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गेहूं के रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद सरकार ने फिर स्टॉक सीमा को जारी रखा,मार्च 2026 तक जारी रहेगी

  • मुंबई



सरकार द्वारा रिकॉर्ड उत्पादन का दावा फिर खुदरा व्यापारियों पर स्टॉक सीमा की क्या आवश्यकता ? : शंकर ठक्कर


कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के राष्ट्रीय मंत्री एवं अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकर ठक्कर ने बताया देश में रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन और सरकारी खरीद बढ़ने के बावजूद, केंद्र सरकार ने व्यापारियों और खुदरा विक्रेताओं के लिए गेहूं के भंडारण पर एक बार फिर स्टॉक सीमा लागू कर दी है।

गेहूं की कीमतों को स्थिर रखने और घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने व्यापारियों और खुदरा विक्रेताओं के लिए गेहूं पर भंडारण सीमा फिर से लागू कर दी है। बुधवार को जारी एक अधिसूचना के अनुसार, खुदरा विक्रेता केवल 10 टन गेहूं ही भंडारित कर सकेंगे। इस कदम का उद्देश्य जमाखोरी और अटकलों पर आधारित व्यापार को रोकना है, ताकि बाजार में पारदर्शिता और आपूर्ति बेहतर हो सके।

वर्ष 2024–25 में गेहूं के रिकॉर्ड उत्पादन के अनुमानों के बावजूद सरकार ने यह निर्णय लिया है। कृषि मंत्रालय ने गेहूं उत्पादन के अनुमान को बढ़ाकर 11.75 करोड़ टन कर दिया है, जो पिछले वर्ष के 11.32 करोड़ टन के आंकड़े से अधिक है। गेहूं उत्पादन में इस बढ़ोतरी के पीछे अनुकूल मौसम, उन्नत बीज और बेहतर एमएसपी प्रमुख कारक हैं।

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गेहूं के बंपर उत्पादन का असर इस साल सरकारी खरीद पर भी दिखा है जो 298 लाख टन तक पहुंच गई है। यह पिछले चार वर्षों में गेहूं की सबसे अधिक सरकारी खरीद है। इससे केंद्रीय पूल में गेहूं भंडार लगभग 440 लाख टन हो गया है, जो कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की 184 लाख टन वार्षिक आवश्यकता से कहीं अधिक है। पिछले साल सरकार ने गेहूं के कम स्टॉक के चलते राशन प्रणाली में गेहूं का आवंटन कर दिया था। साथ ही कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए 40 लाख टन से अधिक गेहूं की खुले बाजार की बिक्री योजना के तहत कारोबारियों को बिक्री की थी। इसके बावजूद कीमतें 3000 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास बनी रही थी।

शंकर ठक्कर ने आगे कहा हैरानी की बात है कि देश में रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन के बावजूद केंद्र सरकार को खरीद सीजन समाप्त होते ही गेहूं पर स्टॉक लिमिट लगानी पड़ी है। साथ ही, सरकार का फिलहाल गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध हटाने या 40% आयात शुल्क को कम करने का कोई इरादा नहीं दिखता है। ये नीतिगत फैसले देश में बंपर गेहूं उत्पादन के दावों पर सवाल खड़े करते हैं। साथ ही इस बात की उम्मीद थी कि रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन और सरकारी खरीद के बेहतर होने के चलते गेहूं के निर्यात की अनुमति भी दी जा सकती है और स्टॉक सीमा को दूर किया जाएगा लेकिन सरकार ने गेहूं की सरकारी खरीद जारी रहने की अवधि के बीच ही स्टॉक सीमा लागू कर दी है इसके चलते छोटे और मझोले व्यापारियों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा और “इस ऑफ डूइंग बिजनेस” के बिल्कुल विपरीत सरकार द्वारा किया जा रहा है इसलिए खासकर खुदरा व्यापारियों के ऊपर से स्टॉक सीमा हटा देनी चाहिए।

Khushal Luniya

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