कूपडावास में चारण देवल गोत्र की कुलदेवी महामाया माता की विधिवत पूजा अर्चना कर सुख-शांति की कामना की गई

कूपडावास (विशेष प्रतिनिधि): चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर कूपडावास गांव स्थित चारण समाज की कुलदेवी महामाया (महमाय) माता के मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना एवं धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया। देवल चारण गोत्र के श्रद्धालु भक्तों ने पारंपरिक विधि-विधान से माता की जोत की स्थापना कर प्रसाद अर्पित किया एवं माता रानी को भोग लगाकर संपूर्ण समाज के सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की।
यह आयोजन चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर संपन्न हुआ, जिसे महामाया माता की प्रमुख तिथि माना जाता है। इसी दिन चारण देवल कुल की कुलदेवी को समर्पित धार्मिक परंपराएं निभाई जाती हैं। मंदिर परिसर को इस अवसर पर भव्य रूप से सजाया गया था और श्रद्धालुओं की भीड़ सुबह से ही दर्शन हेतु उमड़ने लगी थी।
भक्त देवी सिंह देवल ने जानकारी देते हुए बताया कि महामाया माता की पूजा केवल चैत्र मास में ही नहीं, बल्कि वैशाख, आषाढ़, भाद्रपद, अश्विन, मृगशिरा एवं माघ मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथियों पर भी विशेष रूप से की जाती है। इन तिथियों को माता की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है। इन विशेष अवसरों पर श्रद्धालु दूर-दराज से आकर माता के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं।
पूजा के दौरान भक्तों ने भक्ति गीतों, भजन, एवं आरती के माध्यम से महामाया माता की महिमा का गुणगान किया। माता की कृपा से जनमानस में सुख-समृद्धि, पारिवारिक शांति एवं रोग-निवारण की कामना के साथ व्रत और पूजा का पालन किया गया।
इस अवसर पर समाज के वरिष्ठजनों एवं युवाओं ने भी सेवा कार्यों में भाग लेकर आयोजन को सफल बनाया। श्रद्धालुओं में माता के प्रति अगाध श्रद्धा और आस्था देखने को मिली, जो कि चारण समाज की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं की जीवंतता को दर्शाता है।
कार्यक्रम के समापन पर भक्तों में प्रसाद का वितरण किया गया और सभी ने माता रानी के जयकारों के साथ “जय महामाया माता की” उद्घोष किया।











