सरकार कई वर्षों से लंबित राष्ट्रीय खुदरा व्यापार नीति ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी में

वर्षों का इंतजार करवाने के बाद व्यापारियों के साथ हो रहा है धोखा: शंकर ठक्कर
कॉन्फडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय मंत्री एवं अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकर ठक्कर ने बताया व्यापारियों को कई वर्षों तक इंतजार करवाने बाद शत्रु से मिली जानकारी के अनुसार सरकार लंबे समय से लंबित राष्ट्रीय खुदरा व्यापार नीति पर आगे बढ़ने का विचार त्याग सकती है। सरकार ने तर्क दिया है कि खुदरा विक्रेताओं की जरूरतों और उनके कल्याण के लिए कदम उठा रही है।
वरिष्ठ सरकारी अधिकारी
‘कई कदम उठाए गए हैं। ओएनडीसी (डिजिटल कॉमर्स के लिए खुला नेटवर्क) उनमें से एक है। एक राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड है और हम उनके साथ विस्तार से बातचीत करते रहते हैं। इसलिए समय-समय पर कई कदम उठाए गए हैं और सरकार नियमित रूप से खुदरा विक्रेताओं के मुद्दों का ध्यान रखती रही है।’
शंकर ठक्कर ने आगे कहा औद्योगिक संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) ने 4 साल पहले राष्ट्रीय खुदरा व्यापार नीति का मसौदा तैयार किया था। कैट मांग पर इसमें अनुपालन का बोझ कम करने, ऋण तक पहुंच बढ़ाने और छोटी चूक को आपराधिक कानून से निकालने सहित कारोबार सुगमता को प्रोत्साहन देने पर ध्यान केंद्रित किया गया था। मसौदे में लाइसेंस की जरूरत का आकलन, जांच संबंधी सुधार, एकल खिड़की सुविधा बनाने के साथ अन्य मसलों पर जोर दिया गया था। अब सरकार द्वारा इसको ठंडे बस्ते में डालने से व्यापारियों के साथ अन्याय होगा जिससे व्यापारी अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।
कैट के राष्ट्रीय मंत्री एवं दिल्ली चांदनी चौक से भाजपा सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि भारत को खुदरा व्यापार नीति बनाने की जरूरत है, क्योंकि इससे देश के 8 करोड़ से ज्यादा छोटे कारोबारियों को ताकत मिलेगी।












