उत्पादन शुल्क विभाग शराब तस्करी और भ्रष्टाचार की दलदल में जिल्हाधिकारी ने जाँच के आदेश भ्रष्टाचार निरोधक विभाग को दिया फिर भी कार्यवाही शून्य: रजनीकांत बोरेले

रिपोर्ट स्पर्श देसाई
मुंबई: राज्य उत्पादन शुल्क विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार और शराब तस्करी का सनसनीखेज मामला एक बार फिर उजागर हुआ है। महाराष्ट्र के पांढरकवाड़ा के व्हिसल ब्लोअर एवं “जिंदल पुरस्कार” विजेता रजनीकांत बोरेले ने शुल्क उत्पादन निरीक्षक एस.एम.बोदमवाड़,अधीक्षक नितेश शेंडे सहित कई वर्तमान और पूर्व अधिकारियों के विरुद्ध गंभीर आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जाँच की माँग की है। वही बोरेले ने आरोप लगाया है कि लाखों रुपये की रिश्वत लेकर शराब माफियाओं को खुला संरक्षण दिया जा रहा है।
इस शिकायत में कहा गया है कि देशी शराब की दुकानों से प्रतिमाह पाँच हज़ार रुपये,बीयर बार से तीन हज़ार रुपये तथा प्रत्येक शराब की बोतल पर दस रुपये की अवैध वसूली की जाती है। नए लाइसेंस और एनओसी के लिए चार से पाँच लाख रुपये तक माँगे जाते हैं। जबकि वाइन शॉप और थोक विक्रेताओं से प्रत्यक्ष रूप से लाखों रुपये की उगाही की जाती है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शराब माफिया एव वाइन शॉप मालिक ये वाइन शॉप के नाम पर करोड़ों रुपये की शराब खरीदी जाती है। जिसपर विक्रयकर नही लगता है और उसे तस्करी के मार्ग से बेचकर न केवल कर चोरी की जाती है बल्कि रिश्तेदारों के बियरबारों के माध्यम से अवैध कारोबार भी किया जाता है। पिछले दस वर्षों में करोड़ों रुपये का विक्रय कर और शुल्क कर विभाग को नुकसान पहुँचाया गया है। इस मामले में विक्रयकर विभागों ने गांधारी की भूमिका निभाई है। इसके अलावा शराब पीने का लाइसेंस जिस के पास है उसीको दारू बेचना चाहिये लेकीन 16 बरस के युवक से लेकर किसी को भी शराब बेचते है।
दारू तस्कर की खुद की वाइन,देशी और बार की दुकान है यह नियम के अनुसार खुल ने के बजाय सबेरे से ही खोलते है। जब कि दुकान खोलने और बंद करने का समय है। दुकानों के और उस मार्ग पर के सीसीटीवी फुटेज की जाँच करने पर पूरा सच सामने आयेगा यह दारू तस्कर सत्ताधारी एवं बुद्धिजीवी राजकीय पार्टी का संधी साधु नेता है और ये रिश्वत खोर अधिकारियों को लाखों की रसद पहुचाता है। इस के चलते इस पोस्टर छाप दारू माफिया पर कार्यवाही नही की जाती है।
विशेष रूप से बोरेले ने उल्लेख किया कि इसी तस्करी के कारण 31 दिसंबर 2024 को युवक राम मुक्तेलवार की दुर्घटनाग्रस्त मृत्यु हुई थी। उन्होंने माँग की है कि संदिग्ध उलेखनीय अधिकारियों की कॉल डिटेल,बैंक खाते,चल-अचल संपत्ति, महँगी गाड़ियाँ, आभूषण और बच्चों की महँगी शिक्षा आदि की गहन जाँच कर उनकी अवैध संपत्ति जब्त की जाए।
इस संबंध में बोरेले ने 12 अप्रैल 2025 को मुख्यमंत्री,मुख्य सचिव,विभागीय आयुक्त एवं जिलाधिकारी को शिकायत भेजी थी और ईडी,आयकर विभाग तथा विक्रय कर विभाग द्वारा ही जाँच की माँग की थी किंतु जिलाधिकारी कार्यालय ने दो माह बाद केवल भ्रष्टाचार निरोधक विभाग को मामला सौंपे जाने की सूचना दी। इस पर नाराज़गी जताते हुए बोरेले ने सवाल उठाया हैं कि कलेक्टर हैं या कंडक्टर है ?
पत्र से अनजान हैं या फिर मोदीजी ने राज्य को भ्रष्टाचार की खुली छूट दी गई है?फिलहाल जिलाधिकारी ने कार्रवाई के निर्देश तो दिए हैं लेकिन जाँच अब तक शुरू न होने से पूरा मामला और भी संदिग्ध होता जा रहा है।











