विधायक ने बुजुर्ग की हथेली पर लिखकर दिया पुलिया निर्माण का वचन, चर्चा में “हथेली वाला एग्रीमेंट”

रिपोर्टर: Narendra Kumar Regar
भीलवाड़ा जिले की जहाजपुर विधानसभा क्षेत्र में राजनीति का एक अलग ही दृश्य देखने को मिला। यहां भाजपा विधायक गोपीचंद मीणा ने एक बुजुर्ग फरियादी को सामान्य कागजी आश्वासन देने के बजाय उसकी हथेली पर लिखकर पुलिया निर्माण का वचन दिया। यह अनोखा अंदाज अब पूरे जिले और प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है।
मंच पर बुजुर्ग की खरी बात
मामला जहाजपुर के कांटी क्षेत्र का है। विधायक गोपीचंद मीणा करोड़ों रुपये के विकास कार्यों के लोकार्पण कार्यक्रम में पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान मंच पर पहुंचे बुजुर्ग रामेश्वर लाल सेन ने कांटी-घेवरिया नाले पर पुलिया निर्माण की मांग उठाई।
बुजुर्ग ने कहा कि यह मांग वर्षों से लंबित है। कई बार जनप्रतिनिधियों से आश्वासन मिला, लेकिन काम आज तक शुरू नहीं हुआ। जब विधायक ने पुलिया बनवाने का भरोसा दिलाया तो बुजुर्ग ने मंच पर ही स्पष्ट कहा,
“साहब, आश्वासन तो सब देते हैं, काम कोई नहीं करता।”
हथेली पर लिखा वचन
बुजुर्ग की बात को विधायक ने गंभीरता से लिया। उन्होंने तुरंत जेब से पेन निकाला और बुजुर्ग की हथेली पर लिख दिया कि एक वर्ष के भीतर पुलिया निर्माण कार्य पूरा कर दिया जाएगा। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए भी हैरानी भरा था।
लोगों ने इसे भरोसे का प्रतीक बताया। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि यह एक राजनीतिक स्टाइल भी हो सकता है। फिलहाल “हथेली वाला एग्रीमेंट” क्षेत्र में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
ऊंट की सवारी और जेसीबी से पुष्पवर्षा
कार्यक्रम में विधायक का स्वागत भी खास अंदाज में किया गया। ग्रामीणों ने उन्हें ऊंट पर बैठाकर सभा स्थल तक पहुंचाया। चार जेसीबी मशीनों से फूलों की वर्षा कर अभिनंदन किया गया। इस दौरान उन्हें गदा भी भेंट की गई।
पूर्व विधायक पर लगाए आरोप
मंच से संबोधन के दौरान विधायक गोपीचंद मीणा ने पूर्व विधायक धीरज गुर्जर पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व विधायक ने अपने कार्यकाल में जनता के मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया और समय राजनीतिक गतिविधियों व मुकदमों में व्यतीत किया।
विधायक ने दावा किया कि सांकड़ा पंचायत में 5 करोड़ रुपये के विकास कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इन कार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण भाजपा सरकार में ही किया जाएगा।
अब जनता की नजरें वादे पर
विधायक का यह अनोखा वादा अब चर्चा में है। समर्थक इसे जनविश्वास की मिसाल बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे प्रतीकात्मक राजनीति मान रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि क्या कांटी-घेवरिया नाले पर पुलिया वास्तव में एक वर्ष में बनकर तैयार होगी या यह वादा भी समय के साथ भूल जाएगा। क्षेत्र की जनता अब इस “हथेली वाले वचन” की वास्तविकता देखने के इंतजार में है।













