मीरा रोड अग्निकांड: हादसा नहीं, सिस्टम की लापरवाही की तस्वीर! जिम्मेदार कौन और कार्रवाई कब

- बाली / भायंदर
मीरा रोड के काशीमीरा क्षेत्र में अवैध फर्नीचर और मंडप डेकोरेशन गोदाम में लगी भीषण आग ने एक बार फिर मीरा-भाईंदर महानगरपालिका (MBMC) की ढीली कार्यप्रणाली और प्रशासनिक उदासीनता को बेनकाब कर दिया है, 24 मार्च की रात लगी इस आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया और आसपास की इमारतों के 25 से 30 फ्लैटों को चपेट में ले लिया, गनीमत रही कि कोई जनहानि नहीं हुई लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अगर पहले से शिकायतें थीं,और अवैध गोदामों की जानकारी प्रशासन को थी तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं हुई, क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा था, क्या अवैध धंधों को किसी का संरक्षण प्राप्त है, स्थानीय नागरिक वर्षों से ऐसे खतरनाक गोदामों के खिलाफ आवाज उठाते रहे लेकिन हर बार फाइलें ही जलती रही और कार्रवाई ठंडे बस्ते में जाती रही।

आग बुझाने के लिए 10 दमकल गाड़ियों और पूरी रात चले ऑपरेशन ने यह साबित कर दिया कि खतरा कितना बड़ा था, लेकिन असली आग तो सिस्टम की लापरवाही में जल रही है, हादसे के बाद नेताओं के दौरे, नोटिस और जांच के आदेश अब केवल औपचारिकता नजर आते हैं क्योंकि सवाल सीधा है अगर समय रहते कार्रवाई होती तो क्या यह आग लगती, यह घटना साफ संकेत है कि मीरा-भाईंदर में अवैध गोदाम और फायर सेफ्टी नियमों की धज्जियां उड़ाना आम बात बन चुकी है और जब तक जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई, अवैध गोदामों पर बुलडोजर और भ्रष्ट संरक्षण पर रोक नहीं लगेगी तब तक नागरिकों की जान ऐसे ही खतरे में रहेगी, अब जनता जवाब चाहती है – जिम्मेदार कौन और कार्रवाई कब?














