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त्याग, समर्पण और नई परंपरा की मिसाल: दिनेश वैष्णव ‘देसूरी’ ने समाज सेवा में रचा अनुकरणीय इतिहास

विक्रम बी राठौड़
रिपोर्टर

विक्रम बी राठौड़, रिपोर्टर - बाली / मुंबई 

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समाज सेवा विशेष

समाज में नई चेतना लानी है तो कार्यकाल पूरा होते ही त्यागपत्र देना चाहिए, न कि कुर्सी से चिपके रहना

📍 देसूरी
🏛️ वैष्णव सेवा संस्था
🌿 नालासोपारा–वसई–विरार (पालघर)
दिनेश वैष्णव ‘देसूरी’ का पद त्याग केवल एक औपचारिक निवृत्ति नहीं है, बल्कि समाज सेवा के क्षेत्र में एक नई चेतना, स्वस्थ परंपरा और आदर्श मूल्यों का सशक्त संदेश है। “वैष्णव सेवा संस्था नालासोपारा वसई विरार (पालघर)” के माध्यम से उन्होंने जो उदाहरण प्रस्तुत किया है, वह आज के समय में अत्यंत प्रेरणादायी और अनुकरणीय है।
किसी भी संस्था में पद प्राप्त करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है, लेकिन उस पद पर रहते हुए निस्वार्थ भाव से सेवा करना और कार्यकाल पूर्ण होने पर स्वेच्छा से उसे त्याग देना, यह महानता और उच्च चरित्र का परिचायक होता है। दिनेश वैष्णव ‘देसूरी’ जी ने वैष्णव सेवा संस्था से निवृत्ति लेकर समाज के समक्ष ‘त्याग और समर्पण’ की एक अनुपम मिसाल प्रस्तुत की है।
अक्सर देखा जाता है कि लोग संस्थाओं में पदों से चिपके रहते हैं, जिससे नए विचारों और युवा ऊर्जा को अवसर नहीं मिल पाता। दिनेश जी ने अपने कार्यकाल को पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाया और समय आने पर स्वयं पद छोड़कर यह सिद्ध कर दिया कि
“पद सेवा का माध्यम है, प्रतिष्ठा का नहीं।”
उनका यह कदम दर्शाता है कि एक सच्चा समाजसेवी वही है जो अपनी उपलब्धियों के बाद मार्गदर्शक की भूमिका में आकर दूसरों को आगे बढ़ने का अवसर देता है।
एक स्वस्थ और सशक्त संगठन वही होता है जहाँ नेतृत्व परिवर्तन सहज और स्वाभाविक रूप से हो। दिनेश वैष्णव जी द्वारा नई ऊर्जा और नए कार्यकर्ताओं को पदभार सौंपना संस्था के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में उठाया गया दूरदर्शी कदम है। इससे न केवल संस्था में नया उत्साह और गति आती है, बल्कि कार्यकर्ताओं में यह विश्वास भी प्रबल होता है कि मेहनत, निष्ठा और समर्पण को उचित सम्मान मिलता है।
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उनका यह निर्णय उन सभी सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं के लिए एक बड़ी सीख है, जहाँ वर्षों तक एक ही नेतृत्व बना रहता है। दिनेश जी के इस कदम से समाज को यह संदेश मिलता है कि समय पर जिम्मेदारी सौंपना संस्था को दीर्घायु बनाता है, पद छोड़ना अहंकार के अभाव और मानसिक दृढ़ता का प्रतीक है तथा निवृत्ति का अर्थ सेवा का अंत नहीं, बल्कि एक अनुभवी मार्गदर्शक के रूप में नई भूमिका की शुरुआत है।

© समाज सेवा एवं विचार विशेष
त्याग • समर्पण • समाज सेवा

न्यूज़ डेस्क

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