पाली–जालौर–सिरोही का ऐतिहासिक संगम 21 फरवरी को!

पाली–जालौर–सिरोही का ऐतिहासिक संगम 21 फरवरी को!
कांबेश्वर महादेव मंदिर में गूंजेंगी शहनाइयाँ, 13 जोड़े बंधेंगे परिणय सूत्र में
आयोजन: 11वां आदर्श सामूहिक विवाह सम्मेलन
सामाजिक एकता, संस्कार और सहयोग की मिसाल बनने जा रहा है 21 फरवरी का दिन। श्री दक्ष प्रजापति कुमावत विकास सेवा संस्थान के तत्वावधान में 11वां आदर्श सामूहिक विवाह सम्मेलन ऐतिहासिक भव्यता के साथ आयोजित होगा। आयोजन स्थल कांबेश्वर महादेव मंदिर स्थित कुमावत धर्मशाला प्रांगण को पुष्प सज्जा, रंग-बिरंगी रोशनी, भव्य तोरण द्वार और आकर्षक मंच से सजाया जा रहा है।
13 नवयुगलों का पावन परिणय, तीन जिलों का संगम
पाली, जालौर और सिरोही जिलों के कुमावत समाज का यह बहुप्रतीक्षित सम्मेलन सामाजिक समरसता का विराट प्रतीक बनेगा। वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच 13 जोड़े परिणय सूत्र में बंधेंगे और मंदिर परिसर शहनाइयों की मधुर ध्वनि से गूंज उठेगा।
मांगलिक कार्यक्रमों की दिव्य श्रृंखला
संस्थान अध्यक्ष चंपालाल चांदोरा के सानिध्य में तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं। अलग-अलग समितियाँ गठन कर व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित किया गया है।
- 🕕 6:15 बजे — गणेश स्थापना
- 🕡 6:30 बजे — वर-वधु आगमन
- 🕗 8:00 बजे — स्वागत तोरण
- 🕣 8:15 बजे — हस्तमिलाप
- 🕥 10:15 बजे — प्रतिभोज
- 🕚 11:00 बजे — अतिथि एवं भामाशाह सम्मान
- 🕑 2:15 बजे — आशीर्वाद समारोह
- 🕓 4:15 बजे — विदाई
दिनभर धार्मिक उल्लास, पारिवारिक भावनाओं और सामाजिक समरसता का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।
विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
समारोह में राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। साथ ही कालूराम कुम्हार (एसडीएम सुमेरपुर) सहित विभिन्न जिलों के समाजसेवी, ट्रस्ट पदाधिकारी और गणमान्य अतिथि कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे।
भामाशाहों का सराहनीय योगदान
सम्मेलन की सफलता में समाज के भामाशाहों का विशेष योगदान रहा है। कन्यादान से लेकर भोजन, सजावट और अन्य व्यवस्थाओं में दानदाताओं ने खुलकर सहयोग दिया है। इससे जरूरतमंद परिवारों को सम्मानपूर्वक विवाह संस्कार सम्पन्न कराने का अवसर मिल रहा है।
महंगाई के दौर में मिसाल
आज के दौर में विवाह आयोजन कई परिवारों के लिए आर्थिक चुनौती बन गया है। ऐसे समय में यह सामूहिक विवाह सम्मेलन समाज के लिए संबल और प्रेरणा दोनों है। यह आयोजन न केवल 13 नवयुगलों के जीवन की नई शुरुआत का साक्षी बनेगा, बल्कि एकता, सहयोग और संस्कारों की परंपरा को भी सशक्त करेगा।
पाली, जालौर और सिरोही का ऐतिहासिक मिलन इस महापर्व को अविस्मरणीय बनाने जा रहा है!













