युवा संसद 2025: लोकतंत्र के मंच पर तेरह राज्यों के 168 युवाओं की गूंज

- अजमेर।
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राजस्थान विधानसभा के ऐतिहासिक सदन में शनिवार को आयोजित “चौथी युवा संसद” न केवल एक शैक्षणिक आयोजन रहा
बल्कि यह कार्यक्रम देशभर के युवाओं की लोकतंत्र में सक्रिय भागीदारी और राष्ट्रहित पर केंद्रित जागरूक सोच का मंच भी बना। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की पहल पर राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (CPA) की राजस्थान शाखा के तत्वावधान में हुए इस आयोजन में तेरह राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों से चयनित 168 छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया।
जब युवाओं ने संभाली सदन की कुर्सियाँ
इस युवा संसद में राजस्थान, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, गोवा, गुजरात, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, नई दिल्ली, चंडीगढ़ सहित 55 स्कूलों से आए 9वीं से 12वीं कक्षा तक के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। सदन में 56 युवाओं ने पाक अधिकृत कश्मीर खाली कराने और आतंकवाद जैसे संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर तथ्यों और तर्कों के साथ मर्यादित ढंग से पक्ष-विपक्ष में संवाद किया।
“संवाद और सहमति लोकतंत्र की आत्मा हैं” — वासुदेव देवनानी
सभा को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने युवाओं को लोकतंत्र की संस्कृति, मर्यादा और मूल्य समझाते हुए कहा:
“भारत की प्रतिष्ठा आज वैश्विक स्तर पर तेज़ी से बढ़ रही है। हमारा संविधान सशक्त है और लोकतंत्र जीवंत। युवाओं को न केवल आलोचक बल्कि परिवर्तन के सहभागी बनना होगा।”
उन्होंने स्पष्ट कहा कि विरोध भी गरिमामय और मर्यादित हो, क्योंकि लोकतंत्र केवल सत्ता परिवर्तन का माध्यम नहीं, बल्कि विचारों का पुल है। देवनानी ने कहा, “संविधान और राष्ट्र सर्वोपरि हैं। मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मनभेद नहीं होने चाहिए।”


संविधान से विज्ञान तक — भारत का गौरवशाली अतीत
वासुदेव देवनानी ने युवाओं से कहा कि वे रामचरितमानस और महाभारत जैसे ग्रंथों से जीवन के मूल्यों को समझें। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर तथ्यों की पुष्टि किए बिना पोस्ट साझा करना खतरनाक प्रवृत्ति है, युवाओं को सोचने और गहराई में जाने की आदत विकसित करनी चाहिए।
उन्होंने कहा:
“महाभारत में संजय ने मीलों दूर से आँखों देखा हाल सुनाया, यह संचार का सबसे पुराना उदाहरण है। आज की पीढ़ी को यह समझने की जरूरत है कि हमारा देश विज्ञान, संस्कृति और विचार में प्राचीन काल से ही समृद्ध रहा है।”
युवा संसद: नेतृत्व, विवेक और अनुशासन का पाठ
राष्ट्रमंडल संसदीय संघ के सचिव संदीप शर्मा ने कहा कि युवा संसद केवल बोलने या विरोध करने का अभ्यास नहीं है, बल्कि यह एक सजीव लोकतांत्रिक पाठशाला है। यहां युवा केवल मतदाता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय उत्तरदायित्व के सक्रिय वाहक बनते हैं।
उपस्थिति और सहभागिता
इस अवसर पर राजस्थान विधानसभा के प्रमुख सचिव भारत भूषण शर्मा, विशिष्ट सहायक के.के. शर्मा, एसएमएस स्कूल के चेयरमैन विक्रमादित्य, प्राचार्या ज्योति, अन्य अधिकारी और विद्यालयों के शिक्षकगण भी मौजूद रहे।
युवा संसद 2025 ने यह सिद्ध किया कि भारत का भविष्य जागरूक, विचारशील और राष्ट्रनिष्ठ युवाओं के हाथ में है। इस ऐतिहासिक आयोजन ने ना सिर्फ युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया की गहराई से परिचित कराया, बल्कि उन्हें यह भी सिखाया कि संवाद, सहमति, असहमति और मर्यादा ही लोकतंत्र की असली पहचान हैं।















