महाराष्ट्र में इस वर्ष श्रावण माह में 1100 करोड़ के व्यापार का अनुमान

महाराष्ट्र में चार ज्योतिर्लिंग होने के नाते श्रावण का महत्व और भी अधिक है : शंकर ठक्कर
श्रावण के अवसर देश में ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए वरदान बन कर आता है। इस अवसर पर पुरे महीने भर धार्मिक अनुष्ठानों में वृद्धि होने से व्यापार में बढ़ोतरी हो जाती है, व्यापारियों को इस वर्ष श्रवण में महाराष्ट में 1100 करोड़ के व्यापार का अनुमान है। कॉन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) राष्ट्रीय मत्री एवं अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकर ठक्कर ने बताया की धार्मिक त्योहार अर्थव्यवस्था को काफी बढ़ावा देते हैं।
जिसमें श्रावण माह का योगदान काफी बड़ा होता है यह त्योहार पूरे एक महीने तक चलता है। उत्तर भारत का सावन माह पहले शुरू होता है और मध्य भारत एवं दक्षिण भारत का श्रावण माह 25 जुलाई से शुरू होगा। अधिकांश त्योहार गाँव में उत्पादों की बिक्री प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शहरों में नियोजित होती है जिसके जरिए ग्रामीण अर्थतंत्र मजबूत बनता है। देश भर में श्रावण माह में 4,5000 करोड़ का व्यापार होने का अनुमान है।
महाराष्ट्र में 4 ज्योतिर्लिंग होने के नाते श्रावण का अधिक महत्व है और देशभर से श्रद्धालु महाराष्ट्र आते हैं। इस महीने में व्रत में उपयोग में लिए जाने वाले मूंगफली तेल का उपयोग काफी मात्रा में बढ़ जाता है लेकिन भक्तों के लिए राहत की खबर है कि इस वर्ष मूंगफली तेल के दाम गत वर्ष के समान है।

महाराष्ट्र चैंबर ऑफ़ कॉमर्स इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर मासिया के वरिष्ठ सदस्य एवं व्रत की वस्तुओं के थोक विक्रेता भावेश मानेक के अनुसार इस महीने में साबूदाना, मूंगफली दाना इत्यादि व्रत में खाने की वस्तुओं की डिमांड सामान्य दिनों के मुकाबले डबल हो जाती है।
इस वर्ष इन वस्तुओं के दाम गत वर्ष के जितने ही है कोई भी बढ़ोतरी नहीं हुई। इसी तरह दूध की डिमांड भी काफी बढ़ जाती है भगवान को दूध चढ़ाते हैं, मिठाई, व्रत में खाए जाने वाले नमकीन,प्रसाद,फल ड्राई फ्रूट, फूल, हार पूजा के समान और भगवान के लिए और मंदिरों की सजावट के लिए फूलों की भी काफी बिक्री होती है।
धार्मिक स्थलों पर दर्शन के लिए जाने वाले लोगों से ट्रेवल्स व्यवसाय मैं काफी बढ़ोतरी देखने को मिलती है। टीशर्ट, निक्कर, पटका, तौलिया या फिर बटुआ – ये सब की बिक्री भी छोटे दुकानदार ही करते हैं। ‘महाकाल’ लिखे टीशर्ट्स हों या फिर भगवान शिव की तस्वीर वाले, इनकी माँग बढ़ जाती है और बिक्री भी। देश भर के मंदिर के आसपास फल और बेलपत्र का कारोबार करोड़ों का होता है।
इस महीने में जल के साथ बेलपत्र चढ़ाया ही चढ़ाया जाता है। प्रसाद में फल लोग लेते ही हैं। महिलाओं की श्रृंगार की वस्तुएं भी खूब बिकती हैं। इसके अलावा कावड़ यात्रा के साथ चलने वाले डीजे का भी बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है।अन्य त्यौहार भी इस माह में होने कारण व्यापार और भी बढ़ेगा।
शंकर ठक्कर ने आगे कहा सनातन धर्म के त्योहार से देश की अर्थव्यवस्था को काफी बढ़ावा मिलता है। इन त्योहारों में दान का भी बहुत महत्व है इसलिए गरीब लोगों को भी मुफ्त में खाने एवं अन्य वस्तुएं दान दी जाती है है।













