महाराष्ट्र के सबसे बड़े त्यौहार गणेशोत्सव से पहले बाजरे गुलजार

- मुंबई
विदेशी वस्तुओं और ऑनलाइन कंपनियों से खरीदारी करने से बचें उपभोक्ता : शंकर ठक्कर
कॉन्फडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय मंत्री एवं अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकर ठक्कर ने बताया महाराष्ट्र में वर्ष के सबसे बड़े त्यौहार गणेशोत्सव आने पर है इसलिए गणेशोत्सव मनाने वाले भक्तों ने खरीदारी शुरू कर दि है जिसके चलते बाजरे गुलजार हो रही है। मूर्तिकारों और कारोबारियों ने बिक्री, बीमा और सजावट से भारी कारोबार की उम्मीद जताई है।
महाराष्ट्र के तमाम शहरों और खास तौर पर मुंबई के बाजारों में गणेशोत्सव की खरीदारी करने के लिए ग्राहक बाजारों में बड़ी संख्या में आना शुरू हो गए हैं। महाराष्ट्र के सबसे बड़े त्यौहार की न केवल सार्वजनिक तौर पर बल्कि हर गली,चौराहा,नुक्कड़ सोसाइटी ओर घर-घर में तैयारी हो ही रही है, बाजार में दुकानदार, कंपनियां, सामाजिक संगठन, बड़ी सोसाइटीयां राजनीतिक दल और सरकार भी तैयारी में जुट गए हैं।
इस बार मूर्तिकारों और गणेशोत्सव मंडलों में ज्यादा उत्साह दिख रहा है क्योंकि प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) से बनी मूर्तियों पर काफी समय से चल रहा प्रतिबंध हट गया है। इस वर्ष से महाराष्ट्र सरकार ने गणेशोत्सव को राजकीय उत्सव भी घोषित कर दिया है, जिससे इस बार का त्योहार अधिक भव्य होने की उम्मीद है। त्योहार में उत्साह जितना ज्यादा होगा, कारोबार भी उतना ही ज्यादा होगा। 10 दिन चलने वाला गणेशोत्सव इस साल 27 अगस्त से शुरू होगा।
हर वर्ष गणेशोत्सव में आस्था रखने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है इसलिए साल दर साल व्यापार के आंकड़े भी बढ़ते जा रहे हैं। जिसमें थोड़ी असर महंगाई के चलते भी होती है। भक्तों की संख्या बढ़ने से बाजारों में भीड़ उमड़ती है उतना ही कारोबार भी परवान चढ़ता है। सुंदर मूर्तियों का आकर्षण ही कारोबार को सैकड़ों करोड़ रुपये में पहुंचा देता है। विसर्जन की शर्त नरम करने से इस साल व्यापार 10 से 18 % तक बढ़ने का अनुमान है। यह बात अलग है कि पिछले कुछ साल में मिट्टी, पीओपी, रंग, मजदूरी आदि के दाम बढ़ने से मूर्तियों के दाम भी बढ़ गए हैं और इस साल भी मूर्ति पिछले साल से करीब 8 से 10 % तक महंगी रहेंगी।

मूर्तियां बनाने का कारखाना चला रहे कारोबारी और मूर्तिकार बताते हैं कि मूर्तियों की बुकिंग शुरू हो चुकी है। मुंबई और आसपास के इलाके में 1 फुट की गणेश की मूर्ति 2,000 से 3,000 रुपये के बीच पड़ती है। पिछले साल गणेशोत्सव के दौरान करीब 550 करोड़ रुपये का मूर्तियों का कारोबार हुआ था, जो इस साल 600 करोड़ रुपये के पार पहुंचने की उम्मीद है। महाराष्ट्र में सबसे अधिक मूर्तियां रायगढ़ जिला में पैन के आसपास के गांवों में बनती है।और वहां से पूरे देश में और विदेश तक भेजा जाता है।
