राजस्थान में तीर्थ यात्रियों को बड़ी सौगात: बीओटी मॉडल पर बनेगी आधुनिक धर्मशालाएं, देवस्थान विभाग ने बनाई नई नीति

📍 धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं के ठहराव की सुविधाएं होंगी हाईटेक, किराया नीति में भी होगा बदलाव
📅 प्रकाशित तिथि: 13 अगस्त 2025
✍️ लेखक: राजस्थान धार्मिक समाचार डेस्क
🔷 देवस्थान विभाग की ऐतिहासिक पहल: श्रद्धालुओं को मिलेगी आधुनिक धर्मशालाओं की सुविधा
राजस्थान सरकार के देवस्थान विभाग ने प्रदेशभर में तीर्थ यात्रियों के लिए अत्याधुनिक धर्मशालाओं के निर्माण की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को देवस्थान मंत्री श्री जोराराम कुमावत की अध्यक्षता में हुई विभागीय समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया कि प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर बीओटी (Build-Operate-Transfer) मॉडल के तहत नई धर्मशालाएं बनाई जाएंगी।
यह निर्णय ना केवल श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं प्रदान करेगा, बल्कि राज्य के धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा देगा।
📌 बैठक के प्रमुख निर्णय:
🏨 1. धर्मशालाओं का बीओटी मॉडल पर निर्माण
- बीओटी मॉडल के तहत निजी निवेशकों की भागीदारी से धर्मशालाओं का निर्माण किया जाएगा।
- इसके तहत निर्माण, संचालन और ट्रांसफर की प्रक्रिया पारदर्शी ढंग से तय की जाएगी।
🏗️ 2. पुरानी धर्मशालाओं में सुविधाओं का विस्तार
- पहले से संचालित धर्मशालाओं में साफ-सफाई, फर्नीचर, सुरक्षा, बिजली, पानी व डिजिटल बुकिंग जैसी सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी।
💸 3. धर्मशाला किराया नीति में संशोधन
- पुरानी दरों की समीक्षा करते हुए वाजिब किराया तय किया जाएगा, जिससे संचालन भी सशक्त हो और श्रद्धालुओं पर भी अतिरिक्त भार न पड़े।
🎫 वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना में रिकॉर्ड आवेदन
देवस्थान मंत्री ने बताया कि वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना 2025 के अंतर्गत इस वर्ष 1,84,495 ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हुए हैं। अब जिला स्तर पर गठित कमेटियों द्वारा लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से पात्र लोगों का चयन किया जाएगा। लॉटरी अगले सप्ताह आयोजित होगी।
📋 चार नई नीतियों पर मंथन:
बैठक में देवस्थान विभाग की निम्नलिखित नीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई:
- दान नीति – मंदिरों को मिलने वाले दान का पारदर्शी उपयोग
- धार्मिक आयोजन नीति – मंदिरों में नियमित आयोजनों की समुचित व्यवस्था
- सह संचालन नीति – मंदिर प्रबंधन में समाज की भागीदारी
- किराया नीति – विभागीय भवनों और परिसरों का वाजिब किराया निर्धारण
🌐 मंदिरों की भूमि का डिजिटल डेटा और ई-नीलामी की योजना
देवस्थान विभाग अब मंदिरों की कृषि योग्य भूमि को ई-ऑक्शन के जरिए लीज पर देने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा:
- मंदिरों की सभी संपत्तियों का ऑनलाइन डेटा संधारण अनिवार्य किया जाएगा।
- गोगामेड़ी मंदिर के पुजारियों को दी गई आवासीय भूमि के निरस्तीकरण पर विचार किया गया।
- ऋषभदेव मंदिर की आरती को ऑनलाइन लाइव किए जाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
🏛️ मंदिरों की मरम्मत कार्य के लिए डीपीआर बनाने के निर्देश
मंत्री श्री कुमावत ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रदेश और अन्य राज्यों में स्थित राजस्थान सरकार के अधीन मंदिरों की मरम्मत और संरक्षण कार्यों के लिए इसी माह डीपीआर (Detail Project Report) तैयार की जाए। इससे ऐतिहासिक मंदिरों को संरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
🧾 बैठक में मौजूद रहे शीर्ष अधिकारी:
- श्री के.के. पाठक, शासन सचिव
- श्री कन्हैयालाल स्वामी, आयुक्त, देवस्थान विभाग
- श्री आलोक सैनी, उप शासन सचिव
- श्री अशोक शर्मा, अतिरिक्त आयुक्त
- अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं विशेषज्ञ
🧘 धार्मिक पर्यटन का विस्तार: तीर्थ स्थलों पर आधुनिकता और परंपरा का समन्वय
राजस्थान सरकार का यह निर्णय न केवल श्रद्धालुओं की सुविधा के लिहाज से अहम है, बल्कि यह धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। राज्य के प्रमुख मंदिरों पर आधुनिक धर्मशालाएं बनने से पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को रुकने की उत्तम व्यवस्था मिलेगी।
देवस्थान विभाग की यह पहल आस्था और आधुनिकता के संतुलन का बेहतरीन उदाहरण है। बीओटी मॉडल के तहत धर्मशालाओं का निर्माण, नीति सुधार और तीर्थ यात्रियों की सुविधा बढ़ाने की दिशा में यह एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम है। आने वाले समय में राजस्थान न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र रहेगा, बल्कि धार्मिक पर्यटन में देश का अग्रणी राज्य बनने की दिशा में तेज़ी से अग्रसर होगा।













