भारत–अमेरिका व्यापार वार्ता जारी, टैरिफ को लेकर चिंता बरकरार
नई दिल्ली/वॉशिंगटन – भारत और अमेरिका के बीच जारी व्यापार वार्ता ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय ध्यान खींचा है।
वाणिज्य सचिव सुनील बार्थवाल ने पुष्टि की है कि दोनों देशों के बीच बातचीत प्रगति पर है और अगले कुछ हफ्तों में समझौते के अहम बिंदुओं पर सहमति बनने की उम्मीद है।
वार्ता का मुख्य एजेंडा
1. टैरिफ कटौती – अमेरिका चाहता है कि भारत कुछ आयातित उत्पादों पर शुल्क घटाए, जबकि भारत अपने कृषि और औद्योगिक उत्पादों के लिए अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच चाहता है।
2. टेक्नोलॉजी और डेटा नियम – अमेरिकी कंपनियां डेटा लोकलाइजेशन कानूनों में लचीलापन चाहती हैं, वहीं भारत साइबर सुरक्षा को लेकर सख्ती बरकरार रखना चाहता है।
3. ऊर्जा व्यापार – LNG (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) और ग्रीन एनर्जी निवेश को लेकर सहयोग बढ़ाने पर चर्चा।
4. फार्मास्यूटिकल्स और मेडिकल डिवाइसेस – भारत चाहता है कि अमेरिकी अनुमोदन प्रक्रिया को सरल किया जाए।
ट्रंप–पुतिन वार्ता का असर
अमेरिकी खजाना सचिव ने चेतावनी दी है कि अगर ट्रंप–पुतिन बैठक में रूस–अमेरिका ऊर्जा सौदे पर सहमति नहीं बनी, तो भारत पर सेकेंडरी टैरिफ बढ़ सकते हैं। इसका सीधा असर भारत के रूसी तेल आयात और ऊर्जा लागत पर पड़ सकता है।

अगले कदम
- अगस्त के अंत तक अमेरिका का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल दिल्ली आ सकता है।
- व्यापार समझौते के मसौदे पर प्रारंभिक सहमति सितंबर में संभव है।
- दोनों देश G20 मंच पर भी इस मुद्दे को आगे बढ़ाएंगे।
सरकारी बयान
“हमारी प्राथमिकता भारत के किसानों, छोटे व्यापारियों और उद्योगों के हितों की रक्षा करना है, साथ ही निर्यात को बढ़ाना है।”
वाणिज्य सचिव ने कहा
अमेरिकी वाणिज्य प्रतिनिधि कार्यालय ने भी बयान में कहा कि “भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक साझेदारी मजबूत है और इसे भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप ढालने की आवश्यकता है।”
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह समझौता सफल होता है, तो भारत के निर्यात में 15–20% की बढ़ोतरी संभव है।
लेकिन टैरिफ पर दबाव और डेटा नियमों पर टकराव इस समझौते के लिए बड़ी चुनौती बने रह सकते हैं।













