता है, लेकिन कहीं ऐसा न लगे कि वह लश्कर-ए-तैयबा जैसे समूहों से बच निकलना चाहता है.
इन सब घटनाक्रमों का नतीजा यह है कि पाकिस्तान को एक साथ दो बड़े झटके लगे: एक, उसके समर्थित आतंकी समूह को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकी करार देकर; और दूसरा, अमेरिका के सबसे ऊँचे स्तर से यह बताकर कि वह पाकिस्तान में इस समय यात्रा नहीं करेगा. दोनों की कड़ी पाकिस्तान के लिए अपमानजनक है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इन विकासों से क्षेत्रीय तनाव में स्थिरता आएगी, लेकिन पाकिस्तान के चरित्र पर प्रश्न बने रहेंगे और उसका अन्तर्राष्ट्रीय दबाव बढ़ेगा. अंततः, पाकिस्तान को इस दुविधा का सामना करना होगा कि वह इन घटनाओं का जवाब कैसे देता है, जबकि दुनिया आतंकवाद के खिलाफ भारत के समर्थन में खड़ी है
Join Our WhatsApp Group for Latest Updates
डोनेट करें
आपके सहयोग से हमें समाज के लिए और बेहतर काम करने की प्रेरणा मिलती है।









