गांव में पहुंची सरकार: एडीएम कुमावत बोले – “अब हर सेवा गांव के द्वार पर”

शाहपुरा – मुलचंद पेसवानी। शाहपुरा उपखंड क्षेत्र के फूलियाकला की ग्राम पंचायत सांगरिया सोमवार को सरकार के “आपका प्रशासन, आपके द्वार” अभियान का सजीव उदाहरण बन गई। यहां आयोजित ग्राम सेवा शिविर में सुबह से ही ग्रामीणों का सैलाब उमड़ पड़ा। सैकड़ों ग्रामीण अपनी समस्याओं और सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए पहुंचे। शिविर में अतिरिक्त जिला कलेक्टर शाहपुरा श्री रामावतार कुमावत ने स्वयं पहुंचकर शिविर का निरीक्षण किया और ग्रामीणों से सीधा संवाद किया।
एडीएम कुमावत ने ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और मौके पर ही समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अब शासन की सभी सेवाएं सीधे गांव के दरवाजे तक पहुंच रही हैं। किसी भी ग्रामीण को कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे, बल्कि उनके काम यहीं स्थल पर निस्तारित किए जाएंगे। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि किसी भी पात्र व्यक्ति को योजनाओं से वंचित नहीं रखा जाए और प्रत्येक सेवा का लाभ समय पर हर ग्रामीण तक पहुंचे।

शिविर के दौरान उपखंड अधिकारी ओमप्रकाश, तहसीलदार रामदेव धाकड़ सहित सभी विभागों के अधिकारी एक साथ मौजूद रहे। इस अवसर पर ग्रामीणों ने कहा कि पहली बार इतने अधिकारी एक साथ गांव में पहुंचे हैं। इससे ग्रामीणों में उत्साह और विश्वास का वातावरण बना। कई लोगों ने प्रशासन के इस प्रयास की खुलकर सराहना की।
शिविर में स्वास्थ्य, राजस्व और सामाजिक सुरक्षा विभागों ने संयुक्त रूप से सेवाएं प्रदान कीं। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया और नि:शुल्क दवाएं वितरित कीं। राजस्व विभाग द्वारा नामांतरण, सीमाज्ञान और पट्टा वितरण जैसे कार्यों का मौके पर निस्तारण किया गया। वहीं सामाजिक सुरक्षा विभाग ने पेंशन, पालनहार, विधवा और वृद्धावस्था योजनाओं से संबंधित लाभ भी वहीं प्रदान किए।
निरीक्षण के दौरान एडीएम कुमावत ने कहा कि शासन की प्रत्येक योजना अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, यह प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सेवा का अर्थ केवल सुविधा देना नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाना है। साथ ही उन्होंने ग्रामीणों से भी अपील की कि वे सरकारी योजनाओं में सक्रिय भागीदारी निभाएं, क्योंकि विकास तभी संभव है जब समाज और सरकार दोनों साथ मिलकर काम करें।
ग्रामीणों ने इस शिविर के आयोजन के लिए प्रशासन का आभार जताया। उन्होंने कहा कि महीनों से लंबित कई काम आज एक ही दिन में निपट गए हैं। लोगों ने यह भी अनुरोध किया कि ऐसे शिविर नियमित रूप से आयोजित किए जाएं ताकि प्रशासन और जनता के बीच की दूरी खत्म हो सके। इस प्रकार सांगरिया का यह शिविर सरकार की ग्रामीण पहुंच और प्रशासनिक संवेदनशीलता का एक सशक्त उदाहरण बन गया।












