गोड़वाड़ जैन समाज: शिक्षा को बनाएं सर्वोच्च प्राथमिकता – मानकचंद राठौड़ का आह्वान

मुंबई/गोड़वाड़। “शिक्षा किसी भी समाज की रीढ़ होती है और गोड़वाड़ जैन समाज को अब इस दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।” — यह कहना है समाजसेवी एवं उद्यमी मानकचंद राठौड़ (ढालोप, मुंबई) का, जिन्होंने गोड़वाड़ जैन समाज के छात्रों के लिए शिक्षा के क्षेत्र में गंभीर चिंतन और कार्य की आवश्यकता पर बल दिया है।
मानकचंद राठौड़, OSWAL UDHYOG (INDIA) Pvt. Ltd के प्रतिनिधि के रूप में, लंबे समय से सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे हैं। हाल ही में उन्होंने 10वीं कक्षा के बाद पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए ₹10,000/- की शैक्षिक सहायता की घोषणा की, जिसे समाज में सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई।
“समाज की नींव मजबूत करनी है, तो छात्रों की शिक्षा को देना होगा पहला स्थान”
उन्होंने कहा कि आज गोड़वाड़ जैन समाज की संस्थाओं का प्राथमिक कर्तव्य होना चाहिए— अपने विद्यार्थियों को शैक्षिक रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना। कई होनहार छात्र केवल आर्थिक कठिनाइयों के कारण अपनी पढ़ाई अधूरी छोड़ देते हैं, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया, “जैसे एक तीर्थ निर्माण के लिए ₹100 करोड़ का कोष समाज से सहजता से इकट्ठा हो जाता है, वैसे ही शिक्षा के क्षेत्र में भी यदि उचित योजना और दानदाताओं के सम्मान का ध्यान रखा जाए, तो यह कार्य भी सफल हो सकता है।”

मानकचंद राठौड़ द्वारा सुझाए गए प्रमुख सुझाव
- स्कॉलरशिप योजनाओं का विस्तार: जिससे हर जरूरतमंद छात्र को उचित सहायता मिल सके।
- मेधावी छात्रों के लिए विशेष योजनाएं: केवल आर्थिक आधार नहीं, बल्कि प्रतिस्पर्धात्मक स्तर को ध्यान में रखते हुए।
- कमजोर वर्ग को सीधी आर्थिक सहायता: फीस, किताबें, स्टेशनरी आदि की पूर्ति हेतु।
- मध्यमवर्गीय छात्रों के लिए कम ब्याज पर शिक्षा ऋण: जिससे उच्च शिक्षा एक सपना न रह जाए।
“संस्थाएं हमारी मां हैं, बच्चों की जिम्मेदारी उठाएं”
मानकचंद राठौड़ ने भावुक अपील करते हुए कहा, “संस्थाएं हमारे समाज की मां के समान हैं। यदि वे अपने बच्चों – यानी छात्रों – की चिंता नहीं करेंगी, तो समाज की नींव कमजोर पड़ जाएगी।”
उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा केवल व्यक्तिगत उन्नति का मार्ग नहीं, बल्कि पूरे समाज की प्रगति की कुंजी है। “एक पेड़ की जड़ें मजबूत होंगी, तभी उसकी शाखाएँ फल-फूल सकेंगी। हमारे छात्र ही हमारे समाज की जड़ें हैं। उन्हें सींचना हमारी जिम्मेदारी है।”
समाज को जागरूक करने का संकल्प
राठौड़ ने समस्त गोड़वाड़ जैन समाज से अपील की है कि वे इस संदेश को समाज के कोने-कोने तक पहुँचाएं। “पहले अपनों का ध्यान रखें, फिर दुनिया की ओर देखें”— यह सोच हर संस्था और हर समाजसेवी में होनी चाहिए।
उन्होंने अंत में कहा:
“जब से जागो, तभी से सवेरा। अब शिक्षा को समाज की सबसे बड़ी सेवा बनाएं और अपने बच्चों को शिक्षित, सशक्त और स्वावलंबी बनाएं।”
संदेश का आह्वान
"जागरूकता फैलाएं, समाज बदलें!"
यह संदेश सभी गोड़वाड़ जैन समाज से जुड़े ग्राम, शहर और सामाजिक ग्रुप्स में साझा करें। आपका एक फॉरवर्ड भविष्य की दिशा बदल सकता है।













