सरस्वती विद्या मंदिर, सादड़ी में धूमधाम से मनाया गया रक्षाबंधन पर्व

रक्षाबंधन के पर्व पर सरस्वती विद्या मंदिर सादड़ी में सांस्कृतिक उल्लास का अद्भुत नजारा
सादड़ी स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में रक्षाबंधन पर्व 2025 को सांस्कृतिक गरिमा, भक्ति और उत्साह के साथ बड़े ही हर्षोल्लास से मनाया गया। विद्यालय परिसर में भाई-बहन के प्रेम और भारतीय संस्कृति की झलक देखने को मिली।
दीप प्रज्वलन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत जिला सचिव श्री सुरेश कुमार मालवीय एवं जिला समिति सदस्य व पूर्व व्यवस्थापक श्री दिनेश त्रिवेदी द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुई।
प्रधानाचार्य श्री मनोहरलाल सोलंकी ने मंचासीन अतिथियों का स्वागत करते हुए उनके परिचय के साथ कार्यक्रम को आगे बढ़ाया।
रक्षाबंधन की पौराणिक पृष्ठभूमि पर परिचर्चा
श्रीमती अरुणा जी ने कार्यक्रम की प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए रक्षाबंधन की पौराणिक कथा साझा की। उन्होंने बताया कि माता लक्ष्मी ने राक्षसराज बलि को राखी बांधकर भगवान विष्णु को मुक्त कराया था, तभी से यह पर्व भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक बन गया।

विविध प्रतियोगिताओं से बच्चों में जोश का संचार
इस पावन अवसर पर विद्यालय में विभिन्न रचनात्मक और सांस्कृतिक गतिविधियाँ आयोजित की गईं:
रक्षा सूत्र निर्माण प्रतियोगिता: बहन मनीषा कैलाश ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।
रक्षा सूत्र बांधने की स्पर्धा: भैया जयेश, बहन दीक्षिता माली और शिवानी राव को प्रथम स्थान मिला।
जलेबी कूद प्रतियोगिता: श्याम प्रजापत ने प्रथम स्थान प्राप्त कर सबका ध्यान खींचा।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
विद्यालय के विद्यार्थियों ने रक्षाबंधन के अवसर पर गीत, कविताएं एवं नृत्य प्रस्तुतियां दीं, जिनमें भाई-बहन के प्रेम और भारतीय संस्कृति की झलक देखने को मिली:
- भैया दर्शन हरी, और बहनें एंजेल, दिव्या माली, प्रिया ने रक्षाबंधन पर सुंदर कविताएं प्रस्तुत कीं।
- कक्षा चतुर्थ की निवेदिता समूह ने मधुर गीत प्रस्तुत कर सबको मंत्रमुग्ध किया।
- सपना चौधरी ने गीत “राखी के धागों ने बांधे एक बंधन में सारे” पर भावपूर्ण प्रस्तुति दी।
- बहन प्रिया की कविता “राखी आई, खुशियाँ आई” ने सबको भावविभोर कर दिया।
भाई-बहन के पवित्र बंधन की सजीव अभिव्यक्ति
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने छात्रों की कलाई पर राखियाँ बांधी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। छात्रों ने उपहार देकर बहनों की रक्षा का वचन दिया। यह आयोजन भारतीय संस्कृति, भाईचारे, प्रेम और सौहार्द को बच्चों के मन में दृढ़ता से स्थापित करने वाला सिद्ध हुआ।
प्रेरणादायक उद्बोधन व बोध कथा से मिला संदेश
श्री दिनेश त्रिवेदी ने अपने प्रेरणादायी भाषण में कहा कि
“रक्षाबंधन केवल भाई-बहन का पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और आत्मीयता का भी प्रतीक है।”
उन्होंने विद्यार्थियों को अच्छे परीक्षा परिणाम लाने का संकल्प दिलाया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
वहीं बहन लारा उपाध्याय ने इंद्राणी द्वारा इंद्र को राखी बांधने की बोध कथा सुनाकर मंच संचालन किया, जो सभी के लिए अत्यंत प्रेरणादायक रहा।
शांति मंत्र के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम का समापन शांति मंत्र के उच्चारण के साथ किया गया, जिससे वातावरण में शुभता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ।
सरस्वती विद्या मंदिर, सादड़ी में आयोजित रक्षाबंधन उत्सव नैतिक मूल्यों, भारतीय परंपरा, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम रहा। बच्चों ने न केवल रचनात्मक रूप से भाग लिया, बल्कि भाई-बहन के प्रेम को सजीव रूप में अनुभव किया।