भगवान गणेश के स्वागत में मुंबई और पूरे महाराष्ट्र के बाजारों में तैयारियां शुरु हो चुकी है। दस दिन के इस उत्सव में इस साल राज्य में 12,000 करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार होने की उम्मीद है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और गोवा में गणेशोत्सव के दौरान आर्थिक गतिविधियां बहुत तेज हो जाती हैं।
इन राज्यों में करीब 20 लाख गणेश पंडाल लगाए जाते हैं। पिछले साल महाराष्ट्र में ही 7 लाख से अधिक पंडाल लगाए गए थे। इसके बाद कर्नाटक में 4 लाख, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और मध्य प्रदेश में 2-2 लाख और देश के बाकी हिस्सों में 1 लाख पंडाल लगाए गए थे। हर पंडाल में सजावट पर औसतन केवल 50,000 रुपये का खर्च भी माना जाए तो आंकड़ा 10,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच जाता है। इसमें सेट, सजावट, साउंड सिस्टम, डीजे, प्रतिमा और पूजा सामान, फल, फूल, मिठाइयां,ड्राई फ्रूट, कपड़े, आदि शामिल हैं।
गणेशोत्सव देखने के लिए देश-विदेश से लोग महाराष्ट्र पहुंचते हैं, जिससे पर्यटन और परिवहन उद्योग की भी अच्छी कमाई हो जाती है। बड़े पैमाने पर सार्वजनिक आयोजनों से इवेंट मैनेजमेंट कंपनियों और उस व्यवसाय से जुड़े लोगों का बढ़िया कारोबार हो जाता है।गणपति के इस त्योहार का जितना इंतजार महाराष्ट्र के आम जन को होता है उतना ही कारोबारियों को भी होता है।
क्योंकि ज्यादातर घरों में गणपति का आगमन होता है और लोग दिल खोलकर खर्च करते हैं। गणपति के पंडाल कंपनियों के लिए प्रचार और लोगों से सीधे संवाद के माध्यम भी होते हैं। इसलिए रिलायंस, टाटा, अदाणी जैसे कॉरपोरेट समूह कुछ बड़े भवन निर्माता पंडालों के लिए जमकर दान देते हैं। स्थानीय नेता भी इसमें दिल खोलकर सहयोग करते हैं।
पिछले कुछ वर्षों में धार्मिक स्थलों पर भीड़ बढ़ने से कई हादसे हुए हैं जिसके चलते अब गणेश मंडलों द्वारा इसका बीमा निकालना शुरू कर दिया है। मुंबई का गणपति महोत्सव विश्व प्रसिद्ध है और इसमें बड़ी संख्या में लोग हिस्सा लेते हैं। कई पंडालों में गणपति की मूर्तियों पर लाखों रुपये के गहने भी चढ़े होते हैं। ऐसे में किसी अनहोनी की आशंका में गणपति मंडल अपने पंडालों का बीमा भी कराते हैं, जिससे बीमा कंपनियों का खूब कारोबार होता है।
मुंबई के सबसे अमीर माने जाने वाले एक गणपति सेवा मंडल ने पिछले साल अपने पंडाल का 400.58 करोड़ रुपये का बीमा कराया था। प्रसिद्ध लालबागचा राजा ने भी 32.76 करोड़ रुपये का बीमा करवाया था। बीमा कंपनियों को उम्मीद है कि इस साल पंडालों का बीमा 1,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इसी उम्मीद में कंपनियों ने बड़े पंडालों के आयोजकों के पास चक्कर काटने भी शुरू कर दिए हैं। इस बीमा में आम तौर पर गणपति की मूर्ति पर पहनाए गए जेवरात, भक्तों की सुरक्षा और दूसरे जोखिम शामिल होते हैं।
शंकर ठक्कर ने आगे कहा देश को मजबूत करने के लिए लोगों को देश में बने हुए सामान की खरीदी करनी चाहिए और हो सके तो यह खरीदी स्थानीय दुकानदारों से करनी चाहिए ना कि ऑनलाइन कंपनियों से क्योंकि कोई भी त्योहार या आपदा के समय स्थानीय दुकानदार मदद करते हैं ना की ऑनलाइन विदेशी कंपनियां।












