त्योहारी सीजन में सस्ता हो सकता है सूरजमुखी तेल, रूस ने 31 अगस्त 2025 तक निर्यात शुल्क किया निलंबित

मुंबई / ललित दवे | भारतीय उपभोक्ताओं के लिए त्योहारों से पहले एक राहत भरी खबर सामने आई है। अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कैट (कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स) के राष्ट्रीय मंत्री शंकर ठक्कर ने बताया कि रूस ने सूरजमुखी तेल और सूरजमुखी खली पर लगने वाले निर्यात शुल्क को 31 अगस्त 2025 तक के लिए निलंबित कर दिया है।
उन्होंने कहा कि यह कदम भारतीय बाजार के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकता है, विशेषकर तब जब भारत खाद्य तेल का दुनिया का सबसे बड़ा आयातक देश है और घरेलू खपत का लगभग 60% तेल आयात पर निर्भर करता है।
सस्ते आयात की उम्मीद
भारत मलेशिया, इंडोनेशिया और थाईलैंड से पाम तेल, जबकि रूस, यूक्रेन और अर्जेंटीना से सूरजमुखी तेल और अर्जेंटीना व ब्राजील से सोयाबीन तेल का आयात करता है।
हाल के महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजारों में खाद्य तेलों के दामों में तेजी आई है, जिसका असर घरेलू सरसों और नारियल तेल की कीमतों पर भी पड़ा है। ऐसे समय में रूस का यह निर्णय एक बड़ी राहत बनकर सामने आया है।
रूस का निर्णय और संभावित प्रभाव
रूस, जो विश्व के सबसे बड़े सूरजमुखी तेल उत्पादक और यूक्रेन के बाद दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक है, ने शुक्रवार को घोषणा की कि वह अपने फ्लोटिंग निर्यात शुल्क को 31 अगस्त 2025 तक स्थगित कर रहा है।
यह शुल्क 2021 में इसलिए लागू किया गया था ताकि घरेलू बाजार में अत्यधिक मूल्य वृद्धि से सुरक्षा मिल सके।
1 जुलाई 2025 तक सूरजमुखी तेल पर शुल्क 4,739 रूबल प्रति टन (लगभग $59.6), और खली पर 1,054–1,244 रूबल प्रति टन (लगभग $13–$15.7) था।
रूस सरकार ने स्पष्ट किया कि देश में पर्याप्त आपूर्ति होने के कारण यह निर्णय घरेलू उपभोक्ताओं को प्रभावित नहीं करेगा, बल्कि निर्यातकों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाएगा।
वैश्विक परिदृश्य और उत्पादन अनुमान
- यूएस कृषि विभाग के अनुसार, रूस और यूक्रेन मिलकर विश्व के 50% से अधिक सूरजमुखी बीज का उत्पादन करते हैं और वैश्विक सूरजमुखी तेल और खली निर्यात में इनकी हिस्सेदारी लगभग 75% है।
- IKAR कंसल्टेंसी का अनुमान है कि रूस ने 2024/25 सीजन में 4.7 मिलियन टन सूरजमुखी तेल का निर्यात किया था।
- यह सीजन 31 अगस्त 2025 को समाप्त होगा।
- अगस्त में ही लगभग 3.5 लाख टन सूरजमुखी तेल निर्यात होने की संभावना है।
- इस साल की फसल 18 मिलियन टन तक पहुंचने का अनुमान है, जो अब तक का रिकॉर्ड हो सकता है।
भारतीय बाजार के लिए क्या मायने रखता है यह निर्णय?

शंकर ठक्कर के अनुसार, “रूस सरकार के इस निर्णय से सूरजमुखी तेल का भारत में आयात बढ़ेगा और शून्य निर्यात शुल्क के कारण यह अन्य खाद्य तेलों की तुलना में किफायती दरों पर उपलब्ध हो सकता है। यदि भारत सरकार इस अवधि में आयात शुल्क में बढ़ोतरी नहीं करती है तो दिवाली तक उपभोक्ताओं को सस्ता सूरजमुखी तेल मिलना संभव है।”
निर्यातकों को भी लाभ
ऑयल एंड फैट नामक रूसी लॉबी समूह ने भी इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि इससे निर्यातकों को स्टॉक खत्म करने में मदद मिलेगी और नया सीजन आते-आते बाजार की स्थिति स्थिर होने की संभावना है। साथ ही, बीजों की कीमतें भी प्रसंस्करण इकाइयों के लिए आर्थिक रूप से व्यवहार्य स्तर पर आ सकती हैं।
रूस का यह कदम वैश्विक सूरजमुखी तेल बाजार में स्थिरता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए यह निर्णय त्योहारी मौसम में उपभोक्ताओं को राहत देने वाला हो सकता है, बशर्ते आयात पर कोई अतिरिक्त कर न लगाया जाए।












