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जनपद के प्रसिद्ध शिक्षाविद व वरिष्ठ पत्रकार पंडित श्रवण कुमार द्विवेदी का निधन, शिक्षा व पत्रकारिता जगत में शोक की लहर

पंचनद न्यूज़, जगम्मनपुर (जालौन)।  जालौन जनपद के लिए सोमवार, 8 अप्रैल की सुबह एक दुःखद समाचार लेकर आई। जनपद के जाने-माने शिक्षाविद और वरिष्ठ पत्रकार पंडित श्रवण कुमार द्विवेदी ने आज सुबह लगभग 10:30 बजे राजकीय मेडिकल कॉलेज, उरई में अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से विभिन्न गंभीर बीमारियों से ग्रसित थे और दिल्ली, बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों के नामचीन अस्पतालों में उनका इलाज चल रहा था।

द्विवेदी का जीवन शिक्षा और पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रेरणा का स्रोत रहा है। उन्होंने अपने समर्पण, कर्मठता और विद्वत्ता से समाज को दिशा देने का कार्य किया। वे वर्षों तक शिक्षण कार्य से जुड़े रहे और अपनी बेबाक लेखनी के माध्यम से पत्रकारिता की गरिमा को बनाए रखा। उनकी लेखनी ने सामाजिक सरोकारों को आवाज़ दी और आम जनमानस की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया।

अंतिम समय तक जुझारू रहे

पंडित श्रवण कुमार द्विवेदी पिछले कुछ महीनों से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। हालांकि उनका इलाज दिल्ली और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों के प्रतिष्ठित चिकित्सालयों में चला, लेकिन स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका। अंततः आज सुबह उन्होंने अपने गृह जनपद के राजकीय मेडिकल कॉलेज में अंतिम सांस ली।

शोक की लहर

श्री द्विवेदी के निधन की खबर फैलते ही पूरे जालौन जनपद में शोक की लहर दौड़ गई। शिक्षा जगत, पत्रकार समुदाय और सामाजिक संगठनों में उनकी विद्वत्ता और सरल स्वभाव के लिए गहरा सम्मान था। उनकी मृत्यु से एक युग का अंत माना जा रहा है।

समाज के लिए अपूरणीय क्षति

शिक्षाविदों, पत्रकारों, राजनेताओं व आम नागरिकों ने उनके निधन को समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है। उनके योगदानों को याद करते हुए लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

संघर्ष और समर्पण की मिसाल

पंडित श्रवण कुमार द्विवेदी का जीवन संघर्ष और समर्पण की मिसाल रहा। उन्होंने शिक्षा को समाज सुधार का माध्यम बनाया और पत्रकारिता को एक जिम्मेदार कार्य मानते हुए सदैव सत्य और न्याय के पक्ष में खड़े रहे। उनकी साफ-सुथरी छवि और बेधड़क व्यक्तित्व ने उन्हें जनपद में विशिष्ट स्थान दिलाया।

श्रद्धांजलि सभा का आयोजन

श्री द्विवेदी के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए उनके पैतृक गांव लाया जाएगा, जहां क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद, पत्रकार एवं समाजसेवी बड़ी संख्या में उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

न्यूज़ डेस्क

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