उत्तर प्रदेश में मेडिकल एजुकेशन को मिला बड़ा बूस्ट, बढ़ीं 950 MBBS और 271 PG सीटें
उत्तर प्रदेश सरकार ने मेडिकल एजुकेशन के क्षेत्र में बड़ी पहल करते हुए राज्यभर के मेडिकल कॉलेजों में 950 नई MBBS और 271 नई PG सीटें जोड़ी हैं। इस कदम से न केवल डॉक्टरों की नई पीढ़ी तैयार होगी बल्कि राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता भी मजबूत होगी।

- उत्तरप्रदेश
मेडिकल कॉलेजों की क्षमता में ऐतिहासिक विस्तार
- छात्रों को मिलेगा अधिक अवसर और स्वास्थ्य सेवाओं को नई ताकत
उत्तर प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने मेडिकल कॉलेजों की क्षमता बढ़ाते हुए इस शैक्षणिक सत्र में 950 नई MBBS सीटें और 271 PG सीटें स्वीकृत की हैं। यह वृद्धि राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर सीटें बढ़ाने से न केवल मेडिकल एजुकेशन में अवसर बढ़ेंगे, बल्कि डॉक्टरों की कमी दूर करने में भी मदद मिलेगी।
राज्य के कई सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में सीटें जोड़ी गई हैं। इससे उन छात्रों को राहत मिलेगी जो हर साल सीमित सीटों के कारण बाहर के राज्यों में पढ़ाई करने को मजबूर होते थे। सरकार का कहना है कि मेडिकल कॉलेजों में सीटें बढ़ाने के साथ-साथ इंफ्रास्ट्रक्चर और फैकल्टी की संख्या भी बढ़ाई जा रही है ताकि शिक्षा की गुणवत्ता बनी रहे।
मुख्य बातें
- इस साल 950 MBBS सीटें और 271 PG सीटें जोड़ी गईं।
- सीटें बढ़ाने का फैसला नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) की मंजूरी के बाद लागू किया गया।
- मेडिकल कॉलेजों में नई सीटों से छात्रों को अधिक प्रवेश अवसर मिलेंगे।
- राज्य में अब मेडिकल शिक्षा के लिए और अधिक ट्रेनिंग फैसिलिटीज़ और क्लिनिकल एक्सपोजर उपलब्ध होंगे।
- स्वास्थ्य सेवाओं में कुशल डॉक्टरों की संख्या बढ़ेगी जिससे मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा।
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सरकार की योजना और आगे की दिशा
उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल के वर्षों में कई नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की है। अब सीटों में यह वृद्धि उस दिशा में एक और ठोस कदम है। अगले कुछ महीनों में राज्य के विभिन्न जिलों में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को और विकसित करने की योजना भी तैयार की जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि हर जिले में गुणवत्तापूर्ण मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित की जा सकें।
विशेषज्ञों की राय
मेडिकल शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगा। बढ़ती सीटों से छात्रों को स्थानीय स्तर पर बेहतर शिक्षा मिलेगी और राज्य के अस्पतालों को प्रशिक्षित डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।










