44 वर्ष बाद गुरु और श्रावक का चमत्कारिक मिलन

सादड़ी। परम पूज्य पंजाब केसरी जनाचार्य श्रीमद विजय वल्लभ सूरी जी महाराज साहब की परंपरा के आचार्य, परम पूज्य परमार जनाचार्य श्रीमद विजय इंद्रदिन सूरीश्वरजी महाराज साहब का ससंघ सादड़ी में आगमन हुआ। इस अवसर पर एक ऐसा भावुक प्रसंग घटित हुआ, जिसने सभी को चकित कर दिया।
सन 1981 में शिरोमणि संघ सादड़ी में आचार्य श्री के सान्निध्य में भव्य चातुर्मास हुआ था। उस समय आचार्य श्री के साथ 18 साधु भगवंत और 35 से अधिक साध्वी माताएं उपस्थित थीं। चातुर्मास की व्यवस्था में आचार्य श्री जगचंद्रसूरी महाराज साहब के ज्येष्ठ शिष्य उपाध्याय श्री योगेंद्र विजयजी महाराज साहब भी सक्रिय थे।
उसी चातुर्मास में सादड़ी के श्रावक श्री मांगीलालजी जैन (जोधावत) का मुनिराजों से विशेष स्नेह संबंध था। उनके पुत्र डॉ. महेंद्र जैन (जोधावत) को उस समय आहार (वेराना) लेकर आचार्य श्री के पास भेजा जाता था। उस दौरान डॉ. महेंद्र का भी आचार्य श्री से आत्मीय संबंध बना।
लेकिन समय के साथ डॉ. महेंद्र मुंबई प्रवास पर चले गए और आचार्य श्री का विहार अन्य स्थानों की ओर हो गया। इस कारण लम्बे समय तक उनका मिलन नहीं हो पाया।
आज, 44 वर्ष बाद
आज अचानक एक चमत्कारिक संयोग बना, जब डॉ. महेंद्र जैन का सादड़ी आगमन हुआ और उनका परम पूज्य आचार्य श्री विजय इंद्रदिन सूरीश्वरजी महाराज साहब से अप्रत्याशित मिलन हुआ।
जैसे ही आचार्य श्री ने “मांगीलालजी” का नाम सुना, उन्होंने तुरंत डॉ. महेंद्र को पहचान लिया। इतना ही नहीं, आचार्य श्री ने उन्हें 44 वर्ष पूर्व का वह पुराना फोटो भी दिखाया, जिसमें डॉ. महेंद्र मात्र 18 वर्ष के थे।
डॉ. महेंद्र स्वयं भी यह देखकर आश्चर्यचकित रह गए कि इतने वर्षों बाद भी गुरु महाराज ने न केवल नाम पहचाना, बल्कि पुराने समय की स्मृतियों को जीवित कर दिया।















