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गूगल मैप की गलती ने ली मासूम की जान: बनास नदी में बही वैन, 3 की मौत, 1 बच्ची लापता, 5 ने बचाई जान

Satyanarayan Sen
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चित्तौड़गढ़।  राशमी थाना क्षेत्र के सोमी-उपरेड़ा पुलिया पर शनिवार रात एक दर्दनाक हादसा हुआ। गूगल मैप पर रास्ता सर्च करने के कारण एक परिवार की वैन क्षतिग्रस्त पुलिया पर जा पहुंची और तेज बहाव में बह गई। हादसे में एक 4 साल की बच्ची की मौत हो गई, जबकि 3 लोग अब भी लापता हैं। परिवार के 5 लोग वैन पर चढ़कर जैसे-तैसे बच गए


कैसे हुआ हादसा: गूगल मैप ने दिखाई मौत की राह

भीलवाड़ा के कानाखेड़ा गांव के रहने वाला यह परिवार शनिवार को सवाई भोज मंदिर के दर्शन करने गया था। देर रात लौटते समय परिवार रास्ता भटक गया। उन्होंने गूगल मैप पर लोकेशन डाली, जिसने उन्हें सोमी-उपरेड़ा पुलिया की ओर मोड़ दिया।

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समस्या यह थी कि यह पुलिया पिछले तीन साल से क्षतिग्रस्त और बंद पड़ी है। इस समय मातृकुंडिया डैम के गेट खोल दिए जाने के कारण बनास नदी उफान पर थी और पुलिया पर पानी बह रहा था

रात करीब 1 बजे जब परिवार वैन से पुलिया पार करने लगा, तो गाड़ी पानी में फंस गई। ड्राइवर ने वैन निकालने की कोशिश की, लेकिन पानी का दबाव इतना तेज था कि कुछ ही मिनटों में वैन पुलिया से नीचे बह गई।


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5 ने बचाई जान, 4 बह गए पानी में

जैसे ही वैन डूबने लगी, परिवार के 5 सदस्य वैन की छत पर चढ़कर अपनी जान बचाने में कामयाब रहे। उन्होंने फोन कर अपने रिश्तेदारों को सूचना दी। वहीं, दो महिलाएं और दो बच्चियां पानी के तेज बहाव में बह गईं

मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। रात में ही पुलिस और प्रशासन हरकत में आया। गांव के मछुआरे की नाव से ग्रामीणों ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।


NDRF-SDRF का रेस्क्यू ऑपरेशन, एक बच्ची की लाश बरामद

थाना अधिकारी देवेंद्र देवल ने बताया कि रेस्क्यू टीम ने नाव की मदद से मदनलाल (25), हितेश (16), लीला (18), काव्यांश (9 माह) और आयांश (9 माह) को बचा लिया।
हालांकि, 4 साल की बच्ची खुशी पुत्री मदन का शव बरामद किया गया है। वहीं दा (21) पत्नी हेमराज, ममता (25) पत्नी मदन और रूत्वी (6) पुत्री हेमराज की तलाश अभी भी जारी है।

रात के अंधेरे में ऑपरेशन मुश्किल था, इसलिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम सुबह से रेस्क्यू अभियान चला रही है


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3 साल से बंद पुलिया, फिर भी क्यों पहुंची गाड़ी?

ग्रामीणों के अनुसार, सोमी-उपरेड़ा पुलिया 3 साल पहले क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसके बावजूद गूगल मैप पर यह मार्ग सक्रिय था। हादसे के समय कोई चेतावनी बोर्ड या बैरिकेड भी नजर नहीं आया।
स्थानीय लोग प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं। “यदि पुलिया पर बैरिकेड होता तो यह हादसा नहीं होता,” ग्रामीणों ने कहा।


लापरवाही और टेक्नोलॉजी का खतरनाक मेल

यह हादसा केवल प्रशासन की लापरवाही नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी पर आंख मूंदकर भरोसा करने का भी नतीजा है। गूगल मैप पर भरोसा करते हुए परिवार ऐसे रास्ते पर पहुंच गया जो वर्षों से बंद था।
स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि गूगल को अपडेटेड डेटा देने के लिए प्रशासन और कंपनियों के बीच समन्वय होना चाहिए, ताकि इस तरह की घटनाएं रोकी जा सकें।


अब तक की स्थिति:

1 बच्ची की मौत (खुशी, 4 साल)
3 लोग लापता (दो महिलाएं, एक बच्ची)
5 लोग बचाए गए
NDRF और SDRF की टीमें रेस्क्यू में लगी हुई हैं

न्यूज़ डेस्क

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