आर्य वीर दल के चरित्र निर्माण एवं आत्मरक्षा शिविर में जिम्नास्टिक और मलंखब का दिया प्रशिक्षण

आर्य वीर दल पाली के चरित्र निर्माण एवं आत्मरक्षा शिविर में ज्यों दिन बढ़ रहे हैं बच्चों का उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ रहा है। चतुर्थ दिवस पर जिम्नास्ट प्रशिक्षक भंवर गौरी और योगेन्द्र देवड़ा द्वारा जिम्नास्टिक का प्रशिक्षण दिया गया। आर्य भरत कुमावत द्वारा रस्सी पर व्यायाम एवं मलखंभ के बारे में जानकारी देकर बताया गया। आर्य हनुमान जांगिड़ द्वारा योगासन और लाठी संचालन के शेष गुर सिखाए गए।
महिला आर्य समाज की उप प्रधाना निर्मला मेवाडा ने बौद्धिक सत्र के तहत शास्त्र और शस्त्र विषय पर बोलते हुए कहां कि जहां शास्त्र अर्थात ज्ञान और शस्त्र अर्थात बल है वहीं जय है। इसलिए सबको रामायण महाभारत इतिहास आदि शास्त्र पढकर रामायण से मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम से माता- पिता की आज्ञा- पालन, लक्ष्मण से तप व भ्रातृ प्रेम, श्रवण कुमार से पितृ भक्ति, महाभारत के पितामह भीष्म से ब्रह्मचर्य प्रतिज्ञा, अर्जुन से संयम, राजा हरिश्चन्द्र की सत्य-निष्ठा, इतिहास ग्रंथों मे महावीर स्वामी से अहिंसा प्रेम, महर्षि दयानन्द से वेदों के प्रति निष्ठा भाव और स्वहित से अधिक संसार हित की भावना, शंकराचार्य से ब्रह्मचर्य, वीर बालक हकीकत से धर्म के प्रति निष्ठा, नेताजी सुभाष एवं अन्य क्रान्तिकारी वीरों से देशप्रेम की शिक्षा लेनी चाहिए। और शस्त्र के तहत राष्ट्र एवं आत्म रक्षार्थ और लाठी तलवार भाला चलाता कराटे बाक्सिग मलखंभ कुश्ती आदि सिखनी चाहिए जिससे जरूरत पड़ने पर हम अपनी देश की रक्षा स्वयं कर सकेगे।

अध्यक्ष दिलीप परिहार ने बच्चों को सम्बोधित करते हुए कहां की भोजन करने से पूर्व भोजन मंत्र का उच्चारण करके प्रसाद समझकर खाना चाहिए। भोजन हमेशा सात्त्विक और संस्तुति आहार खाना चाहिए जिससे बल एवं बुद्धि दोनों का विकास होता है। परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए तीव्र इच्छा, कठोर परिश्रम, आज के काम को कल पर नहीं छोड़ना, और महत्वपूर्ण बिन्दुओं को रेखांकित कर उन्हें स्मरण रखना, अपनों से छोटो दूसरों को पढ़ाना, स्पर्धा, भाषा पर अधिकार, और अच्छा सुलेख पर ध्यान देना चाहिए।
गुरुजी गणपत भदोरिया ने बच्चों को परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के विषय पर बोलते हुए कहा कि स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिये शीर्षासन, सर्वांगासन, पश्चिमोत्तानासन, वृक्षासन, पादांगुष्ठासन आदि और ध्यान के लिए सिद्धासन, पद्मासन, वज्रासन, योगमुद्रा आदि करने चाहिए। ये सभी आसन नाड़ी तन्त्र को शान्त रखने में सहायक हैं। जिससे शरीर स्वास्थ्य और मन शांत रहता है जिससे बुद्धि बढ़ती है।
आज के कार्यक्रम में महिला आर्य समाज की उपप्रधाना निर्मला मेवाडा, सदस्य यशोदा राजपुरोहित, पुजा तंवर, संजु कंवर, डिम्पल आर्य, आर्य वीरांगना दल की कृष्णा आर्या, तनु आर्या, टीना आर्या का सहयोग रहा।बच्चो को प्रतिदिन स्वादिष्ट एवं स्वास्थ्य वर्धक नाश्ते की तैयारियों और वितरण का प्रबंधन आर्य वीर दल के महेंद्र प्रजापत, राहुल तैजी, कुशल देवड़ा, मुकेश देवड़ा, कैलाश सैन, विनोद तौमर, रामचंद्र भट्ट रीकू पंवार आदि द्वारा किया जा रहा है।










