आर्य वीर दल पाली के बौद्धिक सत्र में वर्षा ऋतु में वेदपाठ करने का आव्हान

- पाली
आर्य वीर दल सचिव वैदिक विद्वान हनुमान आर्य ने वेदों में आये वर्षा ऋतु के सम्बंध में पर्जन्य सूक्त, वृष्टि सूक्त, मंडूक सूक्त के बारे में बताया की पर्जन्य सूक्त मे मेघ के गरजने, सुखदायक वर्षा होने एवं सृष्टि के फलने-फूलने का सन्देश हैं।
जबकि मंडूक सूक्त वर्षा ऋतु में हमारे कर्तव्यों का प्रतिपादन हैं। वर्षा आती है तब मंडूक प्रसन्नता पूर्वक टर्र टर्र के साथ एक दूसरे का स्वागत करते हैं जैसे कि पिता पुत्र का। एक मंडूक दूसरे मंडूक की ध्वनि को इस प्रकार दोहराता है, जैसे शिष्य वेदपाठी ब्राह्मण गुरु के मन्त्रों को।
उन्होंने कहा कि वर्षा ऋतु के साथ श्रावणी पर्व का आगमन होता है जब वर्षा होती है तब मंडूक तेज ध्वनि निकालते हुए एक दूसरे के समीप जाते हैं वैसे ही हमे भी अपने परिवार के सभी सदस्यों, संबन्धियों, मित्रों, अनुचरों आदि के साथ बैठकर वेदों का पाठ करना चाहिए। जब हम सभी समान मन्त्रों से एक ही पाठ करेंगे तो सभी की ध्वनि एक ही होगी तब सब के विचार एक होंगे। सभी के आचरण भी श्रेष्ठ बनेंगे। वे रविवार को आर्य वीर दल पाली के बौद्धिक सत्र में सम्बोधित कर रहे थे।

प्रचार मंत्री घेवरचन्द आर्य ने बताया कि इससे पूर्व वरिष्ठ आर्य वीर गणपत भदोरियां ने विधिवत ध्वजारोहण कर सत्र का आरंभ किया। हनुमान आर्य के निर्देशन में वेद मंत्रों के गान के साथ सबने संध्या कर स्व आत्म निरिक्षण किया। रीकू पंवार ने ईश्वर भजन सुनाया, रिद्धि आर्या ने आर्य समाज के नियमो का वाचन किया, सिद्धार्थ आर्य ने जयघोष करवाया, पूजा तोमर ने शान्ति पाठ करवाया पश्चात सभी आर्य वीर वीरांगनाओं की दोड, लम्बी कूद, ऊची कूद, लंगड़ा दोड आदि परम्परागत खेलकूद हुए।
इस अवसर पर आर्य वीरांगना, सोनाली आर्या, वरिष्ठ आर्य वीर, केलाश आर्य, भरतवीर सिंह, हनुमान सिंह रावत राजपूत, मनीष प्रजापत, सचिन कुमावत, पीयूष सोनल, दिव्याश, मनन मदोरियां, विष्णु बंजारा, महेंद्र प्रजापत, शंकर हंस, कुशल देवड़ा, विनोद सिंह तोमर सहित कई आर्य वीर वीरांगनाएं मौजूद रहे।













