रानी में भगवान महावीर जन्मोत्सव पर निकाली गई भव्य शोभा यात्रा

- रानी
भगवान महावीर स्वामी के जन्मोत्सव के पावन अवसर पर रानी जैन संघ एवं जैन युवा मंडल के संयुक्त तत्वावधान में एक भव्य शोभा यात्रा का आयोजन किया गया।
यह आयोजन पूज्य साधु-साध्वियों के पावन सान्निध्य में अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ।
शोभा यात्रा की शुरुआत रानी के अंहिसा सर्कल से हुई, जो मेन बाजार, शीतला चौक, धोको का बास होते हुए जैन धर्मशाला पर जाकर संपन्न हुई। यात्रा मार्ग को धार्मिक झांकियों, रंगोली, तोरण द्वारों तथा फूलों से सजाया गया था, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक उल्लास से भर उठा।

भगवान महावीर की भव्य पालकी को सुंदर पुष्पों से सजाया गया था, जिसमें श्रीजी की प्रतिमा को पूरे सम्मान के साथ विराजमान किया गया। बैंड-बाजों की मधुर धुनों और धार्मिक गीतों के बीच शोभा यात्रा आगे बढ़ी। श्रद्धालु जैन समाज के पुरुष, महिलाएं और युवा जयकारों के साथ नाचते-गाते भगवान महावीर के आदर्शों का प्रचार करते हुए आगे बढ़ते रहे।
इस अवसर पर रानी जैन संघ एवं जैन युवा मंडल के पदाधिकारीगण, गणमान्य नागरिक एवं समाज बंधुओं की उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे:
नवरत्न सी. मेहता, रानी चेयरमेन भरत राठौड़, चंदूलाल जैन, राजकुमार राठौड़, प्रकाश मेहता, प्रवीण जैन, उत्तम जैन, प्रवीण आर. जैन, जयन्तिलाल जैन, अशोक मेहता, हरीश सुराना, सुमेरमल सेमलानी, भरत बौराना, राजू भाई, डॉ. मेहता, नथमल गांधी, नगराज मेहता, राजू जसवंत जैन, भावेश धोका, सुरेन्द्र जैन, मुकेश राठौड़, कुशलराज जैन, सुमीत जैन, रोशन धोका, राकेश राठौड़, महावीर जैन, रवि धोका, विनोद राठौड़, पोपटलाल जैन, कुशल जैन, मनीष जैन, अनिल जैन, सचिन जैन, भरत गांधी, हेमंत धोका, नितिन धोका, हसमुख जैन, मयंक राठौड़, पन्नालाल जैन, रौनक जैन, श्रवण जैन, जितेंद्र कुमार, वैभव धोका, पक्षाल जैन, पालिका उपाध्यक्ष डालचंद चौहान, राघव प्रसाद पांडे, नितिन राठौड़, कल्पेश जैन तथा अन्य समाज बंधु।
शोभा यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी भाग लिया। वे पारंपरिक परिधानों में सज-धजकर भगवान महावीर के जयघोष के साथ उत्साहपूर्वक चल रही थीं, जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया। कार्यक्रम का उद्देश्य भगवान महावीर के अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह जैसे आदर्शों का प्रचार-प्रसार करना रहा, जिसे उपस्थित जनसमूह ने हृदय से आत्मसात किया। इस शोभायात्रा ने न केवल जैन समाज को एकत्रित किया, बल्कि पूरे नगर को आध्यात्मिकता से जोड़ दिया। आयोजन को सफल बनाने में सभी समाजबंधुओं और कार्यकर्ताओं का योगदान सराहनीय रहा।












