बाली में पंचाहिक महोत्सव का भव्य आयोजन, आचार्य विजय रत्नसेन सूरीश्वर जी के जीवन के 50वें वर्ष पर गूंजा गुरू गुण गौरव

गोङवाड़ की पावन धरती बाली में पंचाहिक महोत्सव का भव्य आयोजन
गोङवाड़ की पावन धरती बाली नगर में प्रथम आचार्य, विश्व विख्यात परम पूज्य आचार्य भगवंत श्री विजय रत्नसेन सूरीश्वर जी (राजु महाराज) के जीवन के 50वें वर्ष में प्रवेश के शुभ अवसर पर पंचाहिक महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर न्याति नोहरा में “गुरु गुण गौरव गाथा” कार्यक्रम का आयोजन हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 9:30 बजे हुई, जिसमें आचार्य गुरुभगवंत द्वारा लिखित 264वीं पुस्तक “जीवन प्रसंग” का विमोचन किया गया। पुस्तक का विमोचन बाबुभाई मंडलेसा, सज्जनराज जी रांका, किरण जी चोपड़ा, भरतभाई कोठारी, अशोक भाई पारेख, ललितभाई राठौड़, किशोरभाई राठौड़ सहित अनेक गणमान्य अतिथियों के करकमलों से सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर बालमुनि पूज्य विजयजी द्वारा आचार्य गुरुभगवंत की 1 से 264 तक की समस्त पुस्तकों के नाम बिना रुके, बिना पढ़े, क्रमबद्ध रूप से उच्चारित कर इतिहास रचा गया। स्वयं आचार्य भगवंत ने कहा कि उन्होंने तो पुस्तकें लिखी हैं, लेकिन उन्हें भी सभी 264 पुस्तकों के नाम याद नहीं हैं।
इस अवसर पर भव्य लाभार्थी परिवारों का सम्मान किया गया। दोपहर के समय आचार्य गुरुभगवंत का पगल्या खांडीओ की बास एवं सादों की बास स्थित गुरुभक्तों के निवास पर हुआ।
सायं 7:00 बजे आचार्य भगवंत के जीवन पर आधारित भव्य नृत्य-नाटिका का मंचन किया गया। इसमें उनके बचपन, विद्यालय जीवन, मित्रों के साथ बिताए क्षणों से लेकर दीक्षा ग्रहण करने तक की जीवन यात्रा को अत्यंत भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया। यह प्रस्तुति अहमदाबाद से पधारे कलाकारों द्वारा दी गई।
ठंड के प्रचंड प्रकोप के बावजूद पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भक्ति और नृत्य की धुनों पर झूमते नजर आए। पूरे वातावरण में भक्ति, श्रद्धा और उत्साह का अनुपम संगम देखने को मिला।














