


दीवार में ‘दफन’ बिजली का खंभा बना सियासी करंट!
35 साल पुराना पोल, एक माह से ठप कार्रवाई — सिस्टम पर बड़ा सवाल
सुमेरपुर क्षेत्र के पोयणा गांव की रावला गली में खड़ा करीब 35 साल पुराना बिजली का खंभा अब सिर्फ लोहे का ढांचा नहीं, बल्कि सियासी ‘करंट’ का केंद्र बन चुका है। मकान निर्माण के दौरान इसे दीवार में चुनवा दिया गया, और पिछले एक महीने से प्रशासनिक तंत्र मूकदर्शक बना हुआ है।

ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद न तो खंभा हटाया गया और न ही जिम्मेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई हुई। विभाग और ग्राम पंचायत बामनेरा एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं, जबकि गली में खतरा जस का तस खड़ा है।
दीवार में दफन, गली में खतरा!
- दीवार में जकड़ा खंभा करंट फैलने का बड़ा जोखिम बन चुका है।
- बारिश या नमी में शॉर्ट सर्किट और आगजनी का खतरा बढ़ सकता है।
- आपात स्थिति में लाइनमैन की पहुंच लगभग असंभव है।
सवाल सीधा है — क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन जागेगा?
विभाग–पंचायत आमने-सामने, जनता परेशान
- विद्युत विभाग इसे पंचायत क्षेत्राधिकार का मामला बता रहा है।
- पंचायत प्रशासन इसे बिजली विभाग की जिम्मेदारी कहकर पल्ला झाड़ रहा है।
- इस खींचतान में 30 दिन निकल गए, लेकिन खंभा वहीं का वहीं है।
ग्रामीणों का कहना है कि न नोटिस का जवाब सार्वजनिक हुआ और न कार्रवाई का कोई प्रमाण सामने आया।
जवाबदेही से बचता तंत्र?
करीब एक महीने से खंभा नहीं हटाया जाना विभागीय सक्रियता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है।
- क्या नियम सिर्फ कागजों तक सीमित हैं?
- क्या जनसुरक्षा से ज्यादा अहम है जिम्मेदारी से बचना?
पोयणा की यह गली अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन चुकी है। लोग पूछ रहे हैं — जब एक खंभा नहीं हट पा रहा, तो बड़े मसलों पर प्रशासन क्या करेगा?
आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे उच्चाधिकारियों तक शिकायत ले जाएंगे और आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। उनका कहना है कि यह केवल एक पोल का मामला नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही की अग्निपरीक्षा है।
⚡ अब देखना यह है — क्या प्रशासन इस ‘करंट’ को शांत करेगा, या यह खंभा यूं ही सियासी ताप बढ़ाता रहेगा?
फिलहाल खंभा दीवार में दफन है — और उसके साथ खड़े हैं सवाल, गुस्सा और इंतजार…











