फॉरेस्टर डे विशेष: गोयरा (मॉनिटर लिजर्ड) – अंधविश्वासों से घिरे एक निर्दोष जीव की सत्य कहानी

गुरलां/भीलवाड़ा। वन्यजीवों की दुनिया रहस्यों से भरी होती है, और इन्हीं में से एक है चंदन गोयरा, जिसे ग्रामीण क्षेत्रों में ‘बिजली गोह’ या ‘मॉनिटर लिजर्ड’ के नाम से भी जाना जाता है। लेकिन इसके नाम के साथ-साथ वर्षों से चली आ रही अफवाहें और अंधविश्वास आज भी इसकी जान के दुश्मन बने हुए हैं।
अंधविश्वास बनाम सच्चाई: क्या गोयरे के काटने से मौत होती है?
ग्रामीण धारणा कहती है –
“गोयरा काट ले तो आदमी पानी भी नहीं मांगता, सीधा मर जाता है!”
लेकिन वैज्ञानिक दृष्टिकोण बिल्कुल विपरीत है।
वन विभाग के एक्सपर्ट रेंजर कुलदीप शर्मा (भीलवाड़ा) और प्रशांत शर्मा (चित्तौड़गढ़) ने इस भ्रम को तोड़ने के लिए एक साहसिक कदम उठाया। दोनों ने खुद को गोयरे से कटवाया और उसका पूरा वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसमें यह स्पष्ट दिखा कि:

- काटने पर कोई सूजन नहीं हुई।
- ना कोई ज़हर फैला, ना कोई जान का खतरा हुआ।
- यह सिर्फ आत्मरक्षा में काटता है।
इस वीडियो का स्पष्ट संदेश था:
“अंधविश्वास के चलते किसी भी वन्यजीव को मारना बंद करें। ये हमारे पारिस्थितिकी तंत्र का अहम हिस्सा हैं।”
गोयरा कौन है? क्या कहती है जैविक परिभाषा?
- वैज्ञानिक नाम: Varanus bengalensis
- सामान्य नाम: मॉनिटर लिजर्ड / गोह / गोयरा
- परिवार: Varanidae
- प्राकृतिक आवास: सूखे जंगल, झाड़ियां, चट्टानें, खेत, ग्रामीण व उपनगरीय क्षेत्र
- प्राकृतिक भोजन: कीट-पतंगे, अंडे, छोटे जीव-जंतु
- प्रवृत्ति: शर्मीला, रक्षात्मक, शांत
- प्राकृतिक खतरे: इंसानों का डर, सड़क दुर्घटनाएं, अवैध शिकार
जानिए गोयरे की अद्भुत ताकत
- वयस्क गोयरा 1 क्विंटल तक का भार खींचने में सक्षम होता है।
- इसके नाखून तेज़ और मजबूत होते हैं, जिनका इस्तेमाल यह खुदाई में करता है।
- इसकी जीभ छिपकली जैसी लपलपाती है, जिससे यह सूंघकर अपने आसपास का वातावरण पहचानता है।

इतिहास में गोयरे की भूमिका: तानाजी और सिंहगढ़ किला
इतिहासकार बताते हैं कि छत्रपति शिवाजी महाराज के सेनापति तानाजी मालुसरे ने कोंकण क्षेत्र में युद्ध के दौरान गोयरे का इस्तेमाल किले की दीवार पर चढ़ने के लिए किया। गोयरे को रस्सी से बांधकर दीवार पर छोड़ा गया, जिससे उसकी पकड़ से सैनिक किले पर चढ़ने में सक्षम हुए।
यह साबित करता है कि गोयरा एक प्राचीन रणनीतिक सहयोगी रहा है, न कि कोई डरावना जीव।
गोयरा क्यों आता है रिहायशी क्षेत्रों में?
बारिश के मौसम में जब जमीन में बने बिलों में पानी भर जाता है, तो गोयरे रिहायशी इलाकों की ओर निकलते हैं, जोकि उनकी रक्षा और शरण की स्वाभाविक प्रवृत्ति है। लेकिन दुर्भाग्यवश, लोग डरकर उसे मारने की कोशिश करते हैं, जबकि वह सिर्फ बचाव की मुद्रा में होता है।
रेंजर का संदेश: “डरिए मत, समझिए!”
रेंजर कुलदीप शर्मा कहते हैं:
“जैसे ही बारिश में गोयरा दिखाई देता है, लोग कॉल करते हैं – ‘भाई कोई अजगर है, मार दो!’… लेकिन यह जीव हमला नहीं करता, यह खुद को बचाने के लिए बिल छोड़ता है।“
इसलिए जरूरी है कि हम इन जीवों के व्यवहार को समझें, डर नहीं, जागरूकता फैलाएं।
पर्यावरणीय महत्व: पारिस्थितिकी तंत्र का प्रहरी
- गोयरा छोटे कीटों और जीवों को खाकर प्राकृतिक संतुलन बनाए रखता है।
- यह खेतों में चूहों और हानिकारक कीड़ों को खाकर किसानों का मददगार होता है।
- यह किसी भी इंसान पर बिना उकसावे के हमला नहीं करता।
कानूनी संरक्षण: जानिए आपकी जिम्मेदारी
भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के अंतर्गत:
- मॉनिटर लिजर्ड Schedule-I में संरक्षित प्राणी है।
- इसे पकड़ना, मारना, या व्यापार करना दंडनीय अपराध है।
- दोष सिद्ध होने पर 7 साल तक की जेल और भारी जुर्माना हो सकता है।
फॉरेस्टर डे का सही सम्मान क्या है?
“सिर्फ पौधे लगाना ही पर्यावरण का सम्मान नहीं,
वन्यजीवों की रक्षा करना भी उतना ही आवश्यक है।”
इस फॉरेस्टर डे पर हमें यह प्रण लेना चाहिए कि:
- हम अंधविश्वास से ऊपर उठें।
- वन्यजीवों की अहमियत को समझें।
- गोयरे जैसे निर्दोष जीवों के प्रति संवेदनशील बनें।
गोयरा दुश्मन नहीं, पर्यावरण का रक्षक है
गोयरा एक ऐसा जीव है जिसे डरावना दिखाकर वर्षों से बदनाम किया गया, जबकि हकीकत यह है कि वह शर्मीला, शांत और पूरी तरह से गैर-घातक है। फॉरेस्टर डे के इस अवसर पर हमें ऐसे मिथकों को तोड़ना होगा और वन्यजीवों को समझने का साहसिक प्रयास करना होगा।
याद रखें:
“प्रकृति का हर जीव किसी न किसी भूमिका में है, हम उसके मालिक नहीं, सह-यात्री हैं।”













