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राजस्थान में खनिज प्रबंधन में ड्रोन तकनीकों का उपयोग: 19 मार्च को विशेषज्ञों और लीजधारकों के बीच संवाद

जयपुर – माइनिंग सेक्टर में वोल्यूमेट्रिक आकलन और खनिज प्रबंधन में ड्रोन तकनीकों के उपयोग पर 19 मार्च को जयपुर में एक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में तकनीकी विशेषज्ञ प्रदेश के खनिज लीजधारकों से सीधा संवाद करेंगे। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में होने वाले इस आयोजन का संयोजन खान विभाग और राजस्थान माइंस एवं मिनरल्स लिमिटेड द्वारा किया गया है।

प्रमुख शासन सचिव माइंस एवं पेट्रोलियम टी. रविकान्त ने बताया कि प्रदेश में आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए 1 अप्रैल 2025 से सभी अप्रधान खनिज लीजधारकों को अपने लीज क्षेत्र और उसके आसपास के 100 मीटर क्षेत्र का ड्रोन/एरियल सर्वे कराकर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इस नई व्यवस्था को लागू करने के दौरान सामने आने वाली कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने एकबारीय समाधान योजना की घोषणा की है।

वोल्यूमेट्रिक आकलन से पारदर्शिता

वोल्यूमेट्रिक आकलन से यह स्पष्ट होगा कि किसी लीज क्षेत्र में वैध खनन, अवैध खनन या अन्य क्षेत्र से खनिज की ढुलाई की क्या स्थिति रही है। इस प्रक्रिया से लीजधारकों को भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद से बचने में सहायता मिलेगी।

कार्यक्रम में विशेषज्ञों के प्रस्तुतिकरण

इस संवाद कार्यक्रम के लिए अतिरिक्त निदेशक माइंस जयपुर महावीर प्रसाद मीणा को नोडल अधिकारी और अधीक्षण भूवैज्ञानिक संजय सक्सेना को सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है। कार्यक्रम के दौरान राजस्थान अप्रधान खनिज रियायती नियमों में ड्रोन सर्वे प्रावधानों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही, निम्नलिखित विषयों पर विभिन्न कंपनियों द्वारा प्रस्तुतिकरण दिया जाएगा:

  • आइडिया फोर्ज द्वारा खनन में ड्रोन सर्वे का अनुप्रयोग
  • गरुड़ सर्वे द्वारा ड्रोन तकनीक से वोल्यूमेट्रिक आकलन
  • एमपीआरएसएस माइनिंग सॉल्यूशन द्वारा खदानों में ड्रोन का उपयोग
  • वीएस सेफ्टी द्वारा खदानों के लिए सेवा के रूप में ड्रोन
  • एपीएसएल सॉल्यूशन द्वारा उत्खनन में ड्रोन सर्वे तकनीक
  • स्फेयर द्वारा डीजीसीए के ड्रोन सर्वे लाइसेंस प्रक्रिया की जानकारी

लीजधारकों के लिए विशेष सुविधा

राजस्थान माइंस एवं मिनरल्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक भगवती प्रसाद कलाल ने बताया कि राज्य सरकार ने हजारों लीजधारकों की सुविधा के लिए वोल्यूमेट्रिक आकलन को अनिवार्य किया है और एकबारीय समझौता योजना लागू कर दी है। इस नई व्यवस्था के तहत लीजधारकों को आवश्यक नियमों और प्रक्रियाओं की जानकारी देने के लिए यह साझा मंच उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि वे सुगमता से इस प्रणाली को अपना सकें। इस कार्यक्रम से राज्य के खनन क्षेत्र में ड्रोन तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा, जिससे पारदर्शिता और कार्यक्षमता में सुधार आएगा।

न्यूज़ डेस्क

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