“ताज सजा, लेकिन ताजपोशी नहीं!” — ओबीसी मोर्चा में कौन रोक रहा है महेंद्र कुमावत की औपचारिक एंट्री?



“ताज सजा, लेकिन ताजपोशी नहीं!”
ओबीसी मोर्चा में कौन रोक रहा है महेंद्र कुमावत की औपचारिक एंट्री?
ओबीसी मोर्चा के घोषित अध्यक्ष महेंद्र कुमावत मैदान में पूरी सक्रियता से जुटे हैं। वे लगातार बैठकें कर रहे हैं, कार्यकर्ताओं से संवाद बना रहे हैं और संगठन को गति देने में लगे हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक उनका औपचारिक शपथ ग्रहण समारोह आयोजित नहीं हो पाया है।
इस मुद्दे पर चर्चाओं का बाजार गर्म है तथा समस्त ओबीसी समाज के साथ कुमावत समाज में भी रोज नई चर्चाएं व्याप्त हैं।
बड़ा सवाल
जब अध्यक्ष सक्रिय हैं तो फिर शपथ ग्रहण में देरी क्यों?
सियासी हलकों में चर्चा तेज
राजनीतिक हलकों में इस देरी को महज कार्यक्रम तय न होने की सामान्य प्रक्रिया नहीं माना जा रहा। चर्चा है कि मंच साझा करने को लेकर बड़े नेताओं के बीच समय और प्राथमिकता का टकराव बना हुआ है।
वहीं कुछ सूत्र यह भी संकेत दे रहे हैं कि संगठन के भीतर शक्ति संतुलन और गुटीय समीकरणों को साधने की कोशिश में मामला अटक गया है।
समर्थक बनाम विरोधी
कुमावत समर्थकों का कहना है कि “नेतृत्व मिल चुका है, अब औपचारिकता में देरी का क्या औचित्य?”
वहीं विरोधी खेमे की खामोशी ने अटकलों को और हवा दे दी है।
अटकलों का दौर
- क्या यह देरी अंदरूनी खींचतान का संकेत है?
- क्या शपथ ग्रहण को बड़े शक्ति प्रदर्शन में बदलने की रणनीति बन रही है?
- या फिर किसी बड़े राजनीतिक संदेश की तैयारी है?
फिलहाल संगठन में सन्नाटा है, लेकिन सियासी गलियारों में हलचल तेज है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि आखिर कब बजेगी शपथ की शंखनाद — और किसके इशारे पर?











