ई-कॉमर्स में डाक पैटर्न पर सरकार का कड़ा रुख, सरकार ने ई-कॉमर्स साइटों को डार्क पैटर्न हटाने का दिया आदेश
कॉन्फडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय मंत्री एवं अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकर ठक्कर ने बताया भारत के कानूनो की धज्जियां उड़ाने वाली वाली ई-कॉमर्स कंपनीयों पर कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को स्व-ऑडिट करने और अपनी सेवाओं से डार्क पैटर्न को खत्म करने का निर्देश देते हुए एक सलाह जारी की है, केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के राज्य मंत्री बीएल वर्मा ने मंगलवार को संसद को यह सूचित किया।
- मंत्री ने मौजूदा सत्र के दौरान राज्यसभा को लिखित उत्तर के माध्यम से भ्रामक ऑनलाइन प्रथाओं से निपटने के लिए सरकार के प्रयासों के बारे में जानकारी दी।
- डार्क पैटर्न उन डिजाइन तत्वों और चयन वास्तुकला को संदर्भित करता है, जिनका उपयोग जानबूझकर उपभोक्ताओं को धोखा देने, मजबूर करने या हेरफेर करने के लिए किया जाता है, जिससे वे ऐसे निर्णय ले सकें जो उनके सर्वोत्तम हितों की पूर्ति नहीं करते।
- उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत सीसीपीए ने निष्पक्ष, नैतिक और उपभोक्ता-केंद्रित डिजिटल बाज़ार स्थापित करने के व्यापक प्रयासों के तहत इस महीने की शुरुआत में यह परामर्श जारी किया था।
- वर्मा ने कहा कि सभी ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों को यह सुनिश्चित करने के लिए तत्काल उपाय करने के निर्देश दिए गए हैं कि उनकी सेवाएं डार्क पैटर्न की विशेषता वाले भ्रामक और अनुचित व्यापार प्रथाओं में शामिल न हों।
- प्लेटफार्मों को सलाह जारी होने के तीन महीने के भीतर व्यापक स्व-ऑडिट पूरा करना आवश्यक है ताकि उनके सिस्टम से ऐसी प्रथाओं की पहचान की जा सके और उन्हें समाप्त किया जा सके।
- इन स्व-मूल्यांकनों के पूरा होने के बाद, ई-कॉमर्स कंपनियों को औपचारिक घोषणाएं देनी होंगी, जिससे यह पुष्टि हो सके कि उनके प्लेटफॉर्म डार्क पैटर्न से मुक्त हैं।

इन दिशानिर्देशों में ई-कॉमर्स क्षेत्र में सामान्य रूप से पाए जाने वाले 13 विशिष्ट डार्क पैटर्न की पहचान की गई है, जिनमें झूठी तात्कालिकता की रणनीति, बास्केट स्नीकिंग, कन्फर्म शेमिंग, जबरन कार्रवाई, सदस्यता जाल, इंटरफेस हस्तक्षेप, प्रलोभन और स्विच प्रथाएं, ड्रिप मूल्य निर्धारण, प्रच्छन्न विज्ञापन, लगातार परेशान करना, भ्रामक शब्दावली, सॉफ्टवेयर-ए-ए-सर्विस बिलिंग अनियमितताएं और दुष्ट मैलवेयर परिनियोजन शामिल हैं।
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अनुसार, इन हेरफेर प्रथाओं में विभिन्न भ्रामक तकनीकें शामिल हैं जैसे कि ड्रिप मूल्य निर्धारण, प्रच्छन्न विज्ञापन, प्रलोभन और स्विच योजनाएं, और झूठी तात्कालिकता सूचनाएं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ऐसी प्रथाएं उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2 के तहत उप-धारा 47 में निर्दिष्ट ‘अनुचित व्यापार प्रथाओं’ की परिभाषा के अंतर्गत आती हैं, जो गैर-अनुपालन प्लेटफार्मों के खिलाफ नियामक कार्रवाई के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करती हैं।
*शंकर ठक्कर ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कैट द्वारा की गई शिकायतों का संज्ञान लेते हुए यह सलाह देने के लिए सरकार के आभारी है। इस आवश्यकता का उद्देश्य पारदर्शिता को बढ़ावा देना और डिजिटल वाणिज्य में उपभोक्ता विश्वास का पुनर्निर्माण करना है, साथ ही पूरे क्षेत्र में निष्पक्ष व्यापार प्रथाओं को सुनिश्चित करना है। इसमें सरकार को स्व ऑडिट की जगह एक निगरानी तंत्र का गठन करके उसके द्वारा ऑडिट किया जाना चाहिए ताकि यह कंपनियां कानून के साथ भद्दा मजाक ना बन सके












