भारत को विश्वगुरुबनाने के लिए वसुधैव कुटुंबकम की भावना को प्रबल करना होगा –स्वामी आर्यवेश

पाली| आर्य समाज के सर्वोच्च नेता एवं सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा, नई दिल्ली के प्रधान स्वामी आर्यवेश ने कहा कि भारत को पुनः विश्वगुरु के पद पर प्रतिष्ठित करना है तो “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना को समाज में सशक्त करना होगा। वे आज आर्य वीर दल, आर्य समाज एवं महिला आर्य समाज पाली के तत्वाधान में लाखोटिया रोड स्थित ऋषि दयानन्द व्यायामशाला मे स्वतंत्रता सेनानी एवं गुरुकुल कांगड़ी के संस्थापक स्वामी श्रद्धानंद के 170 वें जन्मदिवस के अवसर पर आयोजित यज्ञ सत्संग कार्यक्रम मे सम्बोधित कर रहे थे।
आर्यवेश ने कहा कि देश की उन्नति और प्रगति का मार्ग सामाजिक सौहार्द, समरसता और नैतिक मूल्यों से होकर गुजरता है। महर्षि दयानंद सरस्वती ने “वेदों की ओर लौटो” का आह्वान इसलिए किया था कि जब तक भारतवासी वेदों के आदर्शों पर जीवन व्यतीत करते रहे, तब तक भारत विश्व गुरु बनकर सबका नेतृत्व करता रहा।

राष्ट्र की वर्तमान समस्याओं और उसके समाधान के एक सवाल के जबाब में स्वामी आर्य वेश ने कहां की आर्य समाज द्वारा संचालित “सप्तक्रांति संकल्प अभियान” के माध्यम से जातिवाद, साम्प्रदायिकता, धार्मिक अंधविश्वास, नारी उत्पीड़न, नशाखोरी, भ्रष्टाचार और शोषण जैसी कुरीतियों से मुक्त समाज का निर्माण वर्तमान समय की आवश्यकता है। साथ ही देश को मानसिक, शैक्षिक, आर्थिक गुलामी से मुक्त करने के लिए आवश्यक है कि हमें प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति, आयुर्वेद एवं स्वदेशी को प्राथमिकता देनी होगी। ऋषि दयानन्द सरस्वती ने 150 वर्ष पूर्व सत्यार्थ प्रकाश मे लिखा है कि देश मे अनिवार्य, समान एवं निशुल्क शिक्षा होनी चाहिए। उन्होंने स्वभाषा एवं स्वराज्य के संकल्प को चरितार्थ करने पर बल दिया।
सार्वदेशिक आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी आदित्यवेश ने स्वामी श्रद्धानंद के बारे में कहां की गुरुकुल कांगड़ी के संस्थापक एवं महान स्वतंत्रता सेनानी स्वामी श्रद्धानंद के 100 वें बलिदान दिवस एवं 170 वें जन्म दिवस के अवसर पर हरिद्वार में अंतरराष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें देश-विदेश से एक लाख से अधिक कार्यकर्ताओं के सहभागी होने की संभावना है। जिसमे देश मे वैकल्पिक शिक्षा प्रणाली पर प्रबुद्ध विद्वान विचार करेंगे। उन्होंने बताया कि आगामी एक वर्ष में विभिन्न संगठनों के माध्यम से एक लाख युवाओं को आर्य समाज से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए चरित्र निर्माण शिविर, वेद संदेश संगोष्ठी और युवा सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे।
आर्य वीर दल राजस्थान के प्रधान भंवर लाल आर्य ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि कि यह वर्ष आर्य समाज की स्थापना का 150 वां वर्ष है। बीते डेढ़ शताब्दी में आर्य समाज ने स्वतंत्रता आंदोलन, नारी शिक्षा, सामाजिक समरसता तथा कुरीतियों के उन्मूलन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आर्य प्रतिनिधि सभा राजस्थान के उप मंत्री हरदेव आर्य, आर्य वीर दल अध्यक्ष दिलीप परिहार संरक्षक धनराज आर्य ने आर्य वीर दल पाली कि और से संचालित गतिविधियां और कार्यक्रमों के बारे में बताया ।
इससे स्वामी आर्य वेश एवं स्वामी आदित्य वेश के ब्रह्मात्व में आर्य वीर विरागनाओं द्वारा विश्वकल्याण की भावना से देव यज्ञ कर सबके स्वास्थ्य और खुशहाली की मंगलकामना की गई। पश्चात आर्य समाज महिला आर्य समाज एवं आर्य वीरांगना दल द्वारा अतिथियों का स्वागत पट्टीका और स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया गया।
इस अवसर पर आर्य समाज से मंत्री विजयराज आर्य, संरक्षक शिवराम आर्य, पूर्व प्रधान गजेन्द्र अरोड़ा, प्रचार मंत्री घेवरचन्द आर्य, एडवोकेट कुन्दन चौहान, गणपत भदोरिया आर्य वीर दल से अध्यक्ष दिलीप परिहार, उपाध्यक्ष देवेंद्र मेवाडा, सचिव हनुमान आर्य, शाखा संचालक भरत आर्य, भरतवीर सिंह, केलाश आर्य, गजेन्द्र गुर्जर, जगदीश आर्य, पूरण आर्य, महिला आर्य समाज से अध्यक्ष अंकिता सिरवी, सचिव छवी आर्या, सदस्य सोनू आर्या, पवन चौहान, पायल आर्या, योगेश्वरी आर्या, विरांगना दल से प्रन्नति आर्या, गरिमा आर्या, कृष्णा आर्य, अंजली, झलक, अक्षरा, रिद्धि, वैशाली, उदय श्री, नन्दिनी चौहान आदि उपस्थित रहे।
रिपोर्ट – घेवरचन्द आर्य पाली














