कार्तिक पूर्णिमा के शुभदिन पर श्री शत्रुंजय गिरिराज पट्ट दर्शन का आयोजन

- मुबंई (भायंदर पूर्व)
श्री आदेश्र्वर जिनालय में प्रतिष्ढाचार्य : श्रद्धेय गुरुदेव प. पू. आ. भ. श्रीमद् विजय यशोवर्म सुरीश्र्वरजी महाराज के कर कमलों से कार्तिक पूर्णिमा के शुभदिन पर श्री शत्रुंजय गिरिराज पटृ दर्शन का आयोजन किया जाएगा। मंदिर के संस्थापक : श्रीमती शांता बेन मीठालाल जैन चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित किया गया हैं। श्री शत्रुंजय गिरिराज तीर्थ यात्रा पुनः प्रारंभ हो तो श्रावक श्राविकाओंं एवं युवक – युवतियों नम्र निवेदन है जो भी युवक या युवती पालीताणा शत्रुंजय गिरिराज तीर्थ यात्रा हेतु जाए, तो गिरिराज सदैव स्वच्छ और पवित्र रहेंगे और हमे कचरा हटाने का अपार पुण्य प्राप्त होगा और भावांतर में उच्च गोत्र कर्म का निर्माण होगा।

इस कहावत को अपने हाथों से जंगल में चरितार्थ करें। तीर्थ अर्थात जिसमें भव समुंद्र तीर पाप साधु -साध्वी आदि जंगम तीर्थ कहलाते हैं। जबकि शत्रुंजय सम्मेत शिखरजी, अष्टापदजी, गिरगारजी , आबू देलवाडा तीर्थ तथा शंखेश्र्वर आदि स्थावर तीर्थ कहलाते हैं। इस सब तीर्थों में शत्रुंजय महातीर्थ का सबसे अधिक महत्व हैं। ठाई दीप में भूमिर्यो में अनेक तीर्थ हैं किंतु शत्रुंजय महातीर्थ तुल्य कोई और तीर्थ नहीं है। महाविदेह क्षेत्र में सीमधंर स्वामी भगवान मुक्त कंठ जिनकी प्रेथसा होती हैं। ऐसे शत्रुंजय महातीर्थ शाश्वत तीर्थ भूतकाल में अनंता अनंत आत्माओं को मोक्ष हुए। उसी प्रकार तीर्थो का राजा तीर्थोधिराज शत्रुंजय महातीर्थ कहा जाता हैं।














